कोरोना संकट को हराने के लिए मोदी ने दिया आत्मनिर्भरता का महामंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबोधन में फिर पूरी सार्थकता के साथ सिद्ध किया कि वे परिस्थितियों के अनुसार बहुत संवेदनशील विचार को पूरी संप्रेषणीयता के साथ आम लोगों तक पहुंचाने की कला में माहिर हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: May 12, 2020, 11:25 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
कोरोना संकट को हराने के लिए मोदी ने दिया आत्मनिर्भरता का महामंत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात की.
कोरोना काल में देश के नाम पांचवें संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा संकट और भविष्य की चुनौतियों से आमना-सामना करने के लिए ठोस धरातल पर मजबूत कदम रख दिया है. बहुआयामी सोच का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा तो की ही, साथ ही ‘नए रूप-रंग’ में चौथे लॉकडाउन के कमरे की झलक भी देश के लोगों को दिखा दी. ‘मॉस्क की अनिवार्यता और दो गज की सोशल डिस्टेंसिंग’ के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों को प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन-तीन की मियाद पूरी होने से पहले यानी 18 मई से पहले तक कल्पनाओं की उड़ान में नए नियमों के कयास लगाने के लिए व्यस्त भी कर दिया है.

सहजता से की आत्मनिर्भरता की अवधारणा की व्याख्या
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस पांचवें संबोधन में प्रधानमंत्री ने खास तौर पर आत्मनिर्भरता की भारतीय अवधारणा की व्याख्या फिर से बड़ी सहजता के साथ की. हालांकि इस संबोधन से एक दिन पहले ही मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ही मोदी ने ‘जय जगत’ की भारतीय अवधारणा को तीन शब्दों ‘जन से जग’ तक में समेट कर बहुत सार्थक अंदाज में व्यक्त कर दिया था. अनुभव के आधार पर ठोस व्यावहारिक धरातल पर सोचें, तो समझ में आता है कि संकट के जूझते हुए ही हमें निकटता से अस्तित्व बोध होता है. सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को इस बारे में सोचने का विचार ही नहीं आता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबोधन में फिर पूरी सार्थकता के साथ सिद्ध किया कि वे परिस्थितियों के अनुसार बहुत संवेदनशील विचार को पूरी संप्रेषणीयता के साथ आम लोगों तक पहुंचाने की कला में माहिर हैं.

बिन सोचे-समझे प्रतिक्रिया देना विपक्षी पार्टियों का शगल बना
उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा कर 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' को नई गति देने का भरोसा जताया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 13 मई से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन इस महा आर्थिक पैकेज के बारे में देश को विस्तार से जानकारी देंगी. आधे घंटे से कुछ ज्यादा तक के प्रधानमंत्री के संबोधन में आर्थिक पैकेज पर विस्तार से प्रकाश डाला भी नहीं जा सकता था. लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अपनी तत्काल प्रतिक्रिया में यह कहकर हल्केपन का ही संकेत दिया कि नरेंद्र मोदी ने पैकेज की संभावित नाकामी का ठीकरा वित्त मंत्री के सिर फोड़ दिया है. सरकार के हर निर्णय के उलट बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया देना इधर विपक्षी पार्टियों का प्रिय शगल बन गया है. उन्हें यह समझने में अब देर नहीं करनी चाहिए कि इस तरह की बयानबाजी एक तरफ संकट के समय उनके प्रति गुस्से का माहौल बनाती है, साथ ही विश्व नेतृत्व के समक्ष उन्हें हास्यास्पद भी साबित करती है. विपक्ष को एकदम नकारात्मक होने की बजाए संकट के समय सरकार को सकारात्मक सुझाव देने चाहिए, यही उचित कर्तव्य है.

मेक इन इंडिया को ठोस धरातल पर उतारने का भी आह्वान
कोरोना संकट काल में विश्व से सापेक्ष भारत की अभी तक की उपलब्धि का जिक्र भी प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से किया. साथ ही 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान करते हुए यह भी स्पष्ट किया किया कि यह सभी संबंधित वर्गों की बेहतरी के लिए है. उन्होंने मेक इन इंडिया के विचार को ठोस धरातल पर उतारने का भी आह्वान किया. दीवाली उत्सव के लिए देश में बने मिट्टी के दियों की बजाए चीन की बिजली की झालरें और दूसरे सामान खरीदने का उदाहरण देते हुए उन्होंने यह संदेश भी दिया कि अगर हर भारतीय ठान ले, तो भारत देश का पूरी दुनिया में सर्वोच्च सम्मान दोबारा हासिल करने में जरूर कामयाब हो सकता है. मेक इन इंडिया को अपना कर अगर हम देश में ही उचित गुणवत्ता का सामान बनाएंगे, तो फिर हम विदेशी सामान का मोह छोड़ पाएंगे. प्रधानमंत्री ने गुजरात के कच्छ में आए भूकंप की तबाही के बाद वहां हुए पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हम ठान लें, तो कुछ भी संभव है. आपदाएं असल में और ज्यादा भव्य, टिकाऊ नवनिर्माण का रास्ता खोलती हैं.मिली भविष्य के भारत की स्पष्ट झलक
प्रधानमंत्री के संबोधन में भविष्य के भारत की स्पष्ट झलक मिली. उन्होंने किसानों, श्रमिकों और दूसरे सभी वर्गों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर खास जोर देते हुए आर्थिक पैकेज में ‘लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ’ पर बल दिया. ‘वोकल’ होकर ‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने एक तरह से नींव को बेहद मजबूत बनाने की जरूरत बताई. विकास के पौधे की जड़ें मजबूत होंगी, तभी वे समृद्धि के विशाल वृक्ष का भार उठा सकती हैं. मजबूत नींव पर ही विशाल और स्थाई तौर पर टिकाऊ निर्माण संभव है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज देश के कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, लघु-मंझोले उद्योग यानी MSME के लिए है. कुटीर, छोटे, मंझोले और लघु उद्योग की करोड़ों भारतीयों की आजीविका का साधन हैं. यही उद्योग आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का मजबूत आधार भी हैं.

देशवासियों के भ्रम को दूर करता रहा है पीएम का हर संबोधन
निश्चित ही कोरोना के महा-संकट से सामना करने में प्रधानमंत्री का अभी तक का हर संबोधन देश वासियों का भ्रम दूर करता आया है. लेकिन विपक्षी नेता निराधार तर्कों के आधार पर अपनी राजनीति चमकाने में भी लगे हैं. यह सही है कि पैदल, साइकिल या दूसरी निजी सवारियों पर अपने गांवों की ओर पलायन को मजबूर लाखों श्रमिकों को इस दौरान बहुत मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं, लेकिन इसके लिए हर तरह से केंद्र या किसी एक राज्य की सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया जाना भी गलत है. कोरोना संकट से निपटने की रणनीति को लेकर जब पूरा विश्व भारत की तारीफ कर रहा हो, तब सिर्फ राजनीति के लिए उल्टी-सीधी बयानबाजी उचित नहीं है. जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्तव्य का प्रश्न है, देश के नाम पांचवें संबोधन ने फिर से सिद्ध किया है कि हवा-हवाई कटघरे बना कर उन्हें उनमें खड़ा नहीं किया जा सकता.
facebook Twitter whatsapp
First published: May 12, 2020, 11:25 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading