OPINION: पश्चिम बंगाल में क्या ‘खेला’ बनाएगा दीदी का खेल या फिर ‘विकास’ शुरू होगा?

असल में खेला होबे एक गीत है, जो तृणमूल कांग्रेस के युवा नेता देबांग्शु भट्टाचार्य ने जनवरी में लिखा था. देबांग्शु पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और टीएमसी के लिए जमकर चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं. खेला होबे गीत में ममता बनर्जी सरकार की कुछ योजनाओं का भी ज़िक्र है, साथ ही बीजेपी नेताओं को बाहरी बताया गया है.

Source: News18Hindi Last updated on: March 20, 2021, 9:43 PM IST
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OPINION: पश्चिम बंगाल में क्या ‘खेला’ बनाएगा दीदी का खेल या फिर ‘विकास’ शुरू होगा?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की गहमा-गहमी चरम पर है. ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर दहाड़ रही हैं, तो बीजेपी ने भी पूरी ताक़त चुनाव में झोंक रखी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मेदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा समेत पार्टी के तमाम दिग्गज नेता पश्चिम बंगाल में ही नज़र आ रहे हैं. बहुत से केंद्रीय मंत्री भी पश्चिम बंगाल में ही लगातार डेरा डाले हुए हैं.

बीजेपी दावा कर रही है कि इस बार वहां पूर्ण बहुमत से उसकी सरकार बनेगी और विकास का सिलसिला शुरू होगा. बीजेपी की रैलियों में जिस तरह भीड़ उमड़ रही है, उससे तो लगता है कि उसे अच्छी कामयाबी विधानसभा चुनाव में मिलेगी. वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 42 में से 18 सीटों पर विजय हासिल की, तभी से पार्टी को वहां अपार संभावनाएं दिखने लगीं और तभी से पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ चुनावी माहौल गरमाए रखा. अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद तो जय श्रीराम का नारा बीजेपी समर्थकों की ज़ुबान पर चढ़ गया. ममता बनर्जी ने इस नारे के प्रति खीझ दिखाई, बयान दिए, तो बीजेपी ने यह नारा और जोश के साथ लगाना शुरू कर दिया. बीजेपी की हर चुनाव सभा में जय श्रीराम के नारे की गूंज सुनाई पड़ रही है.

शब्द बाणों से हो रहे चुनावी युद्ध में एक और नारा ख़ूब चर्चा में है. यह नारा है- खेला होबे. इसका इस्तेमाल ममता बनर्जी ने किया, तो बीजेपी की तरफ़ से इसका जवाब विकास होबे के नारे के साथ दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता के खेला होबे पर चुटकी लेते हुए एक रैली में कहा कि खेला खतम, विकास शुरू. भारतीय जनता पार्टी यह तर्क भी दे रही है कि चुनाव की तुलना खेलों से नहीं की जानी चाहिए. कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ने अपने 10 साल के शासन काल में सिर्फ़ घोटालों और भ्रष्टाचार का खेल ही खेला है, विकास के कामों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया है. मज़े की बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस के खेला होबे पर भी समर्थक ख़ूब तालिया बजा रहे हैं और बीजेपी के स्टार प्रचारक जब इस मारे का मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले विकास होबे, दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले शिक्षा होबे, दीदी बोले खेला होबे, बीजेपी बोले अस्पताल होबे, तो उनके समर्थक भी जोश का जमकर इज़हार कर रहे हैं.

असल में खेला होबे एक गीत है, जो तृणमूल कांग्रेस के युवा नेता देबांग्शु भट्टाचार्य ने जनवरी में लिखा था. देबांग्शु पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और टीएमसी के लिए जमकर चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं. खेला होबे गीत में ममता बनर्जी सरकार की कुछ योजनाओं का भी ज़िक्र है, साथ ही बीजेपी नेताओं को बाहरी बताया गया है. खेला होबे जब टीएमसी समर्थकों की ज़ुबान पर चढ़ा, तो माना जा रहा था कि ममता दीदी देबांग्शु को हाबड़ा से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, उन्हें तृणमूल कांग्रेस का टिकट नहीं मिला, तो उनके विरोधी अब ऐसी चुटकियां ले रहे हैं कि देबांग्शु के साथ ही खेल हो गया या उनका खेल ख़राब हो गया. देबांग्शु को टिकट भले ही नहीं मिला हो, लेकिन उनके गीत में कुछ फेरबदल के साथ उसके कई डीजे वर्ज़न भी बन गए हैं, जो राज्य में हो रही शादियों और दूसरे समारोहों में भी ख़ूब बजाए जा रहे हैं. इंटरनेट पर भी इन गीतों को लाखों व्यू मिल रहे हैं.
वैसे भाषण युद्ध में नए-नए प्रतीकों का इस्तेमाल भी हो रहा है और इस स्तर पर हो रहा है कि तमाम सामान्य मर्यादाएं भी लांघी जा रही हैं. ममता बनर्जी ने एक चुनाव सभा में कहा कि हम मोदी का चेहरा नहीं देखना चाहते. राज्य को दुर्योधन, दुशासन, मीर ज़ाफ़र, लूट और दंगे नहीं चाहिए. सीएए और एनआरसी को लेकर भी रस्साकशी चल रही है. ममता ज़ोर देकर कह रही हैं कि पश्चिम बंगाल में वे एनआरसी को कभी लागू नहीं होने देंगी, तो बीजेपी कह रही है कि अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों को हर हाल में बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. प्रधानमंत्री और बीजेपी के दूसरे स्टार प्रचारक ये भी कह रहे हैं कि ममता सरकार ने पश्चिंग बंगाल के ग़रीबों का कल्याण करने वाले केंद्र की योजनाएं लागू नहीं की हैं.

