आपकी दुनिया बदल सकती है एक कप कॉफी !

अंतर्राष्‍ट्रीय कॉफी डे 01 अक्‍टूबर 2015 को अंतर्राष्‍ट्रीय कॉफी संगठन की सहमति से मिलान में लॉन्च किया गया था. इस साल का कॉफी डे कॉफी किसानों की समस्‍याओं को समर्पित है.

Source: News18Hindi Last updated on: October 1, 2020, 11:47 AM IST
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आपकी दुनिया बदल सकती है एक कप कॉफी !
1 अक्टूबर को इंटरनेशनल कॉफी डे मनाया जाता है.
‘ए लॉट केन हेपन ओवर ए कप ऑफ कॉफी’. कॉफी को लेकर कहा गया ये सबसे चर्चित जुमला कॉफी की महत्ता दर्शाने के लिए काफी है. कोई इससे इत्‍तेफाक रखे या नहीं, लेकिन बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ़ की फिल्‍मी लाइफ में इसका सीधा दखल है. कॉफी के एक कप ने उनकी पूरी जिंदगी को बदल कर रख दिया. किस्‍सा कुछ यूं है, खूबसूरत कैटरीना ने 14 बरस की उम्र से ही मॉडलिंग शुरू कर दी थी. हांगकांग में जन्‍मी ब्रिटिश मूल की इस सुंदर बाला को अपने एक माडलिंग असाइनमेंट के चलते मुंबई आना पड़ा. एक दिन वो यूं ही ‘ताज लैंड एंड काफी शॉप’ में कॉफी पीने पहुंची.

वहां उनकी मुलाकात निर्माता-निर्देशक मुकेश भट्ट से हो गई. मुकेश भट्ट कैटरीना की खूबसूरती और पर्सनैलिटी से इतने प्रभावित हुए कि उन्‍होंने अपनी आगामी फिल्‍म ‘साया’ में लीड रोल के लिए कैटरीना को साइन कर लिया. फिल्‍म में जॉन इब्राहिम मुख्‍य भूमिका में थे. ये अलग बात है शूटिंग शुरू होने के दो दिन बाद ही उन्‍हें फिल्‍म से बाहर कर दिया गया. कारण उनसे हिंदी के दो शब्‍द भी नहीं बाला को अपने एक माडलिंग असाइनमेंट के चलते मुंबई आना पड़ा. एक दिन वो यूं ही ‘ताज लैंड एण्‍ड कॉफी शॉप’ में कॉफी पीने पहुंची. वहां उनकी मुलाकात निर्माता-निर्देशक मुकेश भट्ट से हो गई.

मुकेश भट्ट कैटरीना की खूबसूरती और पर्सनैलिटी से इतने प्रभावित हुए कि उन्‍होंने अपनी आगामी फिल्‍म ‘साया’ में लीड रोल के लिए कैटरीना को साइन कर लिया. फिल्‍म में जॉन इब्राहिम मुख्‍य भूमिका में थे. ये अलग बात है शूटिंग शुरू होने के दो दिन बाद ही उन्‍हें फिल्‍म से बाहर कर दिया गया. कारण उनसे हिंदी के दो शब्‍द भी नहीं कहा जाता है कि वर्कआउट जाने से पहले काफी पीने से बहुत फायदे होते हैं.


दरअसल, काफी के अंदर शामिल कैफीन ऊर्जा बढ़ाने का एक बहुत अच्‍छा स्‍त्रोत है. इससे हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह लगातार बना रहता है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ स्‍पोर्ट पोषण एंड एक्‍सरसाइज़ मेटाबॉलिज्‍म में प्रकाशित अध्‍ययन के अनुसार जो एथलीट ववर्कआउट से पहले काफी का सेवन करते हैं. वे रोजाना 15 फीसदी कैलोरी बर्न करते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं रोजाना अधिकतम 400 मिलीग्राम काफी का ही सेवन करना चाहिए, इससे ज्‍यादा नहीं.
कॉफी सेवन करने से त्‍वचा संबंधी फायदे भी गिनाए जाते हैं. कहा जाता है कि चेहरे की नमी, गालों पर पिंपल्‍स या फिर डार्क सर्कल्‍स से काफी छुटकारा दिलाती है. डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी ये फायदेमंद है. 4 कप काफी पीने से टाइप 2 डायबि‍टीज़ होने का खतरा कम होता है. कैंसर में खासतौर पर त्‍वचा कैंसर में काफी सेवन लाभदायक साबित हो सकता है. दिल से जुड़ी बीमारियों भी ये फायदेमंद है. रोज काफी पीने वाले को हार्ट अटैक का खतरा कम होता है. ज्‍यादा शराब पीने वालो के लिए हैंगोवर आम समस्‍या है.


