आजादी का अमृत महोत्सव: तिरंगा हमारी पहचान, घर-घर लहराए तिरंगा

हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के आह्वान पर हर व्यक्ति को ये आजादी मिली है कि वो भी झंडा लहरा सकता है. आजादी मात्र शब्द नहीं वरन् बलिदान और शहीदों की देशभक्ति की अनमोल गाथा है और तिरंगा इसका साक्षात् प्रमाण. हर घर तिरंगा अभियान का हिस्सा बनकर हम भारतवासी स्वयं को कृतज्ञ समझेंगे और तिरंगे के समक्ष नतमस्तक हो गौरवान्वित महसूस करेंगे.

Source: News18Hindi Last updated on: August 14, 2022, 11:31 am IST
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आजादी का अमृत महोत्सव: तिरंगा हमारी पहचान, घर-घर लहराए तिरंगा

हिंदुस्‍तान को उसकी पहचान दिलाने के लिए, हर नागरिक को खोया हुआ सम्मान लौटाने के लिए, जिंदगी को खुशहाली के साथ जीने के लिए अपनी स्वतंत्रता बहुत जरुरी थी. इस स्वतंत्रता को पाने के लिए देश ने बहुत कुछ खोया है. कंटक भरा रास्ता था, जिसमें कुर्बानियों की गाथा है. जख्मों की व्यथा है. जुल्मों की कहानी है. सिसकियां हैं. रुदन है. असंख्‍य अत्याचारों को सहन करने और उत्पीड़न की पराकाष्ठा को झेलते हुए अपनी आजादी का सपना संजोए उसे हासिल करने के लिए एक के बाद एक छोटी-छोटी उम्र के क्रांतिवीरों ओर देशभक्तों ने देश के लिए अपना लहू बहाया और निष्ठुर-बेदर्द अंग्रेजों के जुल्मों को सहते हुए आजादी को प्राप्त किया.


ये आजादी हमें बहुत बड़ी कीमत चुकाने के बाद मिली है. छटपटाहट थी अंतर में, भुजाओं में जोश और दिमाग में रात दिन यही सोच कि कैसे अपने देश को निरंकुश सत्ता से मुक्त करा सकें. आजादी की खुली हवा में सांस लें. हमारा अस्तित्व हो और अपना तिरंगा लहरा सकें. इस हेतु निरंतर जुल्मों को बर्दाश्त किया. अपने शरीर पर कोड़ों की मार सही. दीवारों में चुनवा दिए गए. जंजीरों में जकड़े गए. शहीद हुए पर हमें आजादी दिलाई. खुद जिंदगी नहीं जी पाए किन्तु हमें जीवन दे गए. आजादी की सुबह नहीं देख पाए लेकिन हमें आजाद कर गए. जिनका अपना परिचय गुमनामियों में खो गया वो हमें हमारे वजूद से मिला गए. उफ! कितना कष्ट झेला, हमें स्वतंत्र करवाने की खातिर. खुद खामोश हो गए, दुनिया में अमर हो गए.


उन पर हुए जुल्मों की कहानी कहता हुआ ये तिरंगा उनके लहू की कीमत को हम सब के सामने प्रत्यक्ष कर देता है. जो आजादी इतनी मूल्यवान है. आज वही छटपटाती दिखती है. सभी विपरीत दिशा में चल रहे हैं. देश की प्रगति की बातें तो बहुत होती हैं पर विरोध की लपटे भी प्रज्जवलित हो जाती हैं.तिरंगा तो सबका है अपनी आन, बान, शान से जब ये लहराता है तो सभी के मन को प्रफुल्लित करता है.


हमें आजादी मिले हुए 75 वर्ष हो रहे हैं. पूरा वर्ष हमने आजादी का अमृत महोत्सव अनेक कार्यक्रम सम्पन्न कर मनाया है. आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पूर्ण गरिमा के साथ मनाने के लिए 75 सप्ताह पूर्व से ही अनेक कार्यक्रम शुरु हुए. हर राज्य, हर केन्द्रशासित प्रदेशों व दूतावासों में कार्यक्रम सम्पन्न किए गए. देशभक्ति का भाव हर नागरिक के मन में होना चाहिए. सामान्य सा त्योहार भी हम कितनी श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं फिर राष्ट्रीय त्योहार तो हमारे सम्मान और खुशहाली दोनों का प्रतीक है. इनका तो अहसास भी प्रसन्न करने वाला है.


