अमर सिंह; दुश्मनों को करीब लाने वाला नेता, जो मुलायम से लेकर मोदी तक का करीबी रहा

अमर सिंह की राजनीति को दिल्ली की सत्ता के गलियारों की बेहद दिलचस्प राजनीति माना जाता है. वे पहले माधवराव सिंधिया के करीबी और कांग्रेस के सदस्य रहे. इसके बाद समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी बन गए. पिछले कुछ वर्षों से खबर आ रही थी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बहुत करीबी हो गए थे.

Source: News18Hindi Last updated on: August 4, 2020, 1:47 PM IST
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अमर सिंह; दुश्मनों को करीब लाने वाला नेता, जो मुलायम से लेकर मोदी तक का करीबी रहा
अमर सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनका 1 अगस्त को निधन हो गया.
अमर सिंह नहीं रहे. 64 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई. अमर सिंह को मैं सबसे पहले स्व. वीर बहादुर सिंह के दफ्तर में मिला था. वीर बाहदुर सिंह उन दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. बाद में उनको मुलायम सिंह यादव के करीबी दोस्त के रूप में देखा गया. पिछले कुछ वर्षों से खबर आ रही थी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बहुत करीबी हो गए थे. उन्होंने गरीब पृष्ठभूमि के परिवार से आकर दिल्ली की राजनीति में जो मुकाम बनाया ,वह बहुत लोगों के लिए रश्क का विषय हुआ करता था. मुंबई की फ़िल्मी दुनिया और उद्योग की दुनिया में भी उन्होंने एक बारुतबा और बाइज्ज़त मुकाम बनाया.

2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान मैं एक उर्दू अखबार में काम करता था. अमर सिंह उन दिनों समाजवादी पार्टी में बहुत ही ताकतवर नेता थे. मैंने इंटरव्यू के लिए कहा तो उन्होंने तुरंत ही समय दे दिया. रात बारह बजे का समय तय हुआ. मुझे लगा कि आधे घंटे में इंटरव्यू हो जाएगा. लेकिन ढाई बजे तक बातचीत होती रही. उसी बातचीत में उन्होंने ऑफ द रिकॉर्ड बताया था कि उनकी किडनी ख़राब है लेकिन चुनाव तक इसकी चर्चा नहीं की जाएगी. 2009 के चुनाव के तुरंत बाद ही वे किडनी के इलाज के लिए चले गए थे.

मेरा उनसे अच्छा परिचय था. मुझे अपना मित्र कभी नहीं माना लेकिन जब भी मिले इज्ज़त से मिले. उनके जो भी करीबी दोस्त थे उनको वे हमेशा सम्मान देते थे. उनके मित्र मीडिया, राजनीति, उद्योग, व्यापार और सिनेमा, सभी क्षेत्रों में थे. राजनीति में लोगों को सम्मान देना उनकी आदत का हिस्सा था. अमर सिंह किसी से भी बात कर लेने में कोई संकोच नहीं करते थे .

अमर सिंह, मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव के दूसरे कार्यकाल में उनके करीब आये थे. उसके पहले ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य थे. ग्वालियर के महाराजा स्व. माधवराव सिंधिया के बहुत क़रीबी के रूप में जाने जाते थे. मुलायम सिंह के साथ बहुत क़रीबी दोस्ती थी लेकिन बहुत समय तक कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य बने रहे. बाद में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा के सदस्य बने और जीवन पर्यंत रहे.
मुलायम सिंह यादव के परिवार में उनके खिलाफ कई ताक़तवर लोग हो गए थे लिहाजा उनको पार्टी से निकाल दिया गया. लेकिन 2014 में अमर सिंह को एक बार फिर समाजवादी पार्टी में शामिल कर लिया गया था. पिछले छह वर्षों में बहुत कुछ बदल गया है. अमर सिंह उन दिनों नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलेआम बयान देते थे, उनके विरोधी थे. लेकिन इस बार आमतौर पर माना जाता था कि उनके रिश्ते सुधर चुके हैं.

अमर सिंह की राजनीति को दिल्ली की सत्ता के गलियारों की बहुत ही दिलचस्प राजनीति माना जाता है. एक समय था जब वे मुलायम सिंह यादव के बहुत करीब पंहुचने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रहे थे. बाद में वे उनके सबसे भरोसेमंद साथी बन गए. अमर सिंह को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी से निकाल दिया था. जानकारों को पता है कि उस समय भी मुलायम सिंह, अमर सिंह को पार्टी से निकालना नहीं चाहते थे. लेकिन माहौल ऐसा बना कि उनके लिए अमर सिंह को पार्टी में रख पाना मुश्किल हो गया.

मुझे अमर सिंह के निष्कासन के दौरान दिल्ली में समाजवादी पार्टी की राजनीति में हो रहे घटनाक्रम को बहुत करीब से देखने का अवसर मिला था. समाजवादी पार्टी के महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव ने तय कर रखा था कि अमर सिंह को पार्टी से निकालना है. दूसरी ओर, उनके बड़े भाई और पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी तय कर रखा था कि अमर सिंह को किसी कीमत पर पार्टी से नहीं निकालेंगे. जिन लोगों के ज़रिये राम गोपाल दबाव डलवा रहे थे, उनसे मुलायम सिंह यादव ने साफ़ कह दिया था कि अपना वक़्त देख कर चलना चाहिए और राम गोपाल को समझा दो कि जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए. लेकिन जब जनेश्वर मिश्र से कहलवा दिया गया तो मुलायम सिंह यादव के सामने कोई रास्ता नहीं बचा और अमर सिंह समाजवादी पार्टी से निकाल दिए गए. सावधानी इतनी बरती गई थी कि मीडिया को भी भनक नहीं लगी थी. केवल एक पत्रकार को विश्वास के लायक माना गया और देश के एक सबसे बड़े हिंदी अखबार के समाजवादी पार्टी  बीट के संवाददाता को उस दिन अमर सिंह के निष्कासन की जानकारी दी गई. डर यह था कि मीडिया में रसूख के चलते खबर के प्रकाशित होने के पहले ही अमर सिंह को पता चल जाएगा और वे मुलायम सिंह से बात करके बाज़ी पलट सकते थे.दिल्ली की राजनीति एक ऐसा अखाड़ा है जहां सामने से तो हमला होता ही है, पर मुकम्मल हार अपने साथियों के अंदर से होने वाले ज़बर्दस्त हमलों से होती है. अमर सिंह के साथ भी वही हुआ. इस बात में दो राय नहीं है कि अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव की पार्टी को देश के अन्य राज्यों में भी फैलाया था. अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी मौजूदगी दिलवाई थी. उनकी पार्टी राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय रहती थी. दिल्ली की राजनीति के जानकार जानते हैं कि अमर सिंह राष्ट्रीय राजनीति में खासी पैठ रखने वाले नेता रहे. वे बड़े-बड़े दुश्मनों को भी एकता के सूत्र में पिरो देते थे.

अमर सिंह के संबंध दुनिया भर के लोगों से था. जिसको उन्होंने साथ लिया अपनी तरफ से कभी उसको दुत्कारा नहीं. अपने करीबियों की शादी गमी में भी खड़े रहते थे. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)
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First published: August 4, 2020, 1:47 PM IST
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