सरकारी स्‍कूलों में बने शौचालयों पर CAG की सर्वे रिपोर्ट को देखने का नजरिया

कैग की रिपोर्ट (CAG Report) पर सवाल नहीं उठने चाहिए, लेकिन यह समझना भी होगा कि माजरा है क्‍या? आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 10.8 लाख सरकारी स्‍कूल (Government School) हैं. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र (Public Area) के केंद्रीय उद्यमों (Central enterprises) की सहायता से मात्र 1,40,997 शौचालयों (toilets) का निर्माण कराया गया था.

Source: News18Hindi Last updated on: September 29, 2020, 11:28 PM IST
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सरकारी स्‍कूलों में बने शौचालयों पर CAG की सर्वे रिपोर्ट को देखने का नजरिया
CAG सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 99 स्‍कूलों में किसी भी प्रकार का शौचालय नहीं है (सांकेतिक फोटो)
संसद के पटल पर रखी गई एक रिपोर्ट ने हंगामा मचा रखा है. विपक्ष को शायद ऐसा ही मुद्दा चाहिए था तो मीडिया में भी इसी तरह की खबरें इन दिनों सुर्खियां पाती हैं. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक- कैग (Comptroller and Auditor General- CAG) द्वारा संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट को पढ़ने के लिए शायद एक दूसरा चश्‍मा भी होना चाहिए. दरअसल कैग ने केंद्रीय लोक उपक्रमों (PSU) द्वारा स्‍कूलों में बनाए गए शौचालयों के ऑडिट के आंकड़ों को जाहिर किया है. इसमें पाया गया है कि करीब 11 प्रतिशत या तो अस्तित्‍व में नहीं हैं या फिर उनका आंशिक निर्माण हुआ है. वहीं तीस प्रतिशत में साफ-सफाई, पानी नहीं होने जैसे कारणों से उपयोग बाधित है. इसे मीडिया ने ऐसे ही जाहिर भी किया. विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खींचने की कोशिश की. भारत में ऑडिट रिपोर्ट को समझने, प्रेरित होने और उससे सीखने का वातवरण नहीं है, रिपोर्ट आते ही उसके नकारात्‍मक पक्षों को उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती. जबकि कोशिश, सकारात्‍मक माहौल बनाने की होनी चाहिए. जो काम बेहतर हुआ है उससे प्रेरित करने का माहौल होना चाहिए. जहां कमियां हैं, उनके कारणों को समझना और उसे दूर करना चाहिए.

बड़ी बात है कि कैग की रिपोर्ट (CAG Report) पर सवाल नहीं उठने चाहिए, लेकिन यह समझना भी होगा कि माजरा है क्‍या? आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 10.8 लाख सरकारी स्‍कूल (Government School) हैं. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र (Public Area) के केंद्रीय उद्यमों (Central enterprises) की सहायता से मात्र 1,40,997 शौचालयों (toilets) का निर्माण कराया गया था. कैग ने इनमें से नमूने के तौर पर केवल 2695 शौचालयों को सर्वे में शामिल किया. जो रिपोर्ट जाहिर हुई है, वह इन्‍हीं स्‍कूलों की स्थिति बयां करती है. संसद में पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘सर्वेक्षण के दौरान, लेखा परीक्षा में देखा गया कि 2,326 शौचालयों में से 1,812 शौचालयों में उचित रखरखाव/ स्वच्छता का अभाव था. वहीं 1,812 शौचालयों में से 715 शौचालय साफ नहीं किए गए थे. 1,097 शौचालय हफ्ते में दो बार से महीने में एक बार के बीच साफ किए जा रहे थे.’ मीडिया खबरों की माने तो कैग की प्रस्‍तुत रिपोर्ट में उल्‍लेख किया गया है कि सरकारी विद्यालयों में बनाए गए 70 प्रतिशत से अधिक शौचालयों में पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहीं 75 प्रतिशत शौचालयों में निर्धारित मानकों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है. कैग के अनुसार, शौचालयों में साबुन, बाल्टी, सफाई एजेंटों तथा कीटनाशकों की अनुपलब्धता तथा प्रवेश मार्ग की अपर्याप्त सफाई के मामले भी देखे गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’ के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यमों द्वारा पहचाने गए ऐसे कुल 83 शौचालय हैं, जिनका निर्माण अभी तक नहीं किया गया है. वहीं अन्य 200 शौचालयों का निर्माण तो पूरा हो गया है, किंतु वे अभी भी अस्तित्त्वहीन हैं, जबकि 86 शौचालय ऐसे हैं जिनका निर्माण केवल आंशिक रूप से किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 691 शौचालय ऐसे हैं, जिन्हें पानी की कमी, टूट-फूट या अन्य कारणों से उपयोग में नहीं लाया जा रहा है. 99 स्‍कूलों में किसी भी प्रकार का शौचालय नहीं है, जबकि 436 स्‍कूलों में केवल एक शौचालय है, जिसका अर्थ है कि 27 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिये अलग-अलग शौचालय उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है. वहीं 55 प्रतिशत में हाथ धोने की कोई सुविधा नहीं है.

