मानव संग्रहालय; घने शहर के बीचों बीच बसा एक दिलचस्‍प गांव

किसी संग्रहालय का नाम लो तो दिमाग़ में जो पहला चित्र उभरता है वो है ‘निर्जीव चीजों के संकलन की जगह.’ इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मानव संग्रहालय इनसे इतर है. जैसा कि नाम से ज़ाहिर है यह ‘मानव’ संग्रहालय है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 18, 2021, 1:37 PM IST
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मानव संग्रहालय; घने शहर के बीचों बीच बसा एक दिलचस्‍प गांव
(फोटो: Twitter/@igrms)
‘एक मंजि़ला लकड़ी का एक मकान, जिसमें एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की मंजि़ल है. इसकी विशेषता सिर्फ यह नहीं है कि ये पूरा मकान लकड़ी का बना हुआ है, खास बात ये है कि ये पूरा मकान फोल्डिंग भी है. इसे एक जगह से उठाकर दूसरी जगह, ले जाया जा सकता है, बिना कोई नुकसान पहुंचाए. वहां ले जाकर इसे ठीक उसी तरह फिट किया जा सकता है और इस्‍तेमाल भी, जैसे पहले किया जा रहा था. बिल्डिंग शिफ्टिंग वर्क की शुरूआत पश्चिम में बहुत बाद में शुरू हुई होगी, केरल का यह फोल्डिंग मकान इस शुरूआत से भी पहले का है. दिलचस्‍प बात ये है कि सिर्फ और सिर्फ लकड़ी का होने के बावजूद, इस घर में लोहे की एक कील भी नहीं लगी है.’

कमाल की इस बेहद जादुई कारीगरी से अगर आप रूबरू होना चाहते हैं तो आपको भोपाल आना पड़ेगा. यहां आकर आपको जाना पड़ेगा बड़े तालाब के किनारे पर स्थित इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मानव संग्रहालय में. बिना गांव, जंगल और पहाड़ों की खाक छाने, अगर आपको देश भर के ग्रामीण और आदिवासी परिवेश का लुत्‍फ उठाना चाहते हैं तो आपको कुछ नहीं करना है. बस इस म्‍य‍ुजि़यम की ओर अपने कदम बढ़ाएं और घने शहर के बीचों बीच, विविधता से परिपूर्ण एक गांव की सैर कर लें.

200 एकड़ में फैला है यह अनूठा संग्रहालय
ताल तलैयों और शैल शिखरों की नगरी भोपाल की सबसे खूबसूरत पहाड़ी श्‍यामला हिल पर 200 एकड़ के लहराते और बलखाते पहाड़ी इलाके में स्थित है यह संग्रहालय. 18 मई को विश्‍व संग्रहालय दिवस के मौके पर इसे याद किया जाना इसलिए भी बनता है, क्‍योंकि यह अपेक्षाकृत कम चर्चित है, जबकि संग्रहालयों की दुनिया में इस क्‍लासिक, अनूठे और अद्भुत म्‍युजि़यम को बहुत ऊपर की रैंकिंग में रखा जाना चाहिए.
किसी संग्रहालय का नाम लो तो दिमाग़ में जो पहला चित्र उभरता है वो है ‘निर्जीव चीजों के संकलन की जगह.’ इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मानव संग्रहालय इनसे इतर है. जैसा कि नाम से ज़ाहिर है यह ‘मानव’ संग्रहालय है. 200 एकड़ के वृहत क्षेत्र में फैले हुए इस म्‍युजि़यम में इंसान को सब्‍जेक्‍ट के रूप में डील किया गया है. यही इसकी अनूठी विशेषता है.

मानव जाति के विकास की रोमांचक कहानी
संग्रहालय मानव गाथा के विविध पक्षों की बात करता है. यह दुनिया का संभवत: इकलौता ऐसा म्‍युजि़यम है जहां प्राकृतिक प्रागैतिहासिक शैल आश्रय तो हैं ही, वहां रहने वाले लोगों द्वारा हजारों साल पहले बनाए गए शैल चित्र भी यहां मौजूद हैं. प्रागैतिहासिक मानव साक्ष्‍य की बस्‍ती के रूप में यहां 32 शैलाश्रय हैं. रॉक हार्ट हेरिटेज़ नामक प्रदर्शनी में इनका अवलोकन किया जा सकता है.यह संग्रहालय समय और स्‍थान में मानवजाति के विकास की कहानी रोचक अंदाज़ में हमारे सामने रखता है. दुनिया कैसे बनी, जीव कैसे बना, इंसान कैसे बना, संस्‍था कैसे बनी, हथियार कैसे बने, आग कहां से आई, घर कैसे बना, परिवार का कांसेप्‍ट कैसे डेवलप हुआ, चित्र कैसे हमारे जीवन में आए और कुल मिलाकर ये पूरा जादू जगाया कैसे गया.

शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी
आकार के नज़रिए से यह भारत के सबसे बड़े और प्रमुख मानव शास्‍त्रीय संग्रहालयों में से एक है. अपनी प्रदर्शनियों के सहारे ये समृद्ध भारतीय संस्‍कृति ओर विरासत का हमें साक्षात्‍कार कराता है. यहां आठ ओपन एयर एक्‍ज़ीबिशन और बारह इंडोर गैलरीज़ हैं. संग्रहालय सिर्फ ऐसा म्‍युजि़यम नहीं है जहां गए घूमे और वापिस आ गए. जब आप यहां से बाहर निकलते हैं तो अपने साथ अनेक शिक्षाप्रद और मनोरंजक जानकारियों को साथ लेकर बाहर आते हैं.

शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम, सेमीनार, संगोष्‍ठी, समूह चर्चा और कार्यशालाएं यहां की नियमित गतिविधियों में शामिल हैं. इसके अलावा संग्रहालय आउटरीच गतिविधियों के साथ साथ सांस्‍कृतिक और कलात्‍मक आयोजन में भी लगातार सक्रिय रहता है. यहां हर फील्‍ड के लोगों मसलन छात्रों, लेखकों, वृत्तचित्र-फिल्म निर्माताओं और शोधकर्ताओं को कुछ ना कुछ नया जरूर मिलता है.

कोविड के दौर में सोश‍ल मीडिया पर सक्रिय
संग्रहालय के बारे में निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र, का कहना है कि ‘म्‍युजि़यम हमारी संस्‍कृति का दर्पण होते हैं, ये हमारी सांस्‍कृतिक धरोहर से साक्षात्‍कार की सुटेबल जगह है. यह महज़ अजायबघर नहीं है बल्कि अनौपचारिक शिक्षा का केन्‍द्र भी है, जहां हम अपनी संस्‍कृति और धरोहर को जान और समझ तो पाते ही हैं, उसे देख भी पाते हैं. जनजातीय जीवन के बारे में हमने सुना और पढ़ा तो है ही उनकी संस्‍कृति से जीवंत साक्षात्‍कार भी यहां आकर होता है.’

कोविड के दौर में भी संग्रहालय अपने फेस बुक पेज, यू ट्यूब चैनल और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म पर सक्रिय है. सप्‍ताह में दो दिन राइट अप और एक्‍ज़ीबिशन के माध्‍यम से दर्शकों से लगातार संपर्क में है.

आदिवासी और ग्रामीण भारत की झलक
अगर आप आदिवासियों के जीवन में गहराई से झांकना चाहते हैं और इसके लिए उन्‍हें देखने उनके दुर्गम इलाकों की यात्रा से भी बचना चाहते हैं तो मानव संग्रहालय आपकी इस मनोकामना को सहज और आसानी से पूरा कर देगा. जनजातीय आवास ओपन एयर एक्‍ज़ीबिशन संग्रहालय में क्यूरेट की गई सबसे खास प्रदर्शनी है. यहां आप जान सकते हैं कि भारत के जनजातीय और लोक समुदायों का जीने का तरीका कैसा होता है. उनके घर कैसे होते हैं. उनका रहने ओर खाने पीने का सलीका कैसा है. यहां आदिवासी वास्‍तुकला के दर्शन होते हैं.

इसी तरह अगर आपको ग्रामीण भारत का नज़ारा करना है तो आपको यहां की सैर भर करना पड़ेगी. हिमालयन विलेज में हमें शिमला और हिमाचल के आवासीय परिसर देखने को मिलते हैं. उत्‍तराखंड के दिलचस्‍प मकान भी यहां ज्‍यों के त्‍यों देखने को मिल जाते हैं. लोहार की उत्‍पत्ति और तकनीक के बारे में जानने की आपको जिज्ञासा है तो यहां आपको यहां 12 फीट लंबा एक सजावटी गेट आपको मिल जाएगा, जो बस्‍तर के लोहारों द्वारा बनाया गया है.

तटीय गांव नामक प्रदर्शनी में हमें भारत के तटीय इलाकों की जीवन संस्‍कृति के दर्शन होते हैं. केरल के अररापुरा ओर नालकेट्टूके विशिष्‍ट लकड़ी के घर यहां देखने को मिलेंगे तो केरल की मशहूर बोट रेस में भाग लेने वाली नौका भी यहां मिल जाएगी. आंध्र प्रदेश के तटीय मैदानों में बने घरों को भी यहां देखा जा सकता है.

यहां आपको भोपाल गैलरी भी देखने को मिलेगी जो बताती है भोपाल महज़ एक शहर नहीं बल्कि एक सभ्‍यता का जीता जागता सबूत है. यह प्रदर्शनी भोपाल के हाशिए पर रहने वाले निवासियों की बात करती है. नर्मदा नदी के तट पर रहने वाली गौंड, बैगा और प्रधान जनजाति के बाशिंदे इसके उद्गम स्‍थल की कई लोककथाएं सुनाते हैं. इन कहानियों के आधार पर कला कृतियां बनाई गईं हैं.

21 मार्च 1977 को संग्रहालय ने दिल्‍ली में काम करना शुरू किया और बाद में इसे भोपाल शिफ्ट कर दिया गया. इसके निर्माण के समय यह एशिया में संभवत: अपनी तरह का पहला बड़ा संग्रहालय था. बाद में जापान के ओसाका में इससे बड़ा संग्रहालय बनाया गया.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
शकील खान

शकील खानफिल्म और कला समीक्षक

फिल्म और कला समीक्षक तथा स्वतंत्र पत्रकार हैं. लेखक और निर्देशक हैं. एक फीचर फिल्म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्युमेंट्री और टेलीफिल्म्स लिखी और निर्देशित की हैं.

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First published: May 18, 2021, 1:37 PM IST
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