धोनी, एक सक्षम समर्थ का संन्यास

विलक्षण धैर्य धारी होने के कारण धोनी को मिस्टर कूल की उपाधि देना सही है. लेकिन धोनी को सिर्फ इतनेभर से परिभाषित नहीं किया जा सकता. माही क्रिकेट के गणित में भी पारंगत हैं. धोनी के इस गुण से टीम इंडिया ने हमेशा कठिन से कठिन सवाल हल किए. उनकी परख या जजमेंट का क्या कहना.

Source: News18Hindi Last updated on: August 16, 2020, 6:34 PM IST
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धोनी, एक सक्षम समर्थ का संन्यास
धोनी के संन्यास के बाद टीम इंडिया अगले महीने अपनी पहली सीरीज खेलेगी. सोमवार को ही ऑस्‍ट्रेलिया दौरे के लिए चयन समिति ने धोनी के बिना वाली 32 सदस्‍यीय भारतीय दल का ऐलान किया. टीम ऐलान के बाद बीसीसीआई ने धोनी को सलाम किया.
धोनी ने संन्यास का ऐलान कर दिया. अभी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई ली है. आईपीएल खेलते रहेंगे. आइपीएल की हैसियत विश्व क्रिकेट से कम नहीं है. यानी माही के प्रशंसकों को मायूस नहीं होना चाहिए. बहरहाल, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास की घटना के बाद एक रस्म के तौर पर धोनी के गुणों को याद जरूर किया जाना चाहिए.

मिस्टर कूल कहना काफी नहीं
विलक्षण धैर्य धारी होने के कारण धोनी को मिस्टर कूल की उपाधि देना सही है. लेकिन धोनी को सिर्फ इतनेभर से परिभाषित नहीं किया जा सकता. माही क्रिकेट के गणित में भी पारंगत हैं. धोनी के इस गुण से टीम इंडिया ने हमेशा कठिन से कठिन सवाल हल किए. उनकी परख या जजमेंट का क्या कहना. इतना ही नहीं, धोनी के नेतृत्व में जो भी खेल चुका है उसने यह भी जरूर सीखा होगा कि मुश्किल हालात में हौसला और हिम्मत कैसे बनाए रखी जाती है. यानी सिर्फ धैर्य और मेहनत ही काम नहीं आती बल्कि समझ भी बहुत बड़ी चीज़ है.

संन्यास का यह मौका
महामारी के मौजूदा दौर में ठप पड़े खेलों के बीच संन्यास की घोषणा सुनने में अजीब लग सकती है. लेकिन हर खिलाड़ी को एक न एक दिन ठहर ही जाना पड़ता है. काया की एक सीमा है. जो नहीं मानता, काया उसे मजबूर कर देती है. क्रिकेट के महान ज्ञानवाल धोनी की तारीफ की जानी चाहिए कि कई दूसरों की तरह उन्होंने इस हकीकत से आंखें नहीं मूंदे रखीं. और उससे भी ज़्यादा गौरतलब बात ये कि ऐसे समय उन्होंने संन्यास का फैसला किया जब उनके आलोचक उनकी फिटनेस पर बुदबुदा तक नहीं पा रहे थे. उनतालीस की उम्र तक विकेट कीपिंग में फुर्ती हो और चाहे विकेटों के बीच दौड़, धोनी नवयुवक ही दिख रहे हैं. इस बात को सही साबित करने का उनके पास आगे आईपीएल में भी मौका है.

अब कैसी दिखेगी आईपीएल मैच में एंट्री
धोनी दुनिया के उन खिलाड़ियों में है जिनके पिच पर पहुंचने के पहले ही दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं. बहुत संभव है कि अब जब आईपीएल में धोनी मैदान पर आएंगे तो दर्शकों में पहले से भी ज्यादा कौतूहल होगा. उनतालीस की उम्र के इस ढलान पर नवयुवकाई की चुस्ती फुर्ती किसे नहीं मुदित कर देगी. गुणवान व्यक्ति को देखकर जो हर्ष का भाव आता है उसे मुदित होना कहते हैं. इसीलिए मैदान के बाहर भी धोनी को देख मुदित होते हैं.फिर भी छूट नहीं पाएगी क्रिकेट की दुनिया
लगता है कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य लिए एक अपूर्व कोच तैयार है. कोच यानी ज्ञानी शिक्षक, खुद करके बताना वाला प्रशिक्षक और अपने शिष्यों से मैत्रीभाव रखने में सक्षम. और हैसियत में इतना ऊंचा कि कैसा भी प्रशासक उसे दबिश में न ले सके. धोनी सर्वगुण संपन्न सिद्ध हैं. बस अंदेशा एक ही है कि कहीं दुनिया का कोई और देश उन्हें चुरा न ले जाए.

संन्यास पर भी ज्यादा नहीं कहा धोनी ने
क्रिकेट जीवन के चरमोत्कर्ष के क्षणों मे भी धोनी ने ज्यादा कभी नहीं बोला. मितभाषी धोनी ने अपने संन्यास का ऐलान भी सीमित शब्दों में किया और साथ में मुकेश का गाया गाना लगाया, मैं पल दो पल का शायर हूं. यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद धोनी की आगे की योजना आनी बाकी है. इस मामले में भी वे जल्दी में नहीं है. वैसे हाल फिलहाल व्यस्त रहने के लिए उनके पास आईपीएल है ही. फिर भी उनके पास योजना होगी जरूर, नहीं होगी तो बना रहे होंगे.

उनका क्या करना अच्छा होगा देश के लिए
अगर उन्हें कोई देश पटा कर न ले जा पाए और अपने देश में उन्हें कोई औपचरिक भूमिका न मिल पाए तो सबसे अच्छा यही होगा कि वे देश के नवोदित खिलाड़ियों के स्वंभू कोच बन जाएं. इस समय भी क्रिकेट की दुनिया वे जिस तरह के ब्रांड हैं, उन्हें देश भर में क्रिकेट की नरसरियां खोलने में बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आएगी. उनके पास क्रिकेट की जो कारीगरी है वे उसे युवाओं को सिखाने के काम पर लग सकते हैं. वैसे भी धोनी ने अपने क्रिकेट जीवन में जो धन और यश हासिल कर लिया है वह किसी की भी चाहत के लिए काफी माना जा सकता है. अब उनके सामने दुनिया को वापस देने का मौका है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
सुधीर जैन

सुधीर जैन

अपराधशास्त्र और न्यायालिक विज्ञान में उच्च शिक्षा हासिल की. सागर विश्वविद्यालय में पढाया भी. उत्तर भारत के 9 प्रदेश की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों पर विशेष शोध किया. मन पत्रकारिता में रम गया तो 27 साल 'जनसत्ता' के संपादकीय विभाग में काम किया. समाज की मूल जरूरतों को समझने के लिए सीएसई की नेशनल फैलोशिप पर चंदेलकालीन तालाबों के जलविज्ञान का शोध अध्ययन भी किया.देश की पहली हिन्दी वीडियो 'कालचक्र' मैगज़ीन के संस्थापक निदेशक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस और सीबीआई एकेडमी के अतिथि व्याख्याता, विभिन्न विषयों पर टीवी पैनल डिबेट. विज्ञान का इतिहास, वैज्ञानिक शोधपद्धति, अकादमिक पत्रकारिता और चुनाव यांत्रिकी में विशेष रुचि.

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First published: August 16, 2020, 6:34 PM IST
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