RD Burman 27th death Anniversary: पंचम दा.. ज‍िन्‍हें नई जनरेशन भी दिल से चाहती है

RD Burman 27th death Anniversary: 27 जून 1939 को कोलकाता में जन्‍में पंचम दा ने 04 जनवरी 1994 में मुंबई में अंतिम सांसें लीं. अपनी उम्र के 55 बसंत भी नहीं देखने वाले पंचम ने अपनी छोटे से फिल्‍मी संगीत के सफर में हमें इतना कुछ दे दिया है कि इसके सहारे उनके फैन बरसों बरस का सफर पूरा कर सकते हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: January 4, 2021, 12:25 PM IST
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RD Burman 27th death Anniversary: पंचम दा.. ज‍िन्‍हें नई जनरेशन भी दिल से चाहती है
पंचम दा ने 04 जनवरी 1994 में मुंबई में अंतिम सांसें लीं.
आर. डी. बर्मन यानि पंचम दा संभवत: पुरानी पीढ़ी के ऐसे इकलौते संगीतकार हैं जिनके गीतों को नई जनरेशन भी वैसे ही चाहती है जिस तरह उन्‍हें उनके दौर के श्रोता पसंद करते थे. एक अलमस्‍त, लापरवाह और जीनियस पंचमदा ने बालीवुड के संगीत को अपने प्रयोगों से एक नई दिशा दी. वो अपने ज़माने से आगे का संगीत रचने वाले संगीतकार थे.

पंचमदा पर बात की शुरूआत एक किस्‍से से. ये किस्‍सा आरडी बर्मन के काम करने के तरीके और उनके टेलेंट से सीधा साक्षात्‍कार कराता है. फिल्‍मों में आमतौर पर गीत ट्यून पर लिखे जाते हैं यानि धुन पहले बन जाती है और उसमें शब्‍द बाद में पिरोए जाते हैं. किस्‍सा सागर फिल्‍म के एक गीत से जुड़ा है. पंचमदा ने एक ट्यून गीतकार जावेद अख्‍तर को दी ओर उस पर गीत लिखने को कहा. निर्धारित समय पर जावेद मीटिंग स्‍थल पर पहुंचे. वहां पंचम के साथ फिल्‍म के निर्देशक रमेश सिप्‍पी भी मौजूद थे. जावेद ने पहुंचते ही कहा मेरे पास दो खबरें हैं, एक अच्‍छी और एक बुरी, पहले कौन सी सुनाउं. पंचमदा बोले पहले अच्‍छी सुना दो. जावेद ने कहा अच्‍छी खबर ये है कि मैंने गीत लिख लिया है. और बुरी खबर ? जवाब में जावेद ने कहा बुरी खबर ये है कि मैंने गीत तुम्‍हारी ट्यून पर नहीं लिखा है. सुनकर पंचमदा बोले ये क्‍या कह रहे हो. कल रिकार्डिंग है, सब तैयारी हो चुकी है, अब कैसे होगा.

जावेद बोले बस मज़ा नहीं आ रहा था, मैं एक लाइन इस गीत में खास तौर पर जोड़ना चाह रहा था और वो उसमें फिट नहीं हो रही थी. मीटर में नहीं बैठ रही थी. इसलिए मैंने अपना गीत लिख दिया. पंचम बोले अच्‍छा द‍िखाओं. पंचम को जावेद ने सुनाना शुरू किया और पंचम ने लिखना. जावेद बताते हैं ‘उसने गाना पूरा लिखा, बाजा खोला और गाने लगा. वहीं ट्यून आप और हम आज तक सुनते आ रहे हैं. वह गीत था ‘ सागर’ फिल्‍म का, ‘चेहरा है या चांद खिला, ज़ुल्‍फ घनेरी सांझ है क्‍या, सागर जैसी आंखों वाली, ये तो बता तेरा नाम है क्‍या...'

जावेद जो लाइन लिखना चाह रहे थे वो लाइन थी ‘सागर जैसी आंखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्‍या’. जावेद कहते हैं मैं जब उसे लिरिक्‍स डिक्‍टेट कर रहा था तब पंचम साथ-साथ धुन बनाते जा रहे थे. इसीलिए जैसे ही गाना खत्‍म हुआ वो गाने लगे. तो इतने जीनियस थे संगीतकार आरडी. बर्मन.
1987 में नसीरूद्दीन शाह और अनुराधा पटेल की एक फिल्‍म आई थी इजाज़त. इसमें गुलज़ार ने गीत लिखे थे. जब गुलज़ार ने एक गीत पंचम को थमाया तो वो बोले ये क्‍या ले आए, ये तो अखबार की खबर लगती है. गुलज़ार बोले ये गीत है. वैसे गुलज़ार बहुत कमाल का लिखते हैं, लेकिन उनका ये गीत कुछ खास कमाल का नहीं था. लेकिन इन साधारण से शब्‍दों वाले, धुन के हिसाब से मुश्किल गीत को लेकर पंचम ने ऐसा संगीत रचा कि ये गीत एक बेहद खूबसूरत गाना बन गया. गीत था ‘मेरा कुछ सामान तुम्‍हारे पड़ा है.’ इसे आशा भोसले ने स्‍वर दिया था. तो ऐसे थे पंचम जिनके हाथ में पहुंचकर पत्‍थर भी हीरा बन जाता था.

