उदयपुर के दरिंदों ने मानवता को शर्मसार किया, ऐसी सजा मिले कि दुनिया मिसाल दे

देश में शान्ति के साथ जीवन बिताने वाले लोगों को यदि डरा-धमकाकर इस तरह मौत के घाट उतार दिया जाएगा तो सुरक्षा के तो मापदण्ड ही बदल जाएंगे. व्यक्ति घर में ही असुरक्षित हो जाएगा तो कहां पनाह मिलेगी.

Source: News18Hindi Last updated on: July 2, 2022, 7:04 pm IST
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उदयपुर के दरिंदों ने मानवता को शर्मसार किया, ऐसी सजा मिले कि दुनिया मिसाल दे
उदयपुर हत्याकांड से पूरा देश स्तब्ध है.

जिस देश में समवेत स्वर में यही गाया जाता है, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान, जहां सर्वधर्म सभाएं की जाती हैं, जहां धर्म निरपेक्षता का ही भाव है, जहां किसी देवता या पैगम्बर के बारे में गलत बोलने से पहले ही वाणी पर विराम लग जाता है, उस देश की धरती पर, साम्प्रदायिकता की आग में जलते हुए दरिन्दों द्वारा किसी निर्दोष का सरेआम कत्ल कर देना मानवता को शर्मसार करना है. देश में प्रजातन्त्र है. व्यक्ति का अपना अस्तित्व है. सभ्य समाज में बर्बरतापूर्ण किसी मासूम की हत्या करने वाले ये युवक झकझोर देने वाली घटना को अंजाम देकर भी कुटिलता से सरेआम वीडियो बनाकर और सबके सामने प्रस्तुत कर दुनिया के सामने लाए हैं वह वर्तमान और भविष्य के लिए काफी भयावह है.


देश में शान्ति के साथ जीवन बिताने वाले लोगों को यदि डरा-धमकाकर इस तरह मौत के घाट उतार दिया जाएगा तो सुरक्षा के तो मापदण्ड ही बदल जाएंगे. व्यक्ति घर में ही असुरक्षित हो जाएगा तो कहां पनाह मिलेगी, अपने ही भारत में जिन्दगी के लिए तड़पना और दोषी ना होते हुए भी इतनी दुखद मौत से सामना करना किसी सजा से कम नहीं. राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के दर्जी की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी गई कि उन्होंने नुपूर शर्मा के पक्ष में कुछ पोस्ट कर दिया जबकि ये उनके बेटे से अन्जाने में हो गया उसके लिए उनके अन्त की तड़पती हुई वीडियो डालकर जालिमों ने हर भारतवासी के दिल में दर्द भर दिया. ये दर्द आक्रोश बनकर आज सवाल करता है कि क्या हिन्दुस्तान में आज मनमानी का राज कायम हो गया है.


हत्या की इतनी भयावह तस्वीरें रोंगटे खड़ी कर देने वाली हैं. नसों में सिहरन पैदा करने वाली हैं जिन तस्वीरों को सामान्य दिल वाले देख भी नहीं पा रहे उस घटना को अंजाम देकर आतंकी युवकों ने अपने दुस्साहस का परिचय दिया है. एक सामान्य व्यक्ति को डराना, धमकाना और और बेरहमी से कत्ल कर देना और अपने अन्जाम की भी चिन्ता ना करना भारत के लोगों को असुरक्षा के कटघरे में खड़ा करना है. किसी बात के लिए आम व्यक्ति का कत्ल कर देना मामूली बात नहीं, आसान काम नहीं.


सहन करना हमारी किस्मत नहीं होनी चाहिए. मांगना हमारा नसीब ना बन जाए, हत्यारों को सजा हो, सभी फांसी की मांग कर रहे हैं. स्वयं भी तो उठ खडे़ होइए. आतंकियों को अंजाम तक पहुंचाने की मुहिम छेड़नी होगी. कब तक यूं कत्ल होते रहेंगे. अपराधी अपराध करने के बाद भी खुले घूमते हैं. अदालतों में मुकदमे साल दर साल लम्बित हो जाते हैं. मुजरिम छूटते रहते हैं. जब तक उन्हें अपराध के अनुसार दण्ड नहीं मिलेगा समाज इसी तरह दुखी होता रहेगा. उनका दण्ड इतना भयावह हो कि आने वाली नस्लें भी अपराध करने से डरें. पर ये हिन्दुस्तान की जमीन है जो सबको माफ करने में विश्वास रखती है. तभी तो हिन्दुस्तानी ठगे जाते है और बलि चढ़ते रहते हैं. अपने ही देश में गैरों से जिन्दगी की भीख मांगते हैं.


