नए फिल्‍मी गीतों के ‘बोल’ भी कम अनमोल नहीं हैं

फिल्‍मी गानों की विशेषरूप से नए गीतों की बात करें  तो साहित्‍य और अदब से जुड़े लोग मुंह बनाने लगते हैं. एक बड़े तबके का मानना है कि फिल्‍मी गाने स्‍तरीय हो ही नहीं सकते क्‍योंकि ये मॉस (आम जनता) के लिए लिखे जाते हैं. आम लोगों के लिए लिखने पर इसे सरल और आसान शब्‍दों में लिखना पड़ता है. इसके चलते बहुत सारे समझौते करना पड़ते हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: July 27, 2021, 8:30 PM IST
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नए फिल्‍मी गीतों के ‘बोल’ भी कम अनमोल नहीं हैं
पिछले दिनों हमने पुराने और नए गीतों का मेलॉडी के आधार पर मूल्‍यांकन किया था इस बार नए गीतों के लिरिक्‍स पर बातें. बॉलीवुड फिल्‍मों पर चोरी का आरोप बहुत लगाया जाता है, कहानी और प्‍लाट चोरी का.  खासतौर पर हालीवुड फिल्‍मों की नकल करने का. कभी-कभी तो ये नकल हूबहू भी हो जाती है. लेकिन एक मामले में हिंदी फिल्‍में किसी की नकल नहीं करतीं, बल्कि हो सकता है कि दूसरे लोग इसकी नकल करते हों, वो मामला है ‘हिंदी फिल्‍मों में गाने’. फिल्‍मी गाने बॉलीवुड फिल्‍मों को यूनिक बनाते हैं. इस मामले में बॉलीवुड फिल्‍मी दुनिया का सिरमोर है.

यही कारण है भारतीय फिल्‍मों की लंबाई हॉलीवुड के मुकाबले कुछ ज्‍यादा होती है. आमतौर पर हिंदी फिल्‍मों की लंबाई सवा दो-ढाई घंटे के आसपास होती है. जबकि, हॉलीवुड (विदेशी) फिल्‍मों की डेढ़ से दो घंटे. फिल्‍मी गानों की विशेषरूप से नए गीतों की बात करें, तो साहित्‍य और अदब से जुड़े लोग मुंह बनाने लगते हैं. एक बड़े तबके का मानना है कि फिल्‍मी गाने स्‍तरीय हो ही नहीं सकते, क्‍योंकि ये मॉस (आम जनता) के लिए लिखे जाते हैं. आम लोगों के लिए लिखने पर इसे सरल और आसान शब्‍दों में लिखना पड़ता है.

इसके चलते बहुत सारे समझौते करना पड़ते हैं. इसीलिए, अच्‍छा कवि ओर शायर भी स्‍तरीय लिरिक्‍स नहीं लिख पाता. यह आरोप खासतौर नए गानों पर ज्‍यादा लगाया जाता है. उनकी नज़र में इनमें ना सिर्फ फूहड़ता भरी है बल्कि कहीं कहीं तो अश्‍लीलता भी है.

अच्‍छे गीत रच रहे हैं नए गीतकार
ये आरोप कुछ हद तक सही हो सकता है, लेकिन पूरी तरह नहीं. नए गीतकार बहुत अच्‍छा भी रच रहे हैं. यहां सब धान एक पसेरी नहीं है. नए फिल्‍मी गीतों के बोल भी कम अनमोल नहीं हैं. आगे हम उदाहरण सहित इसे बताएंगे.  एक बात और कोई भी क्रिएशन सिर्फ इसलिए स्‍तरहीन या कमतर नहीं हो जाता कि उसकी भाषा आसान और सरल है. बल्कि सच तो ये है कि आसान और सरल भाषा में गूढ़ और अर्थपूर्ण बात कहना ज्‍यादा कठिन है.

बहरहाल, बॉली‍वुड फिल्‍मों में गाने की अहमियत समझनी हो तो फिल्‍म ‘हम आपके हैं कौन’ को उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है. फिल्‍म में 14 गाने हैं. 199 मिनिट की अवधि की इस फिल्‍म में गानों की कुल लंबाई 71.09 मिनिट है. जिसमें से एक गाना ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ 7.39 मिनिट है. इस फिल्‍म को बेस्‍ट फिल्‍म का अवार्ड सहित कुल पांच फिल्‍म फेयर अवार्ड मिले थे. यह फिल्‍म बाक्‍स ऑफिस पर सुपर डुपर हिट हुई थी. जिसमें गानों का बड़ा योगदान था.


