चौंका रहा है दैनिक वैश्विक कोरोना संक्रमण का आंकड़ा, हालत को अभी काबू में मानना ठीक नहीं

Coronavirus Cases updates: पूरी दुनिया की यह स्थिति है कि उसका एकमुश्त आंकड़ा लगातार बढ़त पर है और दस महीने बाद भी पहली लहर खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. ऐसे में हमें यह याद रखना चाहिए कि इतना लंबा अरसा गुज़रने के बावजूद अपने देश में भी अभी पहली लहर खत्म नहीं हुई है.

Source: News18Hindi Last updated on: October 31, 2020, 7:20 PM IST
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चौंका रहा है दैनिक वैश्विक कोरोना संक्रमण का आंकड़ा, हालत को अभी काबू में मानना ठीक नहीं
कोरोना बाकायदा घोषित रूप से वैश्विक महामारी है. यह समस्या किसी एक दो महाद्वीप या दो चार देशों की नहीं है बल्कि सभी महाद्वीपों के कोई दो सौ देशों में फैल चुकी है.
पूरी दुनिया के लिए शनिवार की सुबह यह खबर सबसे सनसनीखेज मानी जानी चाहिए थी. खबर ये कि शुक्रवार को 24 घंटों के दौरान दुनिया में कोरोना के मरीज एकदम से पांच लाख 73 हजार 616 बढ़ गए. वैसे चिंता तो गुरुवार को ही हो जानी चाहिए थी जब 24 घंटे में पांच लाख 48 हजार कोरोना मरीज़ बढे थे. यानी शनिवार को अचानक इतनी बढोतरी पर विश्व मीडिया को चौंक जाना चाहिए था. बेशक दुनिया को इस महामारी से जूझते हुए दस महीने हो गए हैं, लेकिन एक ही दिन में पौने छह लाख कोरोना मरीज बढ़ जाने को रोजमर्रा की घटना मान लेना ठीक नहीं है.

भूलें नहीं, घोषित महामारी है कोविड

कोरोना बाकायदा घोषित रूप से वैश्विक महामारी है. यह समस्या किसी एक दो महाद्वीप या दो चार देशों की नहीं है बल्कि सभी महाद्वीपों के कोई दो सौ देशों में फैल चुकी है. यानी किसी भी देश के लिए इस संकट को सिर्फ अपने देश तक सीमित नज़रिए से देखना समझदारी नहीं है. वैसे भी विशेषज्ञ जगत में यह मान लिया गया है कि जब तक सब सुरक्षित नहीं है तब तक कोई सुरक्षित नहीं है.

अमेरिका की हालत को बड़े गौर से देखना होगा
अब तक यही देखते आए हैं कि संक्रमितों की संख्या के मामले में सबसे ज्यादा खराब हालत वाले पांच देशों में अमेरिका कई महीनों से सबसे उपर है. लेकिन शनिवार को तो अमेरिका में एक दिन में ही संक्रमितों के बढ़ने का आंकड़ा एक लाख पार कर गया. इसके पहले एक दिन में सबसे ज्यादा संक्रमितों का विश्व रिकॉर्ड अपने देश भारत का था. वह 11 सितंबर 2020 का वह दिन था जब भारत में एक दिन में 97 हजार 654 संक्रमित बढ़ गए थे और दुनिया में सनसनी फैल गई थी. लेकिन शनिवार को अमेरिका में एक लाख एक हजार 461 संक्रमितों के आंकड़े ने उस रिकॉर्ड को भी पार कर दिया है. वैश्विक महामारी की मौजूदा हालत पर अगर अभी भी पर्याप्त चिंता नहीं जताई जाएगी तो इससे निपटने के तरीकों पर आगे सोचेंगे कब?