आज कन्हैयालाल का परिवार दुखी है, सारा देश कह रहा है हम तुम्हारे साथ है पर कितने दिन? रात बीती बात खत्म फिर तो खुद से ही खुद का सामना होता है. एक-एक पल मरना मिटना होता है. लोग हादसों को भूल जाते हैं और चैनलों पर राजनीति शुरु हो जाती हैं. एक के बाद एक होने वाली हत्याएं आतंकियों की उठती हुई आवाजें हैं, मानवता के सर्वनाश के लिए आगे बढ़ते हुए कदम हैं, क्रूर कार्य करके भी नहीं हिचके, वीडियो बनाकर डाल दिया औरों को भी सन्देश दे दिया कि यही अन्जाम होगा. और हमारे नेता हैं कि चैनलों पर दोषारोपण करते नजर आ रहे हैं. ऐसा घिनौना अपराध सामने आने पर भी क्या सजा होगी, इस पर चर्चा कम है, एक दूसरे को नीचा दिखाने के वाद-विवाद हो रहे हैं.


क्रूर व्यक्तियों के कुकर्मों से सारा समुदाय प्रभावित ना हो इस हेतु शान्ति से विचार कर क्रूरता से निबटा जाए, अपराध के अनुसार दण्ड का विधान हो, ऐसा घिनौना अपराध समाज के सामने आया है कि माफी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. हिन्दुस्तान का हर नागरिक गवाह है फिर सजा में देरी क्यों? नापाक इरादों वालों का अंजाम हद से बुरा होना चाहिए, जो समाज में दहशत पैदा करते हैं और निर्दोष लोगों की जान बेरहमी से लेते हैं.


संस्कार और सभ्यता हर सम्प्रदाय में होती है, समाज में साम्प्रदायिकता के कारण आवेग में आकर लोग सड़कों पर ना उतरें, बल्कि संयमित लोग चाहे वे किसी भी सम्प्रदाय के हों, अपराधियों को कठोर से कठोर दण्ड दिलवाने में सहयोग करें. देश सबके साथ चलने से आगे बढ़ता है, यूं कत्लेआम करके किस दिशा को प्राप्त होंगे. जानवर भी अपने खाने के लिए दूसरे को मारता है किन्तु मनुष्य तो जानवर से भी बदतर हो गया. ईश्वर के नाम पर ईश्वर के बन्दो का ही कत्लेआम, कितनी छोटी सोच है.


हमारा देश शान्तिप्रिय देश है. ऐसे देश में इस तरह की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. जिन्दगी को खिलौना समझ मौत के मुंह में धकेल देना, झटके में परिवार से सारी खुशियां छीन लेना, ऐसे लोग मानवता के नाम पर कलंक हैं. यह घटना स्तब्ध करने के साथ ही भयावह भी है. भारत जहां हम एक चींटी को भी बचाने का प्रयत्न करते हैं, दूसरों की जान की खातिर लोग अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं, उस भारत की जमीन पर इतना दर्दनाक और दुःखद हादसा लोगों की आंखों के सामने हो गया और कोई कुछ भी नहीं कर पाया. हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया, उफ कितना जहर भरा है लोगों के अन्तर में जो जीने की स्वतन्त्रता छीन कर मौत से साक्षात्कार करा रहे हैं.


यह देश का सीना छलनी करने वालों से टक्कर लेने का समय है, आपस में लड़ने का नहीं. विनम्रता का सिला बहुत मिल गया अब दण्ड का सिलसिला बढ़ना चाहिए. भारत ने सहनशीलता और माफ करने से बहुत समझौता कर लिया. अब दोषियों को, गुनहगारों को बख्शने का अन्दाज बदलना होगा. देश के निरपराध लोगों को अपना शिकार बनाने वाले, देश की नींव को खोखला करने वाले तथा समाज में भय का माहौल बनाने वालों से सख्ती से निबटा जाए. हिन्दुस्तान की शान्त जमीन पर कट्टरपंथियों ने दरिन्दगी की जो कहानी लिखी है, उससे सबक लेने कि जरूरत है. जिस घटना से परिवार शोक में है, देश स्तब्ध है और सारी दुनिया देख रही है उनके गुनाह के लिए सबसे सख्त सजा होनी चाहिए.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
रेखा गर्ग

रेखा गर्गलेखक

समसामयिक विषयों पर लेखन. शिक्षा, साहित्य और सामाजिक मामलों में खास दिलचस्पी. कविता-कहानियां भी लिखती हैं.

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    First published: July 2, 2022, 7:04 pm IST
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