बीजेपी दे रही इस बात पर जोर
बीजेपी इस बात पर ज़ोर दे रही है कि अगर वहां डबल इंजन की सरकार बनेगी, तो विकास रफ़्तार पकड़ेगा, ग़रीबों का भला होगा. केंद्र की योजनाएं लागू की जाएंगी. खड़गपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ममता सरकार ने राज्य में उद्योग नहीं लगाए, बल्कि वहां एक ही उद्योग चलता है और वह है माफ़िया उद्योग. मोदी ने कहा कि दीदी ने बंगाल को बीते दस साल में लूट-मार दी, कुशासन दिया. उन्होंने कहा कि बंगाल में मजदूर-गरीबों को भी कट मनी देना पड़ता है. दीदी ने बंगाल के लोगों के साथ विश्वासघात किया है. बीजेपी ममता बनर्जी की छवि उद्योग विरोधी नेता के तौर पर उभार रही है.ममता भले ही नंदीग्राम से इस तर्क के साथ चुनाव लड़ रही हैं कि 2007 में उन्होंने वहां किसानों की ज़मीन अधिग्रहण किए जाने के ख़िलाफ़ बड़ा मोर्चा खोला था और चुनाव में उन्हें इसका फ़ायदा मिलेगा. लेकिन ममता विरोधियों की दलील है कि उस समय अगर नंदीग्राम में हज़ारों एकड़ में पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल हब विकसित हो जाता, तो क्षेत्र के लोगों को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलता. ग़रीबों की हालत में सुधार आता. उस समय पश्चिम बंगाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री थे और वे उद्योग विरोधी होने की लेफ़्ट की छवि सुधारना चाहते थे.

2005 में जब केंद्र सरकार ने देश भर में केमिकल हब बनाने की योजना पर विचार किया, तो बुद्धदेव ने पश्चिम बंगाल में इसके लिए पहल की और तय किया गया कि हल्दिया बंदरगाह के पास नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित कर पेट्रोलियम हब बनाया जाए. तत्कालीन राज्य सरकार ने इसके लिए इंडोनेशिया के बड़े उद्योग समूह सलीम ग्रुप के साथ निवेश की बात भी पक्की कर ली. लेकिन योजना परवान चढ़ती, इससे पहले ही 2007 में बुद्धदेव के सियासी विरोधियों ने ज़मीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में भ्रम पैदा किया और इसके ख़िलाफ़ हिंसक आंदोलन शुरू हो गया. आख़िरकार सरकार को फ़ैसला वापस लेना पड़ा.

क़रीब-क़रीब उसी समय टाटा मोटर्स पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा नैनो कार प्लांट को लेकर विरोध शुरू हुआ. टाटा मोटर्स क़रीब एक हज़ार एक ज़मीन पर प्लांट लगाने वाली थी, जिसकी अनुमति तत्कालीन लेफ़्ट सरकार ने दे दी थी. लेकिन उसके ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हो गया और ममता बनर्जी ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई. आख़िरकार 2008 में टाटा मोटर्स ने सिंगूर की बजाए गुजरात में प्लांट लगाने का फ़ैसला कर लिया. इसका श्रेय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है. उन्होंने टाटा मोटर्स से अपने राज्य में प्लांट लगाने का न्यौता दिया, जिसे रतन टाटा ने हाथों हाथ लिया. अगर सिंगूर में नैनो कार प्लांट लग जाता, तो क्षेत्र के लोगों के लिए रोज़गार की व्यापक संभावनाएं बन सकती थीं. ममता विरोधी अब ये बातें छेड़कर तृणमूल कांग्रेस को विकास विरोधी करार दे रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में आठ चरण में वोटिंग होनी है. नतीजे 2 मई को आएंगे. तभी पता चलेगा कि दीदी की उद्योग विरोधी छवि बनाने की बीजेपी की कोशिश कितनी कामयाब होगी या फिर राज्य के लोगों का भरोसा ममता बनर्जी पर ही बना रहेगा. खेला किसके पक्ष में होगा, इसका पता भी तभी चलेगा. लेकिन इतना तय है कि इस बार बीजेपी का पलड़ा पहले के मुक़ाबले काफ़ी भारी होने वाला है और ममता दीदी का पलड़ा हल्का ज़रूर होगा. (ये लेखक के निजी विचार हैं)
ब्लॉगर के बारे में
रवि पाराशर

रवि पाराशरवरिष्ठ पत्रकार

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हैं. नवभारत टाइम्स, ज़ी न्यूज़, आजतक और सहारा टीवी नेटवर्क में विभिन्न पदों पर 30 साल से ज़्यादा का अनुभव रखते हैं. कई विश्वविद्यालयों में विज़िटिंग फ़ैकल्टी रहे हैं. विभिन्न विषयों पर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल हो चुके हैं. ग़ज़लों का संकलन ‘एक पत्ता हम भी लेंगे’ प्रकाशित हो चुका है।

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First published: March 20, 2021, 9:43 PM IST
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