ऐसे लोगों के लिए एक कप ब्‍लैक कॉफी रामबाण औषधि का काम करती है. सिरदर्द में तो लाभदायक है ही, माईग्रेन से परेशान लोगों के लिए भी यह उपयोगी दवा का काम करती है. कॉफी से स्‍वास्‍थ्‍य में होने वाले लाभ इतने हैं कि इस पर पूरा लेख अलग से लिखा जा सकता है, लेकिन सतर्क रहें स्‍वास्‍थ्‍य को दृष्टिगत रखते हुए अगर आप कॉफी का सेवन करना चाहते हैं तो ऐसा योग्‍य डाक्‍टर की सलाह लेकर ही करें. बहरहाल, गंभीर बातें तो बहुत हो गईं अब कुछ हल्‍की फुल्‍की और दिलचस्‍प बातें हो जाएं.

दुनिया की सबसे मंहगी काफी की बात करें तो वो है सिवेट जिसे Kopi Luvak भी कहते हैं. आपको यह जानकार शायद अच्‍छा नहीं लगे कि यह कॉफी बिल्‍ली के मल यानी पॉटी से बनती है. इंडो‍नेशिया से आने वाली इस कॉफी की वैश्विक बाज़ार में कीमत लगभग 28000 रुपये प्रति किलो तक है. Pam Civet Cat कॉफी की चैरी को खाती है. उसका गूदा तो ये पचा लेती है, लेकिन गूदे के अंदर का बीज उसके पेट में बिना पचा रह जाता है, जो उसके मल के सहारे बाहर निकलता है. बाद में इससे कॉफी बनती है. खुशी की बात ये है कि कर्नाटक के कुर्ग जिले में सिवेट काफी का उत्‍पादन शुरू हो गया है.
दुनिया के किस रेस्‍टरां में सबसे मंहगी काफी सर्व की जाती है? लेकिन ये सिवेट नहीं है. इस कॉफी का नाम ‘नेचुरल गीशा 803’ है. जिस कैफे में ये सर्व की जाती है उसमा नाम है – ‘क्‍लेच कॉफी कैफे’.कैफे की ब्रांच सैन फ्रांसिस्‍को और सदर्न कैलीफोर्निया में हैं. इस कॉफी की कीमत 75 डॅालर यानि लगभग 5500 रूपए है. कॉफी की दुनिया में ऑस्‍कर अवॉर्ड के रूप में जाने जाने वाले कॉफी कॉम्‍पिटिशन में यह कॉफी सर्वश्रेष्‍ठ मानी जाती है. वैसे इसका सही नाम पनामा है. नैचुरल गीशा 803 जैसा विचित्र नाम दरअसल एक नीलामी में पड़ा जहां यह एक पौंड यानि 450 ग्राम 803 डॉलर में बिकी.


क्‍या आप जानते हैं काफी की खोज बकरियों के झुण्‍ड और एक चरवाहे ने की थी. एक दंतकथा के अनुसार हुआ कुछ यूं था 600 के दशक में इथयिोपियो के एक व्‍यक्ति ने देखा कि उसकी बकरियां काफी चेरी (फल) खा रही हैं. उसने पाया कि फल खाने के बकरियों में ऊर्जा का संचार कुछ ज्‍यादा हो रहा है. और वे लंबे समय तक जागती रहती हैं. उसने इस बात का जिक्र गांव के लोगों से किया. फिर सबने मिलकर इस फल यानि काफी बीन्‍स का पेय बनाकर पिया. सब यह देखकर आश्‍चर्यचकित रह गए कि इस पेय के पीने के बाद रात रात भर जागा जा सकता है और प्रार्थना की जा सकती है.

