OPINION: एक बेहतरीन नेता, जीवट स्वभाव और शालीनता की मिसाल थे अजीत जोगी

अजित जोगी (Ajit Jogi) को छत्तीसगढ़ की राजधानी नया रायपुर का शिल्पकार भी कहा जा सकता है, जिन्होंने इसकी संकल्पना की थी. भले उसमें बाद की रमन सरकार ने बदलाव किया था, लेकिन जोगी को इसका श्रेय जाता है. निश्चित तौर से सहज स्वभाव और कुशल रणनीतिकार अजित जोगी हमेशा याद किए जाएंगे.

Source: News18Hindi Last updated on: May 29, 2020, 9:06 PM IST
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OPINION: एक बेहतरीन नेता, जीवट स्वभाव और शालीनता की मिसाल थे अजीत जोगी
एक बेहतरीन नेता, जीवट स्वभाव और शालीनता की मिसाल थे अजीत जोगी (फाइल फोटो)
अजित जोगी (Ajit Jogi) का निधन हो गया. राजनेताओें की जिजीविषा किस तरह की होती है, इसकी मिसाल थे जोगी. नौकरशाह से राजनेता का सफ़र तय करने वाले जोगी की कहानी बेहद दिलचस्प है. कांग्रेस में प्रवक्ता के तौर पर अमिट पहचान बनी और जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ तो अजित जोगी ही सबसे बेहतर विकल्प के तौर पर उभरे थे और वो पहले से स्थापित दिग्गजों पर भारी पड़े. कांग्रेस में उन्हें सोनिया गांधी का पूरा भरोसा हासिल था.

लेकिन उनकी निजी और राजनैतिक जीवटता अनुकरणीय है. दुर्घटना के बाद जब उनकी रीढ़ की हड्डी ख़राब हो गई और खड़े होकर चलने की स्थिति में नहीं रहे, तब मशीन के सहारे भी उन्होंने जीवन की लड़ाई लड़ी. 2003 में जब वो चुनाव हार गए तो फिर 15 साल तक कांग्रेस सत्ता में नहीं आई. लेकिन वो हमेशा लड़ते जूझते रहे. कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान की वजह से उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली थी. अलग पार्टी के तौर पर भी उन्होंने छत्तीसगढ़ की सियासत में अपना वजूद बनाए रखा.

जब मैं इंडिया टुडे में था तो स्टोरीज़ के लिए कई बार छत्तीसगढ़ गया और हर बार उनसे मिलना अमूमन हो ही जाता था. वजह थी कि वो अपना फ़ोन खुद उठाते थे, कई बार लैंडलाइन वाला फ़ोन भी खुद उठा लेते थे. एक बार का वाकया दिल में सम्मान पैदा करने वाला था. शायद 2013 की बात है, मैं उनसे बातचीत कर रहा था, उसी दौरान कमरे में उनके पुत्र अमित जोगी वहां से निकले. तभी अजित जोगी ने आवाज़ देकर कहा- अमित इधर आओ, तुमने नमस्ते क्यों नहीं किया? उन्होंने मेरा परिचय अमित को दिया और अमित जोगी ने भी पिता का पूरा सम्मान रखा. दिल्ली में भी जब उनसे मुलाक़ात होती थी या बातचीत होती थी तो आत्मीयता उनके स्वभाव में दिखती थी.

इस दौरान मैंने उनका इंटरव्यू किया तो उन्होंने बड़ी बेबाक़ी के साथ कहा था कि अब राज्य कांग्रेस में युवा और नया नेतृत्व आना चाहिए. हालांकि 2016 में वो कांग्रेस से अलग हो गए थे. 2018 के चुनाव में वो किंगमेकर तो नहीं बन सके लेकिन छत्तीसगढ़ की सियासत में आख़िर तक अहम बने रहे.
जोगी को छत्तीसगढ़ की राजधानी नया रायपुर का शिल्पकार भी कहा जा सकता है, जिन्होंने इसकी संकल्पना की थी. भले उसमें बाद की रमन सरकार ने बदलाव किया था, लेकिन जोगी को इसका श्रेय जाता है. निश्चित तौर से सहज स्वभाव और कुशल रणनीतिकार अजित जोगी हमेशा याद किए जाएंगे.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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ब्लॉगर के बारे में
संतोष कुमार

संतोष कुमार वरिष्ठ पत्रकार

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। रामनाथ गोयनका, प्रेस काउंसिल समेत आधा दर्जन से ज़्यादा पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है। भाजपा-संघ और सरकार को कवर करते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव पर भाजपा की जीत की इनसाइड स्टोरी पर आधारित पुस्तक "कैसे मोदीमय हुआ भारत" बेहद चर्चित रही है।

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First published: May 29, 2020, 5:19 PM IST
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