इसके आलोचक इसे चित्रहार कहकर बुलाते थे. चित्रहार यानि दूरदर्शन के जमाने में चलने वाला फिल्‍मी गीतों का प्रोग्राम, जिसमें फिल्‍मी गानों के वीडियो दिखाए जाते थे. बताते चलें दूसरी तरफ इत्‍तेफाक जैसी फिल्‍म भी है जो कुल 105 मिनिट यानि 1 घंटा 45 मिनिट की है. इत्‍तेफाक में गाने नहीं थे और हम आपके हैं कौन में भरपूर गाने थे. बताते चलें कि तारे जमीं पर का शीर्षक गीत भी सात मिनट का था.उत्‍तर भारत में बहुत ज्‍यादा पापुलर हैं हिंदी-उर्दू मिक्‍स गाने
हिंदी-उर्दू मिक्‍स भाषा यानि हिंदुस्‍तानी में बने फिल्‍मी गाने पूरे भारत में खासकर उत्‍तर भारत में बहुत ज्‍यादा पापुलर हैं. इन दिनों कुछ गानों में अंग्रेजी का प्रयोग भी होता है, पंजाबी शब्‍दों की धमक भी हिंदी गानों की पहचान बन चुकी है. हिंदी फिल्‍मी गाने सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में भारतीय संस्‍कृति का अभिन्‍न अंग माने जाने लगे हैं. वैसे भी गीत-संगीत और नृत्‍य उत्‍सवप्रिय भारतीय जनमानस में पहले से ही रचे-बसे हैं. फिर चाहे वो विवाह जैसा सामाजिक आयोजन हो या धार्मिक उत्‍सव.

फिल्‍मी गीतों के बिना सफर की कल्‍पना बेमानी है. सफर पर निकलने वाले गाड़ी में पेट्रोल देखने से पहले ये चेक करते हैं कि म्‍युजिक सिस्‍टम तो ठीक है ना. रेल-बस से जाने वाले इयर फोन चैक करते हैं. सवाल ये है कि गानों पर स्‍तरहीन, चीप और अश्‍लीलता का जो आरोप है, उसके लिए जिम्‍मेदार कौन है.

एक साक्षात्‍कार में वर्तमान समय के पापुलर लिरिक राइटर स्‍वानंद किरकिरे, अमिताभ भट्टाचार्य, कुमार और मयूर पुरी साक्षात्‍कारकर्ता कोमल नाहटा से एक सुर में कहते हैं कि ‘इसके लिए जिम्‍मेदार श्रोता और सोसायटी है. क्‍योंकि वो जैसा चाहते हैं वैसा लिखा जाता है.’  साथ ही वे यह भी कहते हैं कि ‘हमेशा ऐसा नहीं होता इन दिनों अच्‍छे गाने भी लिखे जा रहे हैं.’

आरोपों से बने हुए है पुराने फिल्‍मी गीत
चूंकि पुराने गानों पर आरोप नहीं लगाए जाते, इसलिए हम नए गानों पर अपनी बात केन्द्रित करेंगे. अपनी प्रेयसी की तारीफ सिर्फ एक लाइन में करना हो तो आप क्‍या कहेंगे. ऐसी लाइन कि गर्ल फ्रेंड आप पर वारी हो जाए. यह आसान नहीं है लेकिन अगर बात साहिर लुधियानवी जैसे शायर की हो तो कोई मुशिकल नहीं. ‘तुम्‍हारे आने तलक हमको होश रहता है, फिर इसके बाद हमें कुछ खबर नहीं होती’ ये एक पुराने गाने की लाइन है. एक आशिक अपनी माशूक से इससे बड़ी बात क्‍या कह सकता है ?

बात आज के दौर की. ‘हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते तेरे बिना क्‍या वजूद मेरा’ ‘तुझसे जुदा गर हो जाएंगे तो खुद से ही हो जाएंगे जुदा’ ‘आशिकी 2’ का यह गीत भी आधुनिक प्रेयसी को उतना ही खुश करेगा जितना साहिर का वो पुराना गाना. गीत को मिथून (चक्रवर्ती नहीं) ने लिखा था.


बिलकुल ही नए दौर में आ जाएं तो बॉय फ्रेंड कहता मिलेगा. ‘सुनो ना संगेमरमर की ये मीनारें, कुछ भी नहीं हैं आगे तुम्‍हारे, आज से दिल पे मेरे राज तुम्‍हारा, ताज तुम्‍हारा’ कौसर मुनीर के लिखे ‘यंगिस्‍तान’ फिल्‍म के इस गीत से भी कौन खुश नहीं होगा. कौसर का इश्‍कज़ादे फिल्‍म का ‘परेशां’ भी पापुलर सांग रहा है. कुल मिलाकर हम कहना यह चाहते हैं कि नए दौर में भी बेहतर गाने लिखे जा रहे हैं, सुने जा रहे हैं और पसंद भी किए जा रहे हैं.

नए हांडी के फिल्‍मी चावल का टेस्‍ट
चलिए, हांडी में से कुछ चावल टेस्‍ट करते हैं. ‘तुझ संग बैर लगाया ऐसा, रहा ना मैं फिर अपने जैसा, मेरा नाम इश्‍क, तेरा इश्‍क, ..... ये लाल इश्‍क, ये मलाल इश्‍क, ये ऐब इश्‍क, ये बैर इश्‍क..’ फिल्‍म ‘गोलियों की रासलीला’ के लिए इसे 2019 में सिद्धार्थ-गरिमा ने लिखा था. बेहतर गीतों की बात करें तो ‘1942-ए लव स्‍टोरी’ का गीत ‘कुछ ना कहो... मुझको पता है, तुमको पता है’ दिल की जो बातें हैं दिल ही में रखना पिया.... पिया बोले हां ये बोले क्‍या ये बोले जानूं ना..(परिणीता)

मासूम का गीत ‘तुझसे नाराज़ नहीं जि़ंदगी हैरान हूं मैं’  लिरिक्‍स के मामले में ये गीत कहां किसी से कम हैं. ये फे‍हरिस्त बहुत लंबी है. वर्तमान दौर में निर्माता-निर्देशक और संगीतकार की पहली डिमांड गीतकार से ये होती है कि ‘एक चालू सी हुक लाइन दे दो. गीत लंबे समय तक भले ना टिके लेकिन कम समय में बहुत पापुलर हो जाए ऐसा लिखो.’


गीतकार क्रिएटिव है, तो वो चालू हुक लाइन के साथ बढ़िया लिरिक्‍स भी डाल देता है. अमिताभ भट्टाचार्य का फेंटम का ये गीत देखें. ‘अफगान जलेबी, माशूक फरेबी, घायल है तेरा दीवाना’ जैसे बोल के साथ .. ‘शमशीर निगाहें चाबुक सी अदाएं नाचीज़ पे ना चला’ भी वे उसी गीत में जोड़ देते हैं.  बता दें गीत हिट था. यह भी सही है कि सबका अपना नज़रिया ओर अपनी पसंद होती है.

नए ज़माने के बेहतरीन लिरिक्‍स राइटर
अमिताभ का ही एक और गीत है फिल्‍म एजेंट विनोद का. ‘कुछ तो है तुझसे राब्‍ता’ प्रेम के इस मधुर गीत के बेकड्राप में गोली-बारी ओर मारधाड़ चल रही है फिर भी इसकी मधुरता कायम है. ये संगीतकार प्रीतम का कमाल है. नए ज़माने के बेहतरीन लिरिक्‍स राइटर की बात हो तो राकस्‍टार के गीत लिखने वाले इरशाद कामिल की जरूर होगी.  ‘नादान परिंदे घर आ जा ....  सौ दर्द बदन पे फैले हैं, हर करम के कपड़े मैले हैं.’ राकस्‍टार के इस गीत में गहरी ओर अर्थपूर्ण लाइनें मिल जाती हैं. राक स्‍टार के और भी गाने शानदार थे.

स्‍वानंद किरकिरे की बात भी जरूरी है. थ्री इडियट का गीत आपको याद होगा. ‘बहती हवा सा था वो, उड़ती पतंग सा था वो, कहां गया उसे ढूंढो’  या फिर जुबी डूबी पंपारा’ .

बात प्रसून जोशी की होगी तो तारे ज़मीं पर का टाइटल सांग की बात जरूर होगी. ‘देखो इन्‍हें ये हैं ओस की बूंदे, पत्‍तों की गोद में आसमां से कूदें.’  प्रसून जोशी की कलम से निकले देल्‍ही 6 के गाने भी याद रहने वाले हैं ‘मसकली’ या ‘रहना तू है जैसा तू, थोड़ा सा दर्द, थोड़ा सा सुकूं’. प्रसून के इन गीतों को एआर रहमान का क्‍लासिक साथ भी मिला था. जावेद अख्‍तर और गुलज़ार के बिना बात अधूरी रहेगी. इनकी बात बाद में इसलिए कर रहे हैं क्‍योंकि लोगों को लगता है ये तो अच्छा लिखते ही हैं, इसमें नया क्‍या.

