मोबाइल-फ्री स्कूलों की राह पर क्यों आगे बढ़ना चाहता है ब्रिटेन?

ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री ने यह कहते हुए पूरी बहस को एक नया मोड़ भी दिया है कि स्कूलों में मोबाइल फोन साइबर क्राइम को बढ़ावा देने वाले केंद्र बन रहे हैं, जहां पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन के जरिए स्कूल में पढ़ने वाली बड़ी उम्र की लड़कियों के यौन उत्पीड़न और उनके साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार के प्रकरण सामने आए हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: July 21, 2021, 3:06 PM IST
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मोबाइल-फ्री स्कूलों की राह पर क्यों आगे बढ़ना चाहता है ब्रिटेन?
ब्रिटेन में कक्षाओं के भीतर बिगड़ते अनुशासन पर शिकंजा कसने और बच्चों के व्यवहार को सुधारने के लिए वहां की सरकार अब मोबाइल फोन के प्रयोग पर पाबंदी की तैयारी कर रही है. हालांकि, ब्रिटेन में सरकार के इस मंसूबे के खिलाफ वहां के कई शिक्षा संगठन अपना विरोध जता रहे हैं और शिक्षा मंत्री गेविन विलियमसन (Gavin Williamson) को घेरते हुए यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार कोविड-19 की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रही है.

दूसरी तरफ, शिक्षा मंत्री गेविन विलियमसन का कहना है कि वह कक्षाओं के भीतर मोबाइल फोन पर प्रतिबंध चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने स्कूली बच्चों के व्यवहार को सुधारने और उन्हें अनुशासित बनाने के लिए एक परामर्श (consultation) मुहिम शुरू की है. गेविन विलियमसन ने यह भी कहा कि सरकार के इस कदम से ब्रिटेन के स्कूलों को 'मोबाइल मुक्त' बनाने की दिशा में मदद मिलेगी. मोबाइल का प्रयोग बंद करने से कक्षाओं में बच्चे पढ़ाई के प्रति ज्यादा एकाग्र रहेंगे और साथ ही पढ़ाई के दौरान बच्चे कोविड-19 की महामारी से जुड़ी सूचनाओं या अफवाहों के प्रभावों से भी दूर रह सकेंगे.

गेविन विलियमसन कहते हैं, "मोबाइल फोन से न सिर्फ बच्चों का ध्यान भंग होता है, बल्कि जब बच्चे इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल या दुरूपयोग करते हैं तो इससे बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ता है. इसके अलावा बच्चों को दूसरे हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए भी उन्हें मोबाइल फोन से दूर रखना होगा."


जाहिर है कि ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री सरकार द्वारा भविष्य में उठाए जाने वाले इस महत्त्वपूर्ण निर्णय को स्कूली बच्चों की भलाई से जोड़कर पेश कर रहे हैं. इसलिए, वह आगे अपनी योजना को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह बात भी कहते हैं, "मैं यह सब (मोबाइल आधारित शैक्षणिक गतिविधियां) खत्म करना चाहता हूं और चाहता हूं कि ब्रिटेन के स्कूल मोबाइल-फ्री बनें."
सरकार की राय से असहमत है शिक्षा संगठन
वहीं, ब्रिटेन में कई स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षा संगठन वहां के शिक्षा मंत्री की राय से अपनी असहमति जता रहे हैं. इनका मानना है कि मोबाइल फोन के प्रयोग से जुड़ी गतिविधियों को कराने या नहीं कराने का निर्णय दरअसल स्कूल प्रबंधन की नीतियों से जुड़ा मामला है और सरकार को इसमें जबर्दस्ती करने से बचना चाहिए. कई शिक्षा संगठन तो वहां के शिक्षा मंत्री को शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति न करने की सलाह भी दे रहे हैं और इस मुद्दे पर गेविन विलियमसन के बयानों को कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूली शिक्षा पर सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने के रुप में देख रहे हैं.

लेकिन, गेविन विलियमसन इस साल के अंत तक ही अपनी योजनाओं को साकार करना चाहते हैं और इसलिए वह स्कूलों में बच्चों के व्यवहार (behaviour), अनुशासन (discipline), निलंबन (suspension) और स्थायी बहिष्करण (permanent  exclusion) पर सरकार की गाइडलाइन को अपडेट करने से पहले सारी औपचरिकताएं पूरी करना चाहते हैं. लिहाजा, उन्होंने इस मुद्दे पर शिक्षक, अभिभावक और स्कूल के अन्य कर्मचारियों के साथ स्कूल में अच्छे व्यवहार के प्रबंधन विषय पर उनके विचार लेने शुरू भी कर दिए हैं, ताकि इस संबंध में नीति बनाते समय यह सुनिश्चित हो सके कि सरकार ने हर वर्ग के विचारों को तवज्जो दी है.इसी कड़ी में पिछली जून महीने के आखिरी सप्ताह में गेविन विलियमसन ने कहा कि कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को ऐसे स्कूल नहीं भेजना चाहेगा, जहां बच्चा खराब व्यवहार सीखे. हर स्कूल इतना सुरक्षित स्थान होना चाहिए जो युवा हो रहे बच्चों को आगे बढ़ने और उसके अनुरूप शिक्षकों को अपनी उत्कृष्टता साबित करने का अवसर दे.

