जय अनुसंधान के मंत्र से बनेगा भविष्‍य का भारत

जय अनुसंधान का यही मंत्र भविष्‍य के भारत को निखारने और सुदृढ बनाने में कारगर होगा. भारतीयों के सामने चुनौतियां बड़ी और बढ़ी हुई जरूर हैं, लेकिन यही अवसर भी है कि हम दुनिया को दिखा सकें कि हममें विश्‍व गुरू बनने की क्षमता है.

Source: News18Hindi Last updated on: August 11, 2020, 4:28 PM IST
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जय अनुसंधान के मंत्र से बनेगा भविष्‍य का भारत
कोरोना काल में भी कई उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय जब ठान लेते हैं तो वह कर के दिखाते हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
पाकिस्‍तान से 1965 युद्ध के दौरान तत्‍कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने कालजयी नारा दिया था जय जवान-जय किसान. इसी नारे में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने जय विज्ञान शामिल कर दिया था. इसी क्रम में 106वीं भारतीय विज्ञान कॉन्ग्रेस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें ' जय अनुसंधान ' का एक सितारा और लगाया है. जय अनुसंधान का यही मंत्र भविष्‍य के भारत को निखारने और सुदृढ बनाने में कारगर होगा. भारतीयों के सामने चुनौतियां बड़ी और बढ़ी हुई जरूर हैं, लेकिन यही अवसर भी है कि हम दुनिया को दिखा सकें कि हममें विश्‍व गुरू बनने की क्षमता है. कोरोना काल में भी कई उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय जब ठान लेते हैं तो वह कर के दिखाते हैं. नए वेंटीलेटर्स और कोरोना (COVID-19) टेस्टिंग लैब्‍स का चरम गति से निर्माण करने में हमने कीर्तिमान बनाए हैं.

अनुसंधान की बात करते हैं तो याद आते हैं, भारतीय वैज्ञानिक सर सीवी रमन. इन्‍हें 1930 में नोबेल पुरस्‍कार मिला था. इसके बाद अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय नोबेल पुरस्‍कार तो हासिल नहीं कर पाए लेकिन उन्‍होंने कई बार दुनिया को हैरान जरूर किया. कई अनुसंधान में सहयोगी वैज्ञानिक बन कर वे दुनिया के सामने आए हैं. अब स्थितियां बदली हैं. सरकार के सहयोग और प्रोत्‍साहन से कई वैज्ञानिक और अनुंसधान कर्ता देश लौट रहे हैं. अब ब्रेन ड्रेन की स्थिति ब्रेन गेन में बदल रही है. सरकारी और गैर सरकारी विश्‍वविद्यालयों और संस्‍थानों में कई प्रकार शोध-अनुसंधान हो रहे हैं.

योजना से सृजनात्‍मक कार्य करते संस्‍थान
अनुसंधान और विकास यानी ज्ञान के भंडार को बढ़ाने का योजनापूर्ण तरीका जिससे सृजनात्‍मक कार्य हों. यूनेस्‍को भी इसी परिभाषा को मान्‍यता देता है. रिसर्च एंड डेवलपमेंट का यह विषय मानव जाति उसके ज्ञान-संस्‍कृति और समाज से जुड़ा हुआ है. इसके जरिए नए प्रयोग-अनुप्रयोग (Applications