यूरोप के देश पहले से भी ज्यादा मुसीबत में
दुनिया के हर छोटे बड़े देश को इस समय यूरोप के देशों की मौजूदा हालत को गौर से देखने की जरूरत है. शुरुआती दौर में फ्रांस, ब्रिटेन, इटली जैसे इन देशों में कोरोना से अफरातफरी मच गई थी. बेशक जल्द ही वहां कोरोना की पहली लहर किसी तरह नीचे आ गई थी. लेकिन उसके बाद उपायों में ढील दी गई और दूसरी लहर उससे भी ऊंची आई. लगभग यही स्थिति उत्तरी अमेरिकी देशों खासतौर पर अमेरिका की है. अमेरिका में तीसरी लहर का भयावह दौर है और नई लहर दूसरी से भी ऊंची निकल गई है. लेकिन दुनिया में कोरोना को लेकर पहले और अब के माहौल में अगर कोई फर्क दिख रहा है तो बस इतना कि और भी ज्यादा बदतर हो रहे हालात पर चिंता कम जताई जा रही है.अपनी हालत को अभी काबू में मानना ठीक नहीं
इस समय हमें यह मानने में संकोच नहीं होना चाहिए कि हम शुरू से ही ज्यादा चिंता करने से बचते रहे हैं. बस 22 जुलाई को जब देश में अचानक एक दिन में संक्रमितों का आंकड़ा 45 हजार 599 बढ़ा था तब जरूर कुछ ज्यादा चिंता जताई गई थी. उसके बाद संक्रमण को थामने के उपाय भी बढ़ाए गए थे. उसके बाद भले ही धीमी रफ़्तार से बढ़ा हो लेकिन संक्रमण बढ़ता ही रहा है. इधर डेढ महीने से संक्रमण बढ़ने की रफ़्तार तो कुछ कम हुई है लेकिन यह आंकड़ा अपने सामने रखना चाहिए कि 31 अक्तूबर की सुबह पिछले 24 घंटों का जो आंकड़ा जारी हुआ है वह तीन महीने पहले के आंकड़े, 45 हजार 499 से अभी भी ज्यादा यानी 48 हजार 120 है. यानी देश में निश्चिंतता का माहौेल बनाने से हमें परहेज़ करने की जरूरत है.

हम पहली लहर भी पार नहीं कर पाए
पूरी दुनिया की यह स्थिति है कि उसका एकमुश्त आंकड़ा लगातार बढ़त पर है और दस महीने बाद भी पहली लहर खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. ऐसे में हमें यह याद रखना चाहिए कि इतना लंबा अरसा गुज़रने के बावजूद अपने देश में भी अभी पहली लहर खत्म नहीं हुई है. जबकि कोरोना ने यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी देशों के जरिए अपनी प्रवृत्ति उजागर कर दी है कि दूसरी और तीसरी लहर पहले से भी ज्यादा उंची आती है. अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली जैसे देश के मौजूदा हालात इस बात की मिसाल हैं.
वैश्विक एकजुटता का समय

जिन भी देशों को यह समझ में आ गया हो कि वे अकेले ही कोरोना से नहीं निपट पा रहे हैं उन्हें अब वैश्विक एकजुटता की कोशिशें शुरू कर देनी चाहिए ताकि बड़े स्तर पर कोई अभियान बना सकें. और कुछ न पाए तो कम से कम विश्व स्वास्थ्य संस्था डब्ल्यूएचओ को पहले से ज्यादा सतर्क, और ज्यादा शोधसक्षम बनाने की नई कोशिश तो हो ही सकती है.
ब्लॉगर के बारे में
सुधीर जैन

सुधीर जैन

अपराधशास्त्र और न्यायालिक विज्ञान में उच्च शिक्षा हासिल की. सागर विश्वविद्यालय में पढाया भी. उत्तर भारत के 9 प्रदेश की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों पर विशेष शोध किया. मन पत्रकारिता में रम गया तो 27 साल 'जनसत्ता' के संपादकीय विभाग में काम किया. समाज की मूल जरूरतों को समझने के लिए सीएसई की नेशनल फैलोशिप पर चंदेलकालीन तालाबों के जलविज्ञान का शोध अध्ययन भी किया.देश की पहली हिन्दी वीडियो 'कालचक्र' मैगज़ीन के संस्थापक निदेशक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस और सीबीआई एकेडमी के अतिथि व्याख्याता, विभिन्न विषयों पर टीवी पैनल डिबेट. विज्ञान का इतिहास, वैज्ञानिक शोधपद्धति, अकादमिक पत्रकारिता और चुनाव यांत्रिकी में विशेष रुचि.

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First published: October 31, 2020, 6:59 PM IST
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