‘चांद तारे तोड़ लाउं, सारी दुनिया पर मैं छाउं, बस इतना सा ख्‍वाब है’ क्‍या कमाल की लाइनें हैं, सब कुछ चाहिए लेकिन ख्‍वाब को छोटा सा बता रहे हैं. यस बॉस फिल्‍म का यह गीत शाहरूख के बेहतरीन गीत में शुमार होता है. 1942 ए लव स्‍टोरी हो या दूसरी फिल्‍में बहुत सारे अच्‍छे गीत जावेद के खाते में हैं.

गुलज़ार की खूबसूरत लाइनें और फिल्‍मी गीत
आखिरी में, गुलज़ार की बात. ढूंढना शुरू करेंगे तो गुलज़ार की ढेर सारी खूबसूरत लाइनें फिल्‍मी गीतों में बिखरी मिल जाएंगी. यहां लिखना शुरू करेंगे, तो पूरा आलेख ही उन पर हो जाएगा. उदाहरण के लिए एक गीत भर का जि़क्र कर देते हैं. इस गीत से बहुत सारी विशेषताएं जुड़ी हैं. लिरिक्‍स अद्भुत है, रहमान का संगीत वाह-वाह है. और पिक्‍चराईज़ेशन ?

इस मीठे प्रेमगीत को मणिरत्‍नम ने आइटम सांग बनाकर पेश कर दिया. वो भी मल्लिका शेरावत के हाट डांस के साथ. मधुर संगीत से सजे इन अलफाज़ों के साथ यह कंट्रास प्रयोग अनूठा ओर कमाल का था. फिल्‍म थी ‘गुरू’ और गीत था ‘मइया - मईया’. लिरिक्‍स भी देख लीजिए. ‘तू नील समंदर है मैं रेत का सहिल हूं आगोश में ले ले   मैं देर से प्‍यासी हूं..... एक चांद की कश्‍ती में चल पार उतरना है, तू हल्‍के-हल्‍के खेना, दरिया ना छलके’

दूसरे और भी गीत हैं. ‘फटा पोस्‍टर निकला हीरो’ का ये गीत कमाल का है ‘मैं रंग शरबतों का तू मीठे घाट का पानी’  (इरशाद कामिल) या फिर ‘धूम 3’ ‘तू छरेरी घूप है, तू करारी शाम, दिल कहे बरबाद होजा लेके तेरा नाम .... तू ही ज़ुनून ....(कौसर मुनीर) इस गीत का फिल्‍मांकन भी बहुत अद्भुत और मनमोहक है. ‘दम लगाके हइसा’ का ‘मोह मोह के धागे’ (वरूण ग्रोवर) भी लाजवाब है. ‘भीगी भीगी सी हैं रातें, भीगी-भीगी यादें, भीगी-भीगी बातें, भीगी-भीगी आंखों में कैसी नमी है.’ (मयूर पुरी) भी याद रखने लायक है.

इसके अलावा अर्थ, मर्डर, गेंगस्‍टर के गीत भी बहुत खूबसूरत शब्‍दों से सजे गीत हैं. और भी हैं. पुराना दौर हिंदी गीतों का सुनहरा दौर था इसमें कोई शक नहीं उस दौर के गाने अमर हैं और आज भी सुने जाते हैं लेकिन ये दौर भी अच्‍छे गीतों के मामले में बहुत बुरा दौर नहीं है. ये सच है कि अच्‍छे लिरिक्‍स कम लिखे जा रहे हैं लेकिन इतने कम भी नहीं के इन्‍हें बेकार समझ कर पूरे के पूरे डस्‍टबिन में डाल दिए जाएं.

इस बारे में गीतकार मयूर पुरी वक्‍तव्‍य काबिले गौर है ‘अपने ज़माने में शेक्‍सपीयर को भी चीप कहा जाता था. जब उन्‍होंने नाटक लिखे थे, तो बहुत इज़्ज्‍त नहीं मिली थी उन्हें. लेकिन वो पापुलर बहुत थे.’
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
शकील खान

शकील खानफिल्म और कला समीक्षक

फिल्म और कला समीक्षक तथा स्वतंत्र पत्रकार हैं. लेखक और निर्देशक हैं. एक फीचर फिल्म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्युमेंट्री और टेलीफिल्म्स लिखी और निर्देशित की हैं.

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First published: July 27, 2021, 8:30 PM IST
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