योजना को लेकर शिक्षा मंत्री का तर्क
ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री अपनी योजना को लागू करने से पहले उसके पक्ष में तर्क रखते हुए कहते हैं, "सभी बच्चों को महामारी की चुनौतियों से उबरने और उनके लिए अवसर बढ़ाने में मदद के लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अनुशासित तरीके से चलने वाली कक्षाओं से लाभान्वित हो सकें, इसके लिए ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जो बच्चों को लाभान्वित करने में उनकी मदद कर सके.

दूसरी तरफ, ब्रिटेन में 'एसोसिएशन ऑफ स्कूल एंड कॉलेज एसोसिएशन' के जनरल सेकेट्री ज्योफ बार्टन (Geoff Barton) ने स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंध से जुड़ी बहस को लेकर शिक्षा मंत्री गेविन विलियमसन पर 'जुनून सवार' होने का तंज कसा है. वह कहते हैं, "हकीकत में हर स्कूल अपने कक्षाओं के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े नुकसान को लेकर जागरूक है और अपने हिसाब से पहले से ही एक मजबूत नीति का पालन कर रहा है, स्कूलों में 'डिजिटल फ्री फॉर ऑल' जैसी कोई बात नहीं है.


दरअसल, ब्रिटेन में स्कूल व कॉलेज संगठनों से जुड़े नेता चाहते हैं कि वहां के शिक्षा मंत्री महामारी के बाद उससे उबरने के लिए शिक्षा क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयासों के लिए सरकार से विशेष बजट मंजूर कराएं. वे चाहते हैं कि महामारी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की दिशा में सरकार द्वारा कुछ महत्त्वपूर्ण योजनाएं लागू हों. वे शिक्षा मंत्री और सरकार से अगले शैक्षणिक-सत्र में शिक्षण से जुड़े बुनियादी प्रश्नों को लेकर एक वैचारिक स्पष्टता की भी मांग कर रहे हैं.

एजुकेशन यूनियन इस योजना को बता रहे हैं नई समस्‍या
इस बारे में ब्रिटेन के 'द नेशनल एजुकेशन यूनियन' के ज्वाइंट सेक्रेटरी केविन कोर्टनी (kevin Courtney) कहते हैं, "मोबाइल फोन को लेकर बातें करना दरअसल जबरन की व्याकुलता जताना है. इसके लिए स्कूलों में सामान्यत: बहुत स्पष्ट नीतियां होती हैं और इस संबंध में किसी अन्य परामर्श की आवश्यकता नहीं दिखाई देती है."

वहीं, एजुकेशन यूनियन से जुड़े एक सीनियर पॉलिसी एडवाइजर सारा हन्नाफिन के मुताबिक, "मोबाइल फोन को सभी स्कूलों में एक साथ बैन कर देने वाली कोई एक नीति नहीं बनाई जानी चाहिए. इससे समाधान निकलने की बजाय हो सकता है कुछ नई समस्याएं पैदा हो जाएं."

उनका कहना है कि ज्यादातर स्कूलों की कक्षाओं में पहले से ही मोबाइल फोन के उपयोग को सीमित करने वाली नीतियां लागू हैं. लगभग आधे मिडिल और बड़ी संख्या में प्राइमरी स्कूल ब्रेक या लंच के समय में भी बच्चों को मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं, लेकिन इस तरह के नियम और प्रतिबंधों को हमेशा के लिए भी लागू नहीं कराया जा सकता है.

शिक्षा मंत्री ने बहस को दिया नया मोड़
वहीं, ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री ने यह कहते हुए पूरी बहस को एक नया मोड़ भी दिया है कि स्कूलों में मोबाइल फोन साइबर क्राइम को बढ़ावा देने वाले केंद्र बन रहे हैं, जहां पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन के जरिए स्कूल में पढ़ने वाली बड़ी उम्र की लड़कियों के यौन उत्पीड़न और उनके साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार के प्रकरण सामने आए हैं.

इस बारे में ओफ्स्टेड (Ofsted) के चीफ इंस्पेक्टर अमांडा स्पीलमैन (Amanda Spielman) यह मानते हैं कि स्कूलों में मोबाइल की उपयुक्तता और उपलब्धता को लेकर एक व्यापक चर्चा होनी चाहिए. वह कहते हैं, "हमने पाया कि आरोपी अक्सर नग्नता साझा करके उत्पीड़न और दुर्व्यवहार को बढ़ावा दे रहे थे." हालांकि, वह यह बात भी स्वीकार करते हैं कि स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने से स्कूलों के बाहर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के प्रकरण बंद नहीं हो जाएंगे."


ओफ्स्टेड ने इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उन्होंने स्कूलों में यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और हिंसा से निपटने के लिए अपनी निरीक्षण पुस्तिका को अपडेट किया है. इस दौरान उन्होंने यह पाया कि कई प्रकरण ऐसे थे, जिनमें बच्चे यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और हिंसा से परेशान नहीं दिखे और वे इस तरह के गलत व्यवहार से जुड़ी बातों के आदी बन चुके हैं.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
शिरीष खरे

शिरीष खरेलेखक व पत्रकार

2002 में जनसंचार में स्नातक की डिग्री लेने के बाद पिछले अठारह वर्षों से ग्रामीण पत्रकारिता में सक्रिय. भारतीय प्रेस परिषद सहित पत्रकारिता से सबंधित अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित. देश के सात राज्यों से एक हजार से ज्यादा स्टोरीज और सफरनामे. खोजी पत्रकारिता पर 'तहकीकात' और प्राथमिक शिक्षा पर 'उम्मीद की पाठशाला' पुस्तकें प्रकाशित.

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First published: July 21, 2021, 3:06 PM IST
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