15 राज्‍य, 2,048 स्‍कूलों के 2,695 शौचालयों का हुआ सर्वे
अब शिक्षा मंत्रालय और तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान की शुरुआत की थी ताकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के नियमों का पालन किया जा सके. इसमें लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने का मुख्‍य उद्देश्‍य था. इसी क्रम में अन्‍य मंत्रालयों से सहयोग मांगा गया था. इस पर मंत्रालयों के अपने अधीन आने वाले सीपीएसई को इस परियोजना में शामिल होने को कहा था. जानकारी के अनुसार, 53 सीपीएसई ने इस परियोजना में हिस्सा लिया और 1,40,997 शौचालयों के निर्माण किए गए. कैग ने कहा कि बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के अधीन आने वाले सीपीएसई ने पांच-पांच हजार शौचालय बनाए. इन उपक्रमों ने कुल मिलाकर 1,30,703 शौचालयों का निर्माण किया जिस पर 2,162.60 करोड़ रुपये खर्च आया. कैग ने एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एनएचपीसी, पीएफसी, आरईसी, ओएनजीसी और कोल इंडिया द्वारा निर्मित शौचालयों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की. साथ ही 15 राज्यों में 2,048 स्कूलों में निर्मित 2,695 शौचालयों का वहां जाकर सर्वे भी किया गया.
स्‍कूलों में क्‍यों होना चाहिए सुविधा व शौचालय
सितंबर 2014 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय जो अब शिक्षा मंत्रालय है, ने स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्‍य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के जनादेश को पूरा करना है. इसके अनुसार लड़कों और लड़कियों के लिए सभी स्‍कूलों में दो शौचालय अलग-अलग होने चाहिए. स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान में यह तय किया गया कि केंद्रीय उद्यम, स्‍वच्‍छ पानी और हाथ धोने की सुविधा के साथ शौचालयों को बनाएंगे और पांच सालों तक उनकी देखभाल करेंगे. शौचालय इसलिए जरूरी हैं क्‍योंकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में यह अनिवार्य किया गया है कि सभी स्‍टूडेंट्स को स्‍कूली दिनों में कम से कम छह घंटे स्‍कूल में ही बिताना होगा. इस लंबी अ‍वधि में स्‍कूलों में रूकना तभी संभव है जब वहां शौचालय व सुविधाएं हों. स्‍कूलों में पानी, स्‍वच्‍छ वातावरण और सुविधाएं होने से स्‍टूडेंट्स को बीमारियों से बचाया जा सकता है. स्‍कूलों में मिलने वाला मिड-डे मील खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत से कई बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है. हाथ धोने की आदत के कई फायदे हैं. कोरोना ( COVID-19) से बचाव में भी यह कारगर है. यह भी देखा गया है कि लड़कियों के स्‍कूल छोड़ने का बड़ा कारण शौचालय न होना, होता है. वहीं सुविधायुक्‍त अलग शौचालय होने से उस स्‍कूल में लड़कियों के नामां‍कन दर में काफी वृद्धि होती है.

आंकड़ों से समझें रिपोर्ट में क्‍या उल्‍लेखित हुआ53 सीपीएसई ने 1,30,703 शौचालयों का किया निर्माण, 2,162.60 करोड़ रुपये खर्च हुए
2,695 शौचालयों में से सीपीएसई ने 83 शौचालयों का निर्माण नहीं किया गया, लेकिन इन्‍हें निर्माण में दिखा दिया गया.
2,612 शौचालयों में से 200 शौचालय स्कूलों में नहीं मिले
86 शौचालय आंशिक रूप से निर्मित पाए गए
30 प्रतिशत शौचालय साफ-सफाई, पानी नहीं होने जैसे कारणों से उपयोग में नहीं
72 प्रतिशत में शौचालय के अंदर पानी की सुविधा नहीं थी
55 प्रतिशत में हाथ धोने की सुविधा नहीं थी
सर्वे में शामिल कुल शौचालयों में से नहीं बने और आंशिक रूप से निर्मित शौचालयों की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है
सर्वे में शामिल कुल 1,967 स्कूल ऐसे थे जिनमें लड़के-लड़कियां दोनों पढ़ते हैं. इनमें 99 स्कूलों में शौचालय चालू नहीं थे.
लड़कों और लड़कियों के लिए अलग शौचालय का लक्ष्य 535 स्कूलों में पूरा नहीं हुआ.

अभी भी ऐसे हालात क्‍यों हैं, कब हो सकेगी बुनियादी सुविधाएं
भारत के ग्रामीण इलाकों में से कई स्‍थानों में न तो स्‍कूली भवन हैं, न ही प्रशिक्षित शिक्षक. कहीं पेड़ के नीचे, कहीं पंचायत भवन में या फिर गांव में ही किसी के घर या आंगन में सरकारी स्‍कूल संचालित हो रहे हैं. शौचालय और उसमें स्‍वच्‍छ पानी की उपलब्‍धता कई जगह तो कराई गई है, लेकिन अभी भी कुछ स्‍थान पर ऐसी सुविधाएं कोसों दूर हैं. हाथ धोने का साबुन, कीटनाशक, सफाई के साधन और सफाई करने वाला कुछ स्‍कूलों के लिए दिवास्‍वप्‍न जैसे हैं. आजादी के बाद के सालों में हमारा ध्‍यान इस ओर जाना चाहिए था, हमें स्‍कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध कराने पर जोर देना था, लेकिन ऐसा हो न सका. अब जब स्‍कूलों में इस ओर ध्‍यान देना शुरू हुआ है तो हमें इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए नियमित निगरानी करनी होगी. स्‍कूलों में सुविधाओं के लिए तमाम पहलुओं सफाई, स्‍वच्‍छता प्रशिक्षण, शौचालयों के रखरखाव-देखभाल, कीटनाशक-साबुन की उपलब्‍धता आदि की जिम्‍मेदारी और धन की व्‍यवस्‍था आदि पर ध्‍यान रखना होगा.
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First published: September 29, 2020, 11:28 PM IST
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