आजादी का अमृत महोत्सव हर घर में मनाया जाए. हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत तिरंगा हर घर में लहराया जाए. सभी को उत्साहित हो तिरंगा लहराने का अवसर मिले. हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने देशवासियों से कहा है कि आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर में तिरंगा लहराया जाए। जिस आजादी को इतने जतन से प्राप्त किया है, लोगों ने अपने जीवन की आहुति दी, उस आजादी की खुशी का उत्सव हम अपने घर में ही नहीं, हर घर में प्रत्यक्ष देखें. अपनी आजादी के इस त्योहार में स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे को अपने घर की छत पर लहराता देखें. महसूस करें उन वीरों का सामीप्य. निहारें उन शहीदों का प्रतिबिंब जिन्होन हमें ये सब करने का अवसर प्रदान किया. परिचित हों अपने अंदर की देशभक्ति से जो स्वार्थ के वशीभूत हो कहीं अंतर में सुप्तावस्था में है. तिरंगा हमारा सम्मान है. हमारा स्वाभिमान है.


हमने आज तक विद्यालयों में, सरकारी भवनों पर अपना तिरंगा लहराते देखा है. इस आजादी की वर्षगांठ पर हर घर, प्रतिष्ठान, भवन, विद्यालय, टोल प्लाजा सब जगह तिरंगा लहराया जाए. हमारा प्यारा तिरंगा जब शान से तीन रंगों को समेटे अपनी छटां बिखेरेगा तो कितना भव्य दृश्य होगा. हर घर पर लहराता तिरंगा वीरों की कहानी कहता नजर आएगा. देश भक्ति के भाव को अंतस में जगाएगा. जिस आजादी की कीमत भूल रहे हैं उस अपनी आजादी को हर व्यक्ति अपने दिल में, अपने घर-आंगन में प्रत्यक्ष महसूस कर सकता हैं. हरियाली, शांति और लहू के रंग को महसूस कर सकता हैं.


15 अगस्त हमारा वो सम्माननीय दिन है जिसने हमारी पहचान से हमें अवगत कराया है. हर घर तिरंगा लहराने से देश के हर नागरिक की सोच में सिर्फ और सिर्फ देशभक्ति होगी. दीपावली के दीपों की पंक्ति की भांति हर घर तिरंगे की शोभा से दीप्त होगा तो भव्यता तो साक्षात पृथ्वी पर दिखाई ही देगी. आदिकाल से आज तक ध्वज की मान्यता से सभी परिचित हैं. शुभ व मंगल कार्यों में भी ध्वज लहराया जाता है. महाभारत काल में कौरव व पांडव की सेनाओं के रथ पर ध्वज के उल्लेख मिलते हैं. अर्जुन के रथ पर भी पताका लहराती दिखती है. हनुमान जी के भजनों में भी ‘लहर-लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का’ आदि वर्णन है. कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि ध्वज हमारे गौरव, सांस्कृतिक एकता व धार्मिक सभ्यता का प्रतीक हैं.


हमारा राष्ट्रध्वज तो हमारी परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत की विश्वव्यापी पहचान है. हमारा गर्व है. अभिमान है. अपने ध्वज पर हर भारतवासी को नाज है. हर घर तिरंगे का लहराना ऐतिहासिक होगा. हमारे तिरंगे के लिए हम अपने भावों को जज्‍बातों में पिरोकर समवेत स्वर में गाते हैं. विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा. शान ना इसकी जाने पाये चाहे जान भले ही जाए.


तिरंगा हर व्यक्ति को जान से भी प्यारा है. ये हमारी हिम्मत है. हम कहीं भी रहें ये हमारी पहचान है. हर घर में तिरंगे के लहराने से हम उन वीर शहीदों के प्रति नतमस्तक रहेंगें जो कहीं शून्य में विलीन हो गए है. हम उन्हें अपने घर में महसूस कर सकेंगें और यही उन शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. अपने देश के गौरव और राष्ट्रभक्ति के लिए तिरंगे का हर घर में लहराने का भाव हमारे मृतप्राय शरीर के लिए संजीवनी होगा.


हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के आह्वान पर हर व्यक्ति को ये आजादी मिली है कि वो भी झंडा लहरा सकता है. आजादी मात्र शब्द नहीं वरन् रुदन, क्रन्दन, बलिदान और शहीदों की देशभक्ति की अनमोल गाथा है और तिरंगा इसका साक्षात् प्रमाण. हर घर तिरंगा अभियान का हिस्सा बनकर हम भारतवासी स्वयं को कृतज्ञ समझेंगे और तिरंगे के समक्ष नतमस्तक हो गौरवान्वित महसूस करेंगे.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
रेखा गर्ग

रेखा गर्गलेखक

समसामयिक विषयों पर लेखन. शिक्षा, साहित्य और सामाजिक मामलों में खास दिलचस्पी. कविता-कहानियां भी लिखती हैं.

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First published: August 14, 2022, 11:31 am IST