27 जून 1939 को कोलकाता में जन्‍में पंचम दा ने 04 जनवरी 1994 में मुंबई में अंतिम सांसें लीं. अपनी उम्र के 55 बसंत भी नहीं देखने वाले पंचम ने अपनी छोटे से फिल्‍मी संगीत के सफर में हमें इतना कुछ दे दिया है कि इसके सहारे उनके फैन बरसों बरस का सफर पूरा कर सकते हैं. उनकी पहली शादी रीता पटेल से हुई (1966-1971). बाद में उन्‍होंने आशा भोंसले से 980 में विवाह किया. इस शादी के लिए पंचम की मां तैयार नहीं थीं.  पंचम दा ने अपनी संगीतबद्ध्‍ की 18 फिल्‍मों में आवाज़ भी दी. भूत बंगला और प्‍यार का मौसम में कैमियो भी किया.

महान संगीतकार सचिन देव बर्मन के बेटे राहुल देव बर्मन का नाम पंचम क्‍यों पड़ा इसकी कहानी रोचक है. बचपनम में जब ये रोते थे तो पंचम सुर की घ्‍वनि सुनाई देती थी. जिसके चलते इनका नाम पंचम पड़ गया. कुछ लोगों का कहना है कि उन्‍हें ये नाम अभि‍नेता अशोक कुमार ने दिया. सचिन दा ने पंचम को संगीत की शिक्षा बचपन से ही देना शुरू कर दी थी. महज नौ बरस की उम्र में पंचम ने पहला संगीत रच दिया था- ‘ऐ मेरी टोपी पलट के’. इस संगीत को उनके पिता ने फिल्‍म फंटूश में इस्‍तेमाल किया. पंचम ने भले ही संगीत अपने पिता से सीखा लेकिन उनकी शैली अपने पिता से बिलकुल अलग थी. उनके संगीत में हिंदुस्‍तानी संगीत के साथ साथ पाश्‍चात्‍य संगीत का तड़का भी लगता था. जबकि एसडी बर्मन सिर्फ शास्‍त्रीय संगीत पसंद करते थे.संगीतकार के रूप में उन्‍हें पहला अवसर उनके दोस्‍त हास्य अभिनेता मेहमूद ने छोटे नवाब में दिया. जबकि उनकी पहली सफल फिल्‍म तीसरी मंजि़ल थी. नासिर हुसैन ने जब अपनी इस फिल्‍म के लिए पंचम को साइन किया तो फिल्‍म के हीरो शम्‍मी कपूर को उनका यह निर्णय रास नहीं आया. उन्‍हें लगा कि ये नया लड़का क्‍या संगीत देगा. शम्‍मी कपूर खुद भी संगीत के अच्‍छे जानकार थे और उन्‍हें फिल्‍मी संगीत की अच्‍छी खासी समझ थी. नासिर बोले एक बार मिल तो लो उससे. अंतत: शम्‍मी कपूर पंचम से मिले. उनकी बनाई धुन सुनकर शम्‍मी कपूर खुशी से झूम कर बोले वाह क्‍या कमाल की धुन है. तीसरी मंजिल की सफलता में उसके गीतों का भी बड़ा योगदान था. आजा आजा मैं हूँ प्‍यार तेरा, ओ मेरे सोना रे सोना रे और तुमने मुझे देखा होकर मेहरबां जैसे गीतों ने श्रोताओं को एक नए अनुभव से रूबरू कराया. इसके पहले उन्‍होंने छोटे नवाब में ‘घर आजा घिर आए बदरा संवरिया’ जैसा सुमधुर गीत भी रचा जिसे लता मंगेशकर ने गाया.

सत्‍तर के दशक में पंचमदा बालीवुड के स्‍थापित संगीतकारों की श्रेणी में आ गए थे. उनकी मौसिकी में लता, रफी, आशा, किशोर जैसे बड़े गायकों ने गीत गाए.1970 ऐसा साल था जब आरडी बर्मन ने छ: फिल्‍मों में संगीत दिया, जिसमें कटी पतंग भी शामिल थी. बाद में राजेश खन्‍ना, किशोर कुमार और पंचमदा की तिकड़ी ने अमर प्रेम सहित अनेक फिल्‍मों में साथ काम किया.

पड़ोसन का गीत ‘एक चतुर नार करके श्रंगार’ याद है ना आपको ? दम मारो दम भी याद होगा ? हरे रामा हरे कृष्णा के इस गीत ने संगीत जगत में तहलका मचा दिया था. ये गाना युवा आज भी गुनगुनाते दिख जाते हैं. पंचम ने मस्‍ती भरे गीतों की रचना की तो ‘आपकी कसम’ में ‘जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम वो फिर नहीं आते’ जैसा संजीदगी से भरा संगीत भी रचा.

पंचमदा एक जीनियस संगीतकार थे, इसमें कोई शक नहीं लेकिन फिल्‍मी दुनिया बहुत निष्‍ठुर है ये कलाकार को उसकी कला से नहीं उसकी सफलता और असफलता से नापती है. आर डी बर्मन की फिल्‍में जब एक के बाद एक फ्लॉप होना शुरू हुईं तो उनके पुराने नए सभी साथियों ने उनका साथ छोड़ दिया. हालात ये हो गए कि पंचमदा एकदम बेरोजगार हो गए. लोगों ने उन्‍हें अस्‍पृश्‍य मान लिया. इसके चलते उनका अंतिम समय बहुत खराब गुज़रा.

फिल्‍म निर्माण एक संयुक्‍त प्रयास होता है. अच्‍छी और सफल फिल्‍म तभी बनती है जब यह हर फील्‍ड में श्रेष्‍ठ हो. यानि निर्देशन, लेखन, अभिनय, गीत ओर संगीत सभी फील्‍ड में. लेकिन ये दुनिया बहुत अजीब है यहां कब क्‍या हो कह नहीं सकते. यहां षड़यंत्रकारी कब किसे उठा दें, कब किसे गिरा दें, कह नहीं सकते. आरडी बर्मन की तमाम फ्लॉप फिल्‍मों का ठीकरा षड़यंत्रपूर्वक सिर्फ आरडी बर्मन के सिर पर फोड़ दिया गया्. जबकि हर असफल फिल्‍म में भी उनका संगीत लाजवाब था. फिल्‍म फ्लाप थीं लेकिन संगीत हिट. लेकिन असफलता की पर्ची बेवजह आरडी बर्मन पर फाड़ दी गई.

बरसों बाद उन्‍हें विधु विनोद चौपड़ा की फिल्‍म ‘1942 – ए लव स्‍टोरी’ मिली. इस फिल्‍म के गीत जावेद अख्‍तर ने लिखे थे. जिनके साथ पंचमदा की ट्यूनिंग बढि़या थी. इनफेक्‍ट यह फिल्‍म उन्हें जावेद के कहने पर ही मिली थी. लोगों ने विधु को आरडी से दूर रहने की सलाह भी दी थी. लेकिन विधु ने उन पर भरोसा किया. पंचम दा उनकी कसौटी पर खरे भी उतरे और उन्‍होंने अत्‍यंत दिलचस्‍प और सुमधुर संगीत रचा. फिल्‍म का एक गीत ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ आज भी पापुलर है. इसी तरह ‘कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो’ भी बहुत खूबसूरत और लोकप्रिय गीत है. जब आर.डी.बर्मन इस फिल्‍म का संगीत रच रहे थे तब उन्‍होंने कहा था कि ‘मैं बताउंगा आर.डी. बर्मन क्‍या है.’ ‘1942- ए लव स्‍टोरी’ के संगीत से उन्‍होंने अपने आपको साबित भी किया. फिल्‍म सुपर डुपर हिट साबित हुई और इसका संगीत भी लोगों के दिलो दिमाग़ पर छा गया, आज तक छाया हुआ है. लेकिन अफसोस आर. डी. बर्मन अपनी सफलता नहीं देख पाए और इसकी रिलीज़ से चंद दिन पहले ही उन्‍होंने इस फानी दुनिया से बिदा ले ली.

चलते चलते एक बात और. आशा और लता ने आर. डी. बर्मन के साथ बहुत गीत गाए. आशा और लता की बोली में मराठी टच था तो आर.डी. पर असमिया की छाप थी. तीनों की हिंदी बहुत अच्‍छी नहीं थी. लेकिन इन तीनों ने जब भी गीत की रचना की इनके उच्‍चारण में इंच मात्र भी गलती नहीं हुई.

(Disclaimer: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
शकील खान

शकील खानफिल्म और कला समीक्षक

फिल्म और कला समीक्षक तथा स्वतंत्र पत्रकार हैं. लेखक और निर्देशक हैं. एक फीचर फिल्म लिखी है. एक सीरियल सहित अनेक डाक्युमेंट्री और टेलीफिल्म्स लिखी और निर्देशित की हैं.

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First published: January 4, 2021, 12:25 PM IST
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