त्वरित टिप्पणीः आखिर क्यों विकास दुबे चिल्ला रहा था, 'मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला'

क्या अपनी पहचान बता कर विकास दुबे अपनी जान बचा रहा था. कैसे गिरफ्तारी से बचने के लिए 8 पुलिस वालों की हत्या कर देने वाले दुर्दांत अपराधी को मंदिर के सीसीटीवी कैमरों के बीच 4 सिपाहियों और मंदिर के गार्डों ने 'पकड़' लिया.

Source: News18Hindi Last updated on: July 9, 2020, 12:54 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
त्वरित टिप्पणीः आखिर क्यों विकास दुबे चिल्ला रहा था, 'मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला'
विकास दुबे उज्जैन में गिरफ्तार हो गया है.
उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) की गिरफ्तारी पर मध्य प्रदेश के बहादुर पुलिस अधिकारी अपने इंटेलीजेंस की सफलता का गुणगान कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश की पुलिस अपनी सतर्कता और हर जगह चौकसी की बातें कर रही है. फिर भी एक आवाज जो सतर्कता की सारी सीमाओं को तोड़ दे रही है, वो है – 'मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला'. जी हां, जो विजुअल टेलीविजन पर चल रहे हैं उसमें विकास दुबे खुद अपनी पहचान बता रहा है. साथ ही ये भी कह रहा है ‘कानपुर वाला हूं.’

शातिर दिमाग का इस्तेमाल

वैसे भी उसके दुर्दांत दुस्साहस ने विकास को इतना तो मशहूर कर ही दिया है कि नाम से उसे पहचान लिया जाए. इस अपराधी के शातिर होने की गवाही इसकी कार्यशैली से मिल ही चुकी है. ये अपराधी हर पार्टी के नेता और तमाम बड़े अधिकारियों के संपर्क में था. इसकी तमाम तस्वीरें मीडिया और सोशल साइटों पर हैं. कहीं इसी शातिर दिमाग का इस्तेमाल करके विकास दुबे ने महाकाल पहुंचने की योजना तो नहीं बनाई. उसे ये भी पता था कि महाकाल मंदिर परिसर के आसपास हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. अगर उसे निहत्था मारने की कोशिश भी की जाती तो कैमरों में सब कुछ रिकॉर्ड हो जाता.

यूपी पुलिस से भाग रहा था
माना जा सकता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान पुलिस भी बहुत सतर्क थी. हथियारबंद पुलिस वाले उसकी तलाश कर रहे थे. लेकिन उज्जैन जैसी जगह पर उसके पहुंचने की बहुत अधिक संभावना किसी को रही हो, इस पर सवाल है. अगर पुलिस को इसकी कोई सूचना होती तो और चाक चौबंद व्यवस्था होती. पुलिस वाले हथियारों से लैस होते. विकास लागातार यूपी पुलिस से भाग रहा था. उसे चिंता ये थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस कहीं भी उसे पकड़ती तो, बहुत अधिक संभावना थी कि, उसे गोली मार देती. पुलिस के जवान आखिर आठ पुलिस वालों की हत्या से गुस्से में थे ही.



राजधानी का भी चक्कर लगायाइसी से बचने के लिए वो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चक्कर लगा रहा था. उसे लग रहा था कि दिल्ली पुलिस बिना मुठभेड़ के गोली मारने से गुरेज करेगी. माना जा रहा है कि इसी कारण से वो फरीदाबाद में शरण लेने की कोशिश कर रहा था. बुधवार को ये चर्चा थी कि वो पुलिस की गोलियों से बचने के लिए मीडिया के कैमरों की शरण ले सकता है. इस वजह से फिल्म सिटी जहां सारे चैनलों के दफ्तर हैं, वहां पुलिस ने खास चौकसी लगा रखी थी.

मध्य प्रदेश पुलिस के दावे

गिरफ्तारी के बाद एमपी पुलिस के दावे आने लगे. पुलिस के आला अफसर कहने लगे कि पुलिस ने संदेह होने पर उसे पकड़ा. यहां तक कि जिले के डीएम ने भी पुलिस के सुर में सुर मिला लिया. फिर  वही सवाल खड़ा हो गया कि जो आदमी खुद ही चिल्ला रहा है कि वही विकास दुबे है तो उस पर संदेह होने की क्या जरूरत है. हां ये बात अलग है कि पकड़े जाने के बाद उसके असली होने की तसदीक की जाती. जो की भी गई. पूरे प्रकरण में ऐसा लग रहा था कि पुलिस अफसर भी ये मानने से थोड़ा हिचक रहे थे कि इतना दुर्दांत अपराधी इतनी आसानी से पकड़ में आ गया. दरअसल ऐसा लगता है कि ये भी उसी की साजिश थी.  इसमें भी वो सफल ही रहा. इसका मकसद उसका गुणगान करना नहीं, बल्कि ये बताना कि हमारी उत्तर प्रदेश पुलिस की नाकामी साबित हुई है. ये वही पुलिस है जो अपराधियो को कोर्ट तक में सरेंडर करने से रोकने के लिए कोर्ट को छावनी बनाने से नहीं चूकती. विकास के मामले में तो हाई टेक हो चुकी यूपी पुलिस की इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेंस जैसी चीज सुनने में ही नहीं आई. यहां तक कि जब विकास और उसके साथी फरीदाबाद में देखे गए तो उनके पास असलहे भी थे. यानी वे हथियार लेकर चल रहे थे.

8 पुलिस वालों के हत्यारे को सिपाहियों ने 'पकड़ा'

बहरहाल जो भी हो, विकास दुबे अपनी जान बचाने में सफल हो गया. एक अपराधी जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक गजेटेड ऑफिसर समेत आठ पुलिस वालों की हत्या कर दी थी उसे मंदिर की सुरक्षा में लगे कुछ निहत्थे से दिखने वाले सिपाहियों और गार्डों ने कथित तौर पर पकड़ लिया.
facebook Twitter whatsapp
First published: July 9, 2020, 11:08 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading