OPINION: झारखंड के मजदूरों की घर वापसी कराना हेमंत सरकार के लिए बड़ी चुनौती

लॉकडाउन (Lockdown) के बीच प्रवासी मजदूरों की वापसी के लिए 25 हजार बस या 125 स्पेशल ट्रेनों की जरूरत होगी. इस प्रक्रिया में सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी.

Source: News18 Jharkhand Last updated on: April 30, 2020, 1:58 PM IST
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OPINION: झारखंड के मजदूरों की घर वापसी कराना हेमंत सरकार के लिए बड़ी चुनौती
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (File Photo)
रांची. केंद्र के फैसले के बाद प्रवासी मजदूरों (Migrant Labourer) और छात्रों को वापस झारखंड लाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार (CM Hemant Soren) ने एक विशेष टीम बनाई है. इसमें राज्य के 15 अधिकारियों को शामिल किया गया है. झारखंड सरकार का मानना है कि लगभग 5 लाख से ज्यादा मजदूर देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए हैं. इसके साथ ही हजारों की संख्या में छात्र भी फंसे हैं. इन सबको वापस लाना राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मानें तो झारखंड के पास संसाधन सीमित हैं. राज्य के पास अपनी कोई बस नहीं है. जाहिर है कि फंसे हुए मजदूरों और छात्रों को लाना राज्य सरकार के बस की बात नहीं है.

राज्य के बाहर से मजदूरों को लाने में लगेंगे छह महीने

अगर राज्य सरकार ने अपनी तरफ से कोशिश की और निजी बसों की सहायता भी ली, तो इसमें राज्य सरकार को बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़ेगी. इसके लिए झारखंड सरकार बिल्कुल तैयार नहीं है. सरकार को राज्य के बाहर फंसे सभी मजदूरों को वापस लाने में कम से कम 6 महीने का वक्त लग सकता है. इसके साथ ही सरकार के लिए यह भी एक चुनौती है कि उन लोगों को जो बाहर फंसे हैं, उन्हें लाने के बाद उनकी स्क्रीनिंग कराना, अगर किसी में कोरोना का लक्षण पाया जाता है, तो उसके लिए रहने के लिए क्वारंटाइन सेंटर, वहां खाने-पीने की व्यवस्था ऐसी तमाम चीजों पर प्लानिंग की जा रही है.

देश के इन राज्यों में फंसे इतने लोग
राज्य से बाहर फंसे छात्रों और मजदूरों की वापसी आसान नहीं होगी. इन्हें वापस बुलाने के लिए
25 हजार बस या 125 स्पेशल ट्रेनों की जरूरत होगी. जाहिर है कि घर वापसी की प्रक्रिया में सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन भी बड़ी चुनौती होगी. आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र 1.07 लाख, गुजरात 72 हजार, आंध्रप्रदेश 65 हजार, तेलंगाना 41.50 हजार, दिल्ली 37 हजार, मध्य प्रदेश 30 हजार, तमिलनाडु 27 हजार, कर्नाटक 20 हजार, हरियाणा 19 हजार, उत्तर प्रदेश 19 हजार, प. बंगाल 8 हजार, ओडिशा 3.50 हजार, पंजाब 3 हजार, राजस्थान 2.5 हजार, हिमाचल 2 हजार और बिहार में 1.5 हजार लोग फंसे हुए हैं, जो झारखंड के हैं.

राज्य सरकार ने केंद्र से मदद की गुहार लगाईराज्य सरकार ने इसलिए बुधवार की देर शाम केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बातचीत की और इनसे मदद की गुहार लगाई. साथ ही झारखंड की तैयारी के बारे में भी इनको अवगत कराया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि बिना केंद्र की मदद के झारखंड अपने मजदूरों को वापस नहीं ला सकता है।

15 अधिकारियों की बनाई टीम

वहीं दूसरी तरफ राज्य से बाहर दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों के बारे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि बहुत सारे अभिभावकों ने अपने बच्चों को वापस लाने के लिए पास की मांग की है. इस बारे में राज्य सरकार विचार कर रही है. इस बारे में जल्द से जल्द निर्णय लिया जाएगा. इस बाबत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 29 अप्रैल की देर रात एक आपात बैठक बुलाई. इसमें श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव समेत अन्य वरिष्ठ मंत्री भी ते. बैठक में सरकार ने 15 अधिकारियों की एक टीम बनाई है. यह टीम सरकार को रिपोर्ट देगी कि आखिर किस तरीके से अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूर और छात्रों को वापस लाया जा सकता है. मजदूरों को वापस बुलाने के लिए 25 हजार बस या 125 स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम करना होगा. जाहिर है कि घर वापसी की प्रक्रिया में सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन भी बड़ी चुनौती होगी.

झारखंड सरकार ने जिन अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों के लिए नियुक्त किया है, उनके नाम है:-

1. अमरेंद्र प्रताप सिंह- महाराष्ट्र

2. अविनाश कुमार- तमिलनाडु और मध्य प्रदेश

3. हिमानी पांडे- राजस्थान, दादर नगर हवेली, दमन दीव और मेघालय

4. अजय कुमार सिंह- कर्नाटक, असम और गोवा

5. आराधना पटनायक- उत्तर प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड.

6. राहुल शर्मा- तेलंगाना.

7. कमल किशोर सोन- गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा.

8. विनय कुमार चौबे- दिल्ली.

9. राहुल पुरवार- ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड.

10. पूजा सिंघल- पंजाब.

11. अमिताभ कौशल- पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और लद्दाख.

12. आबूबाकर सिद्धकी- केरल.

13. प्रदीप कुमार टोप्पो- चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर और बिहार.

14. प्रशांत कुमार- हरियाणा.

15. के रविकुमार- मणिपुर, मिजोरम, पांडुचेरी, छत्तीसगढ़, अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप.

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First published: April 30, 2020, 1:04 PM IST
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