क्यों अलग है राजस्थान का सियासी संकट, क्या गहलोत इस बार भी दिखाएंगे जादू ?

सियासी हालातों को देखते हुए राजस्थान सरकार को अस्थिर होने से ये जादूगर कब तक बचा पाता है ये तो वक्त ही बताएगा. अगर अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) इन हालतों में अपनी सरकार पांच साल तक चला पाने में सफल होते हैं तो ये भी उनके जादू की बाजीगरी ही होगी.

Source: News18Hindi Last updated on: July 22, 2020, 1:57 AM IST
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क्यों अलग है राजस्थान का सियासी संकट, क्या गहलोत इस बार भी दिखाएंगे जादू ?
सीएम अशोक गहलोत क्या इस बार भी दिखाएंगे जादू!
मरुधरा का सियासी ड्रामा चालू है, देश में मोदी लहर (Modi wave) के बीच जिन कुछ राज्यों में बीजेपी (BJP) को सत्ताच्युत करके कांग्रेस (Congress) ने अपना परचम फिर से लहराया उनमें से एक राजस्थान भी है. कर्नाटक (Karnataka), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) जैसे राज्यों में चुनाव जीतने और सरकार बनाने के बाद कांग्रेस अपनी सरकार को बचाने में नाकामयाब रही. हालांकि कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी. लेकिन राजस्थान के हालात इन राज्यों से अलग हैं इनकी तुलना मध्य प्रदेश के हालातों से करना जल्दबाजी है.

दिखने में बेहद अच्छा था फैसला
अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) जैसे अनुभवी नेता ने चुनी हुई सरकार को गिराने के मंसूबों को शायद पहले से ही परख लिया था इसलिए उनकी किलेबंदी मजबूत रही. सचिन पायलट (Sachin Pilot) की महत्वकांक्षा को उनके खेमे के लोगों ने बढ़ाने का खूब काम किया. शायद इसीलिए वो अशोक गहलोत को पदस्थ कर खुद को सीएम पद पर देखने का ख़्वाब संजो बैठे. हालांकि उनकी ये महत्वाकांक्षा नई नहीं है. जब विधानसभा चुनाव जीत कर राजस्थान राज्य में कांग्रेस सरकार आई थी तो वो मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार नजर आ रहे थे. कांग्रेस आलाकमान के अशोक गहलोत को राजस्थान का सीएम पद दिए जाने को लेकर उनकी नाराजगी जगजाहिर थी. ऐसे में कांग्रेस ने बीच का रास्ता अख्तियार करते हुए सचिन पायलट को डिप्टी सीएम (Deputy CM Rajasthan) के पद पर बिठाया. जो कि शायद कांग्रेस की तुष्टिकरण की पुरानी नीति के अनुरूप ही था. लेकिन ये फैसला दिखने में बेहद अच्छा था एक तरफ अनुभवी अशोक गहलोत तो वहीं जोश से लबरेज युवा सचिन पायलट ये दोनों मिलकर राज्य के हित में काफी कुछ कर सकते थे लेकिन सचिन पायलट की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और कहीं न कहीं उनकी अनुभवहीनता व पद प्राप्त करने की जल्दबाजी ने शायद इसका जायका बिगाड़ दिया.

अशोक गहलोत की टीस नजर आती है !
अगर हम इस सियासी ड्रामे के बीच देखें तो जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. कांग्रेस के दिग्गजों, राजस्थान सरकार के मंत्रियों समेत सियासी हैसियत रखने वाले बहुतेरे लोगों ने बहुत कुछ कहा-सुना. बीजेपी खुद को इस मामले से कितना ही अलग-थलग बताए लेकिन बीजेपी नेताओं की बयानबाजी व जुमलेबाजी कुछ और ही इशारा कर रही है. राजस्थान में प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के चलते इस पूरे सियासी ड्रामे में भाजपा (BJP) की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता. लेकिन इस दौरान अगर ध्यान दिया जाए तो सचिन पायलट व उनके खेमे के नेताओं को लेकर सबसे नपे-तुले बयान अशोक गहलोत के ही नजर आते हैं. एक तरफ तो वो सारे सियासी घटनाक्रम का ठीकरा राज्य भाजपा इकाई से लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर फोड़ते नजर आ रहे हैं जब वो कहते हैं कि 'लोकतंत्र खतरे में है' तो वहीं घर के बड़े बुजुर्ग की तरह सचिन पायलट के कान खींचते भी नजर आ रहे हैं. एक तरफ वो कहते हैं कि इन (युवा नेताओं) की रगड़ाई ठीक से नहीं हुई है, तो वहीं ये भी समझाते हैं कि भविष्य आपका ही है. उनके बयान में कहीं न कहीं टीस भी नजर आती है जब वो कहते हैं कि जब मैं एमपी बना था तो सचिन पायलट महज 3 साल के थे जब वापस आयेंगे तो गले से लगा लूंगा. अंदरखाने में जो भी खिचड़ी पक रही हो या अशोक गहलोत के जो भी निजी विचार हों लेकिन उनके बयानों में कहीं भी सचिन पायलट से प्रतिद्वंदिता नजर नहीं आती.

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क्या जादूगर इस बार भी दिखा पाएगा बाजीगरी?
सियासी हालातों को देखते हुए राजस्थान सरकार को अस्थिर होने से ये जादूगर कब तक बचा पाता है ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तो तय है कि कभी पेशे से जादूगर पिता के साथ स्टेज पर जादू दिखाने वाले और कांग्रेस में शामिल होने के बाद राहुल गांधी को उनके बचपन के दिनों में खेल-खेल में जादू दिखाने वाला ये बिखरे बालों वाला सियासी जादूगर तमाम आरोपों के बीच अपनी ही पार्टी की युवा पीढ़ी संभालने की भरसक कोशिश करता नजर आ ही जा रहा है. अगर अशोक गहलोत इन हालतों में अपनी सरकार पांच साल तक चला पाने में सफल होते हैं तो ये भी उनके जादू की बाजीगरी ही होगी.
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First published: July 21, 2020, 7:33 PM IST
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