प्रवासी की बात: कमाना तो दूर जो था, उसे गंवा आए

सोहन सिंह तीन बेटों में सबसे बड़े हैं. सोहन सिंह कुछ वर्ष पहले अपने पिता के परिवार से अलग हुए थे. आदिवासी समाज में यह परंपरा है कि विवाह होने और उसके बाद बच्चे होने पर पिता अपने पुत्र के परिवार को अलग कर देता है.

Source: News18Hindi Last updated on: June 13, 2020, 9:06 AM IST
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प्रवासी की बात: कमाना तो दूर जो था, उसे गंवा आए
मजदूर सोहन सिंह अपने परिवार के साथ
उमरिया. मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के ग्राम पंचायत धवईझर का सरईटोला गांव. सोहन सिंह आदिवासी यहीं के निवासी हैं. उन्होंने खूब कोशिश की कि गांव के बाकी लोगों की तरह उनको पलायन न करना पड़े, यहीं कोई रोजगार मिल जाए, पर ऐसा हो न सका. मजबूरी में उन्हें पहली बार पलायन करना पड़ा, लेकिन पलायन का अनुभव बहुत कड़वा हो गया.

सोहन सिंह तीन बेटों में सबसे बड़े हैं. सोहन सिंह कुछ वर्ष पहले अपने पिता के परिवार से अलग हुए थे. आदिवासी समाज में यह परंपरा है कि विवाह होने और उसके बाद बच्चे होने पर पिता अपने पुत्र के परिवार को अलग कर देता है. पिता ने अलग करते समय उसे एक कमरा व 1.50 एकड़ जमीन सौंप दी. ग्राम पंचायत की सूची में भी सोहन परिवार अलग है. परिवार का अपना अलग जॉब कार्ड व समग्र आईडी है.

जब तक सोहन संयुक्त परिवार का हिस्सा था, अपने पिता की खेती एवं घर के अन्य कामों में सहयोग करता था. अलग होने के बाद उसके कंधों पर नई जिम्मेदारी आ गई. उसे इसी से भरण पोषण की व्यवस्था भी करनी थी. सोहन सिंह ने खेती की, लेकिन खेती में इतना उत्पादन नहीं हुआ कि साल भर खाने के लिए अनाज मिल पाए. उनकी जमीन पहाड़ी पर है, केवल बरसात के पानी से ही खेती संभव है जिस पर सोहन ने खूब मेहनत की, लेकिन खेती ठीक से नहीं हो पाई.

सोहन ने किसी तरह आसपास के गांव में मजदूरी करके 1 साल तक अपने परिवार का पालन-पोषण किया. सिर्फ खेती व स्थानीय मजदूरी के भरोसे उसके परिवार की खाद्य सुरक्षा सुरक्षित नहीं थी. पंचायत में मनरेगा का काम भी नहीं खुला. उसने बाहर जाकर कमाने का सोचा. इस बारे में पत्नी से चर्चा की. उसके गांव व आस-पास के गांवों के लोग मजदूरी करने के लिए जयपुर राजस्थान जाते हैं. होली के त्योहार में वे लौटकर घर आए थे.
सोहन के पिता नन्हे सिंह भी जयपुर मजदूरी करने जाते हैं. उसने पिता जी से चर्चा की कि वह इस बार उनके साथ काम करने जाएगा. 15 मार्च 2020 को सोहन सिंह अपने पिता व छोटे भाई ओमप्रकाश केशव जयपुर के लिए निकल गए. जयपुर में वाटिका नामक जगह पर किराए का कमरा ₹600 प्रति व्यक्ति के हिसाब से मिला. 17 मार्च को 400 रुपए रोज पर काम मिल गया. 18 मार्च से भवन निर्माण में मजदूरी का काम शुरू हुआ. 21 मार्च तक वह काम कर ही रहे थे कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा हो गई.

काम बंद हुआ तो ठेकेदार से पता किए तो उसने बताया ‘कोरोना नामक बीमारी का संक्रमण देश में हो रहा है. जिससे बाहर निकलना मना है. आप लोग भी नहीं निकले अब काम जब चालू होगा तो बताएंगे.‘ शाम को फिर ठेकेदार का फोन आया बोला कि ‘काम अब नहीं चालू होगा. लॉकडाउन हो गया है, जो जहां है वहीं रहे.‘

सोहन व उसके पिता जहां रुके थे उसके आस-पास उनके जिला उमरिया व डिण्डौरी के कुछ और लोग थे. उनसे संपर्क व चर्चा कर पैदल उमरिया निकलने की योजना बनाई. रास्ते में खाने के लिए रोटी व चटनी बनाकर रखकर 24 मार्च को 10 लोग निकलते हैं. 4 लोग उमरिया जिले व 6 लोग डिंडौरी जिले के थे. वे वाटिका, जयपुर  निवाई होते हुए वह पैदल चल रहे थे.रास्ते में एक ट्रक मिला. उससे अर्जी-मिन्नत की तो ₹200 प्रति व्यक्ति किराया लेकर झालावाड़ तक पहुंचा दिया. झालावाड़ से पैदल चलते-चलते एमपी बॉर्डर में पहुंचे. जहां उनकी जांच की गई और कहा गया कि आप लोग अगर तैयार हो तो हम यहां से एक गाड़ी करा देंगे किराया आप लोग दे देना. पुलिस ने वहां से एक गाड़ी ₹12000 में तय करा दी. उससे उमरिया पहुंचे. सोहन बताते हैं कि ‘वे पहली बार काम करने के लिए घर से बाहर निकले थे. घर से यह सोच कर गए थे कि कुछ कमा कर लाएंगे, लेकिन कमाना तो छोड़िए, घर से जो लेकर गए थे वह भी गंवा कर आ गए.‘

उनका मानना है अगर उनके जिले में आसपास कहीं रोजगार मिल जाता तो उन्हें इतना दूर मजदूरी के लिए नहीं जाना पड़ता. 4 सदस्यों का परिवार सबके लिए खाना, कपड़े की जरूरत और काम ना मिले तो कैसे गुजारा चलेगा?

उनके मन में डर है वह दोबारा लौट कर पलायन में नहीं जाना चाहते, लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार का कोई साधन नहीं होने की वजह से वह कुछ कह नहीं सकते कि आगे क्या होगा?

(कोविड-19 ने प्रवासी मजदूरों की जिंदगी में दोहरा संघर्ष पैदा कर दिया है. शहर से निकलकर गांव तो पहुंच गए, लेकिन मुश्किलें अभी थमी नहीं हैं. सरकार से राहत मिली है, पर अभी और राहत की जरूरत है. भारत के ऐसे ही मजबूर इंसानों की कहानी पढ़िए इस सीरीज में.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
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First published: June 13, 2020, 9:06 AM IST
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