फीकी पड़ने लगी मिथिलांचल में वर-वधू चुनने की 700 साल पुरानी सौराठ सभा की चमक?

Saurath Sabha: मधुबनी की प्रभारी मंत्री लेसी सिंह ने पिछले दिनों जिले की यात्रा के दौरान कहा था कि मैथिल ब्राह्मणों के विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा के विकास की पहल की जाएगी. इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने और राजकीय महोत्सव के रूप में मनाने के लिए प्रयास किया जाएगा.

Source: News18Hindi Last updated on: July 19, 2021, 9:46 am IST
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क्यों फीकी पड़ने लगी मिथिलांचल में वर-वधू चुनने की 700 साल पुरानी सौराठ सभा
सौराठ सभा का एक दृश्य
पटना. कभी मिथिलांचल में विवाह तय करने की मशहूर स्थली रही सौराठ सभा की चमक आज फीकी पड़ गई है. सौराठ सभा का गरिमामय इतिहास रहा है जो सदियों से सामाजिक रिश्ते की बुनियाद को मजबूती प्रदान करता आया है. लेकिन सामाजिक ताने-बाने के बदलते स्वरूप ने इसकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. फिर भी अपनी परंपरा को बचाए रखने की इच्छा ने उम्मीद बनाए रखी है.



सौराठ सभा का इतिहास सात सौ साल पुराना है. सौराठ बिहार के मधुबनी जिले का एक गांव है, जो जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व दिशा में है. कहा जाता है कि बारहवीं सदी में गुजरात के दो ब्राह्मण यहां आकर बस गये थे. वे मुगलों के आक्रमण के दौरान यहां आए थे. वे लोग सौराष्ट्र से आकर यहां बसे थे इसलिए बाद में इस जगह का नाम सौराठ पड़ गया. गांव से थोड़ी ही दूरी पर गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की आकृति जैसा एक मंदिर भी है. इसी सौराठ में एक विशाल पेड़ है जिसके नीचे कई साल से सभा का आयोजन होता है जिसमें विवाह योग्य लडक़े-लड़कियों के परिजन आपस में मिलते हैं और वै रिश्ते पक्के करते हैं. इस साल 27 जून से 7 जुलाई तक सौराठ सभा का आयोजन हुआ.



700 साल पुराना है सौराठ सभा का इतिहास

कहते हैं 1310 ई. में कर्णाट वंश के राजा हरिसिंह देव ने इसकी शुरुआत की थी.सभा के आयोजन के पीछे उनकी सोच थी कि एक ही गोत्र में विवाह न हो बल्कि वर-वधू के गोत्र अलग-अलग हों. राजा हरिसिंह देव ने 1327 ई. में पंजीकरण व्यवस्था की शुरुआत की. पंजीकार का दायित्व था कि वे क्षेत्र के लोगों के कुल-खानदान के बारे में जानकारी इकट्ठा कर उसे पंजीकृत करें यानि रजिस्टर में दर्ज करें. इससे यह पता चल जाता था कि अमुक परिवार किस कुल या गोत्र का है.



क्यों मशहूर है सौराठ सभा?

जब एक बार दोनों पक्ष रिश्ता तय करने के लिए तैयार हो जाते हैं तब वे लोग पंजीकार की मदद लेते हैं. पंजीकार देखते हैं कि दोनों पक्षों में सात पुश्तों तक कोई वैवाहिक रिश्ता तो नहीं था? जब यह साबित हो जाता है कि सात पुश्तों तक रिश्ता नहीं रहा है तब विवाह की मंजूरी पंजीकार दे देता है. साथ ही जन्मपत्री और राशिफल के आधार पर लडक़े और लडक़ी की कुंडली भी मिलायी जाती है. कुंडली मिल जाने पर शादी तय कर दी जाती है. समय के बदलते दौर में भी लोग भले शादी तय करने सभा में न आते हों लेकिन सिद्धांत लिखवाने आते हैं. सिद्धांत लिखवाने का मतलब होता है वैवाहिक रिश्ता तय करने की जानकारी देना. ताड़ के पत्तों पर सिद्धांत लिखने का रिवाज यहां आज भी कायम है.



बिहार के मिथिलांचल में मशहूर सौराठ सभा का एक दृश्य




क्यों कम हुआ सौराठ सभा का आकर्षण?

पहले सौराठ सभा में लाखों लोग आते थे लेकिन अब हजार भी नहीं आते. इसके कई कारण समझे जाते हैं हैं. पहले आवागमन के साधन कम थे तो सौराठ सभा जैसे आयोजन वैवाहिक रिश्ते की तलाश करने का माध्यम थे आज वैवाहिक रिश्ते की तलाश का दायरा भी बहुत बढ़ गया है. अब शादी के लिए जाति, गोत्र, धर्म आदि के बंधन ढीले होते जा रहे हैं.



परंपरा को बचाए रखने की कवायद

लेकिन अपनी परंपरा, को बचाए रखने की कोशिश भी हो रही है. कई सामाजिक संगठन इसमें लगे हुए हैं. समय के साथ चलते हुए रिश्ते-नाते के खातों यानि पंजी को कंप्यूटरीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है. इससे मिथिला के लोगों को वंशावली के बारे में ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी. कुल-खानदान के बारे में जानकारी जुटाने में सहूलियत होगी. सरकार के स्तर पर भी सौराठ सभा की गरिमा को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.



मधुबनी जिले की प्रभारी मंत्री लेसी सिंह ने पिछले दिनों जिले की यात्रा के दौरान कहा था कि मैथिल ब्राह्मणों के विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा के विकास की पहल की जाएगी. इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने और राजकीय महोत्सव के रुप में मनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा. मधुबनी से ही आने वाले राज्य के पीएचईडी मंत्री रामप्रीत पासवान ने भी पंजी के कम्प्यूटरीकरण को आवश्यक माना है. उन्होंने भी कहा है कि सौराठ सभा को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिलाने के लिए हर संभव मदद की जाएगी, ताकि इस परंपरा को बचाया जा सके.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
रजनीश चंद्र

रजनीश चंद्र

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First published: July 19, 2021, 9:46 am IST