OPINION: एक बैगा था अजीत जोगी का रोल मॉडल

भैरा बैगा उनका पहला रोल मॉडल था, (इसका जिक्र जोगी ने अपनी किताब के पहले चेप्टर में भी किया) वे उसे देखते थे तो उसी के जैसा बनने के बारे में सोचते. जोगी ने बताया था कि उनके अंदर जो निडरता है, किसी भी मुश्किल परिस्थिति का धैर्य के साथ सामना करने की जो शक्ति है, हर ठोकर के बाद फिर से उठ खड़े होने का जो जज्बा है वह उनके बचपन में मिली इस ट्रेनिंग का नतीजा है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 29, 2020, 9:05 PM IST
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OPINION: एक बैगा था अजीत जोगी का रोल मॉडल
एक बैगा था अजीत जोगी का रोल मॉडल (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी नहीं रहे. वह एक दिलचस्प इंसान थे. और मुझे व्यक्तिगत बातचीत में लगे भी. छह साल पहले छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव के मौके पर मुझे उनका एक इंटरव्यू करने का मौका मिला था. इस इंटरव्यू में मेरे संपादक ने मुझे एक गैर—राजनीतिक ऑफ बीट इंटरव्यू करने के लिए कहा था. इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से बातचीत होनी थी. यह बातचीत इतनी दिलचस्प थी जिसने जोगी के व्यक्तित्व के कई पन्ने खोले थे. उन्होंने समय तो बीस मिनट ही मुकर्रर किया था पर यह बातचीत लगभग सवा घंटे चलती रही.

इंसान से ज्यादा डरता है शेर

जोगी का बचपन ऐसे क्षेत्र में बीता जो जंगलों से घिरा हुआ था. बकौल जोगी उस जमाने में वहां एक बैगा रहता था. उसे ग्रामीण भैरा बैगा कहते थे. जंगल, जानवरों और जड़ी बूटियों की बेमिसाल जानकारी थी उस बैगा के पास. बैगा उस समय अपने जवानी के दौर में हट्टा-कट्टा था, कसा हुआ शरीर और गजब की फुर्ती थी. जोगी बैगा के पीछे-पीछे जंगल चले जाते थे. बैगा से उन्हें प्रकृति के बारे काफी कुछ सीखने को मिला. भैरा बैगा उनसे कहा करता था कि शेर से जितना डर इंसान को लगता है, शेर उससे कहीं ज्यादा इंसान से डरता है. वह दो ही सूरतों में इंसान पर हमला करता है एक जब वह घायल हो और लंबे समय से भूखा हो, दूसरा यदि उसके खाने या आराम करने के समय उसे छेड़ा जाए.

भैरा बैगा उनका पहला रोल मॉडल
भैरा बैगा उनका पहला रोल मॉडल था, (इसका जिक्र जोगी ने अपनी किताब के पहले चेप्टर में भी किया) वे उसे देखते थे तो उसी के जैसा बनने के बारे में सोचते. जोगी ने बताया था कि उनके अंदर जो निडरता है, किसी भी मुश्किल परिस्थिति का धैर्य के साथ सामना करने की जो शक्ति है, हर ठोकर के बाद फिर से उठ खड़े होने का जो जज्बा है वह उनके बचपन में मिली इस ट्रेनिंग का नतीजा है. जो लोग जोगी की राजनीति को जानते हैं वह इसे भलीभांति समझ सकते हैं. वह चुनाव में पराजित होते रहे, पर हार कभी नहीं मानी.

चीटिंग कराने के चक्कर में बन गया बेस्ट फ्रेंड

जोगी ने एक और दिलचस्प याद साझी की थी. उनके गांव के जमींदार के बेटे का नाम भी अजीत था. वे उनसे उम्र में कुछ बड़े थे. जोगी ने बताया था कि शायद उनके माता-पिता ने उनका नाम जमींदार के बेटे के नाम पर ही अजीत रखा था. वे बचपन से पढाई में तेज थे. कभी घर आकर पढऩे की जरूरत नहीं पड़ी. जमींदार के बेटे फेल होकर उनकी क्लास में आ गए. एक जैसा नाम होने के कारण वे जोगी के पीछे ही बैठते थे. जोगी पहली कॉपी बहुत जल्दी भरते थे. कॉपी भरने के बाद वे उसे साइड में ऐसे रखते थे पीछे बैठे अजीत उससे कॉपी कर सकें. वो नकल करने में भी ईमानदार था, जब उसे लगता था कि पासिंग मार्क्स के लायक लिख लिया है तो वह लिखना छोड़ देता था.घुड़सवारी करने वाला व्हील चेयर पर

अजीत जोगी एक अच्छे घुड़सवार रहे. आईएएस की ट्रेनिंग के दौरान वे बेस्ट राइडर थे. बचपन में उनके क्षेत्र में आवागमन की ज्यादा सुविधाएं नहीं थी. इसलिए कई लोगों ने घर में घोड़े पाल रखे थे. कभी किसी का घोड़ा छूट जाता था तो वे उसे पकड़ लेते थे और उसकी सवारी करते थे. जोगी एक नेचुरल राइडर थे, घोड़े के बाल पकड़कर उसे काबू में लाते थे. आईएएस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें हॉर्स राइडिंग के नियमों के बारे में बताया गया इसके बाद उनकी घुड़सवारी में और निखार आ गया. रायपुर में कलेक्टर रहने के दौरान वे पुलिस लाइन से घोड़े मंगवाकर रोज सुबह राइडिंग करते हुए शहर का मुआयना करते थे. पर एक दुर्घटना ने घोड़े पर उड़ान भरने वाले इस नेता को व्हील चेयर पर ला दिया. उन्हें खड़ा करने के तमाम जतन होते रहे.

साल 2013 में उनके लिए 90 लाख रुपये के रोबोटिक पैर न्यूजीलैंड से लाए गए. इसके बाद उम्मीद थी कि जोगी चल पड़ेंगे, लेकिन यह महज एक प्रयोग ही साबित हुआ.

शिकार के शौकीन, मौके बहुत मिले पर नहीं मार पाए शेर

जोगी के पिता एक शिकारी थे. क्षेत्र में जब कभी कोई शेर आदमखोर हो जाता था तो कलेक्टर की तरफ से उनके पिता को उसका शिकार करने का आदेश दिया जाता था. वे अक्सर अपने पिता या बड़े भाई के साथ शिकार करने जाते थे. उनके यहां परंपरा थी कि शेर का शिकार बड़ा सदस्य ही करेगा. ऐसे में मौका मिलने के बाद भी पिता और बड़े भाई के साथ रहने के चलते वे कभी शेर का शिकार नहीं कर पाए.

पढ़ने के थे शौकीन

जोगी का फुर्सत के वक्त में केवल एक ही शौक था और वह था पढ़ाई. उन्होंने सागौन बंगले में इसके लिए अपना एक अलग कक्ष भी बनाया हुआ था. इस कक्ष में हिंदी और अंग्रेजी साहित्य की ढेरों किताबें मौजूद हैं. उनके कमरे का इंटीरियर बेहद शानदार बनाया.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
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First published: May 29, 2020, 8:22 PM IST
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