‘चौतरफा विकास’ के बीच मानव विकास के सूचकांक में नीचे खिसकता भारत

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स दुनिया में लैंगिक आधार पर समानता और सम्मान के नजरिए से दुनिया के देशों की रैंकिंग प्रस्तुत करता है. हाल ही में जारी इस रिपोर्ट में भारत का दुनिया के 153 देशों में 112वां स्थान है. प्रदूषण के मामले में हाल ही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में जानें जा रही है.

Source: News18Hindi Last updated on: December 29, 2020, 2:57 PM IST
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‘चौतरफा विकास’ के बीच मानव विकास के सूचकांक में नीचे खिसकता भारत
विकास के बीच मानव विकास के सूचकांक. (File pic)
यह एक पुरानी चर्चा है कि विकास का मतलब केवल सड़क और भवन बना देना भर है अथवा उसके केन्द्र में मानव विकास के पैमाने भी हैं. अब सरकार के ही एक ताजा सर्वे ने इस दिशा में एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पांचवे दौर के नतीजों में देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य और पोषण के चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं. इनमें वह राज्य भी हैं जिन्हें हम देश के सबसे ज्यादा उन्नतिशील राज्यों के रूप में जानते हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी मानव विकास रिपोर्ट 2020 के अनुसार, मानव विकास सूचकांकों में भारत 129वें स्थान से गिरकर 131वें स्थान पर पहुंच गया है.

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स दुनिया में लैंगिक आधार पर समानता और सम्मान के नजरिए से दुनिया के देशों की रैंकिंग प्रस्तुत करता है. हाल ही में जारी इस रिपोर्ट में भारत का दुनिया के 153 देशों में 112वां स्थान है. प्रदूषण के मामले में हाल ही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में जानें जा रही है.

यदि मनुष्य और पर्यावरण की कीमत पर यह विकास बढ़ा चला जा रहा है, तो हमें सोचने की जरूरत है कि हमने किस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं.


राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पांचवे दौर के नतीजे आने शुरू हो गए हैं. इस रिपोर्ट में देश के 22 राज्यों के नतीजे सामने आए हैं. शेष राज्यों की रिपोर्ट अगले कुछ महीनों में सामने आएंगी. इस रिपोर्ट में सबसे गंभीर मसला होता है बच्चों में कुपोषण का. यही सबसे विश्वसनीय और राष्ट्रीय रिपोर्ट है जिसके आधार पर हम देश में कुपोषण की स्थिति के बारे में जान पाते हैं. महिला एवं बाल विकास भी बच्चों के विकास और निगरानी से संबंधित आंकड़ों को आंगनवाड़ी स्तर तक संग्रहित करता है, लेकिन उससे पूरे देश की स्थिति का एकसाथ अंदाजा नहीं हो पाता है.
कुपोषण को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में एक राष्ट्रीय शर्म का विषय बता चुके हैं. इससे पहले तीसरे दौर की रिपोर्ट 2015-16 में सामने आई थी, चार साल के अंतर से यह दूसरी रिपोर्ट है. इस बीच नीति आयोग ने तीन साल यानी 2017 से लेकर 2020 तक के लिए देश का एक एक्शन प्लान भी जारी किया था. 2020 में इस एक्शन प्लान में तय किए गए लक्ष्यों को हासिल किया जाना था, इस नजरिए से भी यह सर्वेक्षण बेहतर समय पर आया है.


इन चार सालों को देखा जाए तो पोषण के मामले में हम कुछ खास नहीं कर पाए हैं. नीति आयोग के एक्शन प्लान में यह तय किया गया था कि हम हर साल कुपोषण दर में तीन प्वाइंट की कमी करेंगे. लेकिन इसके विपरीत कई राज्यों में स्थिति यथावत है और कई में तो पहले से ज्यादा ख़राब हो गयी है. 22 में से केवल एक राज्य नागालैंड है जिसने अपने यहां हर साल कम वजन के बच्चों में 2.6 प्रतिशत की कमी की है, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां कि 1.1 की की दर से कुपोषण कम हुआ है, इसके अलावा बाकी सारे राज्य शून्य प्रतिशत से कम की दर पर अटके हुए हैं. नीति आयोग की मंशानुसार तीन प्वाइंट की कमी तो किसी भी राज्य ने नहीं की है.

उल्टे कुपोषण की गंभीर स्थिति भी चार राज्यों से बढ़कर 14 राज्यों में हो गई है. विकास की रफतार में आगे चलने वाले गुजरात में ही पहले 22 में से 13 राज्य ऐसे हैं जहां कि गंभीर कुपोषण घटने की जगह बढ़ गया है.
इन सर्वेक्षण के लिए आंकड़ों को संग्रहित करने का काम कोरोनाकाल के पहले किया गया था. हमने देखा है कि किस तरह से कोविड 19 के शुरुआती महीनों में सोशल सेक्टर की योजनाओं का क्या हाल हुआ है. योजनाओं को कुछ समय रोककर कोविड19 के संघर्ष में शामिल होना पड़ा. खासकर बच्चों के पोषण से संबंधित योजनाओं का तो यह हाल है कि वह अब तक भी पहले की तरह नियमित रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं, ऐसे में इन आंकड़ों में निश्चित रूप से और भी बढ़ोत्तरी होगी. कोविड19 का असर मानव विकास के इन पहलुओं पर भी निश्चित रूप से दिखाई देगा, ऐसे में यह जरूरी हो जाएगा कि हमारे नीति-नियंता विकास के बारे में सोचें, यह भी सोचें कि कैसे हम इन सूचकांकों को कोविड के असर से नीचे गिरने से बचाएं. (डिसक्‍लेमर- यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
राकेश कुमार मालवीय

राकेश कुमार मालवीयवरिष्ठ पत्रकार

20 साल से सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव, शोध, लेखन और संपादन. कई फैलोशिप पर कार्य किया है. खेती-किसानी, बच्चों, विकास, पर्यावरण और ग्रामीण समाज के विषयों में खास रुचि.

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First published: December 29, 2020, 2:55 PM IST
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