स्‍टारबक्‍स दुनिया की प्रतिष्ठित कॉफी शॉप है. जिसकी शुरूआत 1971 में वाशिंगटन से हुई थी. कैफे कॉफी डे और बरिस्‍ता भारतीय ब्राण्‍ड हैं. भारत में कॉफी के उत्‍पादन का इतिहास बहुत रोचक और दिलचस्‍पी से भरा हुआ है. बात उन दिनों की है जब अरब में कॉफी के निर्यात पर सख्‍त पाबंदी थी, इसे वहां से बाहर सिर्फ भूनकर या उबालकर ही ले जाया जा सकता था, ताकि किसी और देश में इसका अंकुरण नहीं किया जा सके. इन्‍हीं दिनों भारतीय मुस्लिम संत बाबा बुदान धार्मिक यात्रा के लिए मक्‍का गए. वहां से वे काफी के सात बींस अपनी कमर में बांध कर छिपाकर भारत ले आए.

इस गैरकानूनी काम के लिए उन्‍हें सजा भी हो सकती थी, इसलिए उनका यह काम बहादुरी का काम माना गया. अपने काम को धार्मिक चोला पहनाते हुए बाबा बुदान सात बींस लाए, सात का अंक मुस्लिम धर्म में पवित्र माना जाता है. बाद में इसे चिकमंगलूर की 6001 फीट ऊंची पहाड़ियों पर उगाया गया. ये पहाड़ियां अब बाबा बुदेन गिरि के नाम से जानी जाती हैं. इस तरह भारत के वर्तमान कर्नाटक राज्‍य से काफी की पैदावार शुरू हुई.

भारत में काफी का उत्‍पादन मुख्‍यत: दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाकों में होता है. जिनमें कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं. उड़ीसा, आंध्र प्रदेश सहित पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में भी कॉफी की आंशिक पैदावार होती है. कर्नाटक में सबसे ज्‍यादा 53 प्रतिशत, केरल में 28 और तमिलनाड में 11 प्रतिशत काफी पैदा की जाती है, दुनिया की बात करें तो ब्राजील कॉफी का सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है. जहां दुनिया की कुल पैदावार की 40 प्रतिशत काफी उगाई जाती है. इंटरनेशनल काफी एसोसिएशन के अनुसार यूएस की तुलना में यूरोप अधिक काफी का आयात करता है. लेकिन शीर्ष तीन कॉफी पीने वाले देशों की बात करें तो फिनलैंड, नार्वे और आइसलैण्‍ड का नाम सामने आता है.


अंतर्राष्‍ट्रीय कॉफी डे 01 अक्‍टूबर 2015 को अंतर्राष्‍ट्रीय कॉफी संगठन की सहमति से मिलान में लॉन्च किया गया था. इस साल का कॉफी डे कॉफी किसानों की समस्‍याओं को समर्पित है.

एक मशहूर कहावत है हर सफल आदमी के पीछे एक महिला होती है जबकि स्‍टेफनी पिरो का कहना है – हर सफल महिला के पीछे काफी मात्रा में ‘कॉफी’ है। आप मानें या ना मानें कैटरीना तो जरूर मानेगी, बशर्ते ऊपर वाला किस्‍सा सच हो. Justina Headley के अनुसार ‘जीवन में रोमांच अच्‍छा है ...... कॉफी में निरंतरता और बेहतर’. तो अगर आप जीवन में रोमांच चाहते हैं तो हो जाए एक कॉफी, बार-बार कॉफी. हेनरी रोलिंस कहते हैं एक कप कॉफी के साथ सबसे अच्‍छा क्‍या है ? एक और कप .

चलते चलते एक एक्‍सक्‍लूसिव जानकारी. मध्‍य प्रदेश के जंगलों में काफी के बागान हैं. जहां अंग्रेजों के जमाने से काफी की खेती हो रही है. इस बेहद ही खूबसूरत इलाके की सैर हम आपको जल्‍द ही कराने वाले हैं. और सुनाने वाले हैं इस बागान की बहुत ही रोचक और दिलचस्‍प कहानी.

( लेखक फिल्‍म और कला समीक्षक, स्‍वतंत्र पत्रकार है. एक फीचर फिल्‍म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्‍युमेंट्रीज़ और टेलीफिल्‍म्‍स लिखी और निर्देशित की हैं)
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ब्लॉगर के बारे में
शकील खान

शकील खानफिल्म और कला समीक्षक

फिल्म और कला समीक्षक तथा स्वतंत्र पत्रकार हैं. लेखक और निर्देशक हैं. एक फीचर फिल्म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्युमेंट्री और टेलीफिल्म्स लिखी और निर्देशित की हैं.

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First published: October 1, 2020, 11:47 AM IST
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