संजय उवाच: टी20 वर्ल्ड कप में कोहली की अग्निपरीक्षा, रोहित-पंड्या की फॉर्म ने भी बढ़ाई चिंता

T-20 World Cup 2021: ओलंपिक और यूरो फुटबॉल के बाद टी-20 वर्ल्ड कप कोविड काल का सबसे बड़ा खेल आयोजन है, क्योंकि एक साथ 16 देश खिताब के लिए कशमकश करते दिखाई देंगे. अब यह भी विडंबना है की मेजबान भारत है, लेकिन मेजबानी यूएई और ओमान में कर रहे हैं, इससे पहले ऐसा भी कभी नहीं हुआ.

Source: News18Hindi Last updated on: October 16, 2021, 6:45 AM IST
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संजय उवाच: टी20 वर्ल्ड कप में कोहली की अग्निपरीक्षा, रोहित-पंड्या की फॉर्म ने भी बढ़ाई चिंता
टी20 वर्ल्ड कप का आगाज 17 अक्टूबर से होगा. (AFP)

T20 World Cup 2021: क्रिकेट वापस शबाब पर है. टी20 वर्ल्ड कप का होना इस बात का परिचायक है कि दुनिया उस परेशानी से उबरने लगी है, जिसने पिछले दो वर्षों मे न सिर्फ इस खेल को, बल्कि समूची मानवता को झकझोर कर रख दिया था. पिछले साल, इसी वजह से इसे आस्ट्रेलिया में नहीं कराया जा सका था. लगभग एक साल बाद आखिरकार बदले हुए मेजबान और आयोजन स्थल में अब यह शुरू हो रहा है. दो टी-20 वर्ल्ड कप के बीच इस बार 5 साल का फासला है, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ.


ओलंपिक और यूरो फुटबॉल के बाद टी-20 वर्ल्ड कप कोविड काल का सबसे बड़ा खेल आयोजन है, क्योंकि एक साथ 16 देश खिताब के लिए कशमकश करते दिखाई देंगे. अब यह भी विडंबना है की मेजबान भारत है, लेकिन मेजबानी यूएई और ओमान में कर रहे हैं, इससे पहले ऐसा भी कभी नहीं हुआ. इस फोर्मेट के सातवें वर्ल्ड कप में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर है. भारत को फाइनल में पहुंचे सात साल हो गये हैं. यही नहीं, 14 साल बाद भारत के पास चैंपियन बनने का इस बार शानदार मौका होगा.


भारत और इंग्लैंड सबसे मजबूत

हाल फिलहाल, टी-20 में प्रदर्शन को देखें तो भारत और इंग्लैंड को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. दोनों को सबसे संतुलित टीम के रूप में देखा जा रहा है. भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन भले ही आईपीएल में मिला जुला रहा हो, लेकिन इनकी क्षमता पर कभी भी सवालिया निशान नही लग सकता. भारतीय खेमे के लिए विराट का जज्बा तो खास है ही, मेंटर महेन्द्र सिंह धोनी की मौजूदगी भी खास है. विराट के नसीब मे आईपीएल में लगातार कप्तानी के बावजूद कभी खिताब नहीं आया, लेकिन टी-20 का खिताब उनके आलोचकों को परेशानी मे डाल देगा.


वैसे भी विराट कोहली का कप्तान के तौर पर टी-20 इंटरनेशनल में यह आखिरी मौका होगा और वह इसे किसी भी कीमत पर चूकना नहीं चाहेंगे. लीग मे भले ही कोहली को खिताब न मिला हो, लेकिन वर्ल्ड कप खिताब की बात ही अलग होगी. उधर एमएस धोनी ने अपनी टीम चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल के खिताबी मुकाबले तक पहुंचाया है. धोनी की सोच का लाभ टीम इंडिया को मिल सकता है, वैसे भी उन्हे क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट का सबसे बड़ा दिमाग माना जाता है. धोनी वही खिलाड़ी हैं जिनकी कप्तानी में भारत ने 14 साल पहले 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप का आखिरी और इकलौता खिताब जीता था.


वैसे भारत के लिए इस विश्व कप मे कुछ चिंताएं भी हैं. रोहित शर्मा उम्मीद के मुताबिक फॉर्म में नहीं हैं. आईपीएल में पिछले साल उन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर मुंबई इंडियंस को चैंपियन बनाया था, लेकिन इस बार टीम न तो प्‍लेऑफ में पहुंची और न ही उनका बल्ला चला. खुद रोहित पूरे आईपीएल में केवल एक अर्धशतक लगा सके हैं. भारत के लिए रोहित का चल न पाना परेशानी का सबब है, इसमे कोई शक नहीं.


हार्दिक पंड्या का मामला भी थोड़ा परेशान कर सकता है . अगर गेंदबाजी के बगैर वह टीम में शामिल हैं तो फिर किसी दूसरे को मौका दिया जाना चाहिए. इंजरी के बाद से हार्दिक की गेंदबाजी लगातार सवालिया निशान पर है और उनकी फिटनेस के तमाम दावों के बावजूद अब तक उनकी गेंदबाजी सामान्य नहीं दिखाई दी है. इस कमी को दूर करने के लिए अक्षर पटेल की जगह शार्दुल ठाकुर को शामिल किया है. लोकेश राहुल फॉर्म में हैं तो यह तय है कि रोहित के साथ पारी शुरू करेंगे और इसका लाभ भारत को मिलना चाहिये.


भारत को थोड़ा बेहतर पोजिशन में ईशान किशन भी रख सकते हैं, मौका मिलने पर यह युवा बल्लेबाज बॉलरों की धज्जियां उड़ा सकता है. खराब दौर से उबरने के बाद उनका फॉर्म पिछले हफ्ते देखने को मिल चुका है. हालाकि ईशान किशन के साथ निरन्तरता एक मुद्दा जरूर है.


पाकिस्तान के मैच पर फोकस

वर्ल्ड कप हो या द्विपक्षीय मुकाबला, भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा हॉट होता है. इस बार दोनों के अभियान की शुरुआत एक-दूसरे से मुकाबले के साथ होगी. भारत के नाम यह भी जबरदस्त रिकॉर्ड है कि आज तक वह कभी भी किसी भी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से नहीं हारा है. यही नहीं, 2007 मे भारत ने पहला वर्ल्ड कप भी पाकिस्तान को हराकर ही जीता था. इस बीच पाकिस्तानी टीम में काफी उठा पटक का दौर चला है.


बाबर आजम की टीम के लिए भारत से शुरुआत किसी ‘आग का दरिया’ को पार करने से कम नहीं है. 24 अक्टूबर को जब दोनों देश दुबई में आमने-सामने होंगे तब सही मायने में समूची दुनिया मे क्रिकेट का रोमांच अपने शबाब पर होगा. भारत को अपने ग्रुप में अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के अलावा क्वालीफाई करने वाली दो अन्य टीमों से भी भिड़ना होगा. नई जर्सी में इस बार क्या भारत की किस्मत भी बदल सकती है.


इयोन मोर्गन पर निगाहें

हाल फिलहाल के समय मे ओएन मॉर्गन का प्रदर्शन बहुत उतार चढ़ाव से भरा रहा है. आईपीएल में एक तरफ मोर्गन का बल्ला नहीं चला, पर दूसरी ओर अपने नेतृत्व के सहारे इन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को फाइनल तक पहुंचाया. इंग्लैंड के लिए मोर्गन की मौजूदगी हमेशा से ही खास रही है. दो साल पहले ही उन्होंने देश को 50 ओवर का वर्ल्ड कप भी दिलाया. मानने वाले मोर्गन को माइक ब्रियरली जैसे दिमाग का कप्तान समझते हैं. इसी वजह से मॉर्गन इस बार इंग्लैंड के लिए खास माने जा रहे हैं.


मोइन अली, जोस बटलर, डेविड मलान जैसे नाम के शामिल होते इंग्लैंड एक संतुलित टीम नजर आ रही है. इंग्लैंड की टीम के पास 11 साल पहले के उस इतिहास को दोहराने का मौका है जब 2010 में पॉल कोलिंगवुड ने टीम को चैंपियन बनाया था.


और भी हैं दावेदार





आस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज को भी इस बार के वर्ल्ड कप खिताब का दावेदार माना जाना चाहिये. वेस्टइंडीज वैसे भी सबसे ज्यादा दो बार चैंपियन रहा है और अपने खिताब की रक्षा के लिए उनके पास कई हरफनमौला खिलाड़ी मौजूद हैं. क्रिस गेल कब चल पड़ेंगे, कोई नहीं जानता. इसके अलावा निकोलस पूरन, खुद कप्तान कीरोन पोलार्ड और आंद्रे रसेल का होना टीम को मजबूत बनाता है. न्यूजीलैंड फिलहाल एक ऐसी टीम है जिसने हर फॉर्मेट में अपने को बेहतर साबित किया है.


इस बार यूएई में उनको दावेदारों में से नकारा नहीं जा सकता. तमाम कप्तानों में केन विलियमसन ही एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनको बल्ले और कप्तानी में संतुलन बैठाने का माहिर समझा जाता है. आस्ट्रेलिया उन बड़ी टीमों में एक है जिसे अब तक खिताब हासिल नहीं हुआ है. हालांकि जब भी यह टीम उतरती है, उसे दावेदार समझा जाता है. आरोन फिंच के लिए यह अपने अतीत को भुलाने का बेहतर अवसर होगा. आईपीएल को आधार माना जाए तो ग्लैन मैक्सवेल फॉर्म में हैं, जिसका लाभ कंगारू उठा सकते हैं.


बाकी देशों में अफगानिस्तान और बांग्लादेश छुपे रूस्तम की तरह हैं. अफगानिस्तान को वैसे दावेदार नहीं माना जाता, पर उनके खिलाड़ियों में लड़ने की अपार क्षमता है. दूसरी ओर बांग्लादेश के लिए पहले तो क्वालीफायर राउंड पार करने की जरूरत है, जो मुश्किल नहीं दिखता. इसने हाल फिलहाल, जिम्बाब्वे, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से सीरीज जीती है जो आत्मविश्वास बढाने के लिए काफी है.


नामीबिया और पापुआ न्यू गिनी का डेब्यू

सातवें टी-20 वर्ल्ड कप में नामीबिया और पापुआ न्यू गिनी पहली बार खेलेंगे.  नामीबिया भी पहली बार इस फोर्मेट के वर्ल्ड कप में खेलेगा. इन दोनों देशों को राउंड एक के अलग-अलग ग्रुप में रखा गया है. नामीबिया के लिए जहां श्रीलंका, आयरलैंड और नीदरलैंड चुनौती होंगे वही पापुआ न्यू गिनी को बांग्लादेश, स्कॉटलैंड और ओमान से दो-चार करना होगा. इन दोनों ग्रुपों से दो-दो टीमों को क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा.


वैसे पिछले वर्ल्ड कप में खेल चुके सह मेजबान ओमान ने पिछले तीन-चार महीने में काफी तैयारी की है. पहले से ही सुपर 12 में आठ देश मौजूद रहेंगे जो दो ग्रुपों में बंटे हैं. इसके बाद सेमीफाइनल और फिर 14 नवम्बर को खिताबी मुकाबला होगा. इस बार के विश्व कप में पहली बार डीआरएस लागू होगा. यानि आईपीएल के बाद क्रिकेट और क्रिकेटर्स एक बार फिर सुर्खियों मे होंगे.


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
संजय बैनर्जी

संजय बैनर्जीब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट व कॉमेंटेटर

ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट व कॉमेंटेटर. 40 साल से इंटरनेशनल मैचों की कॉमेंट्री कर रहे हैं.

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First published: October 16, 2021, 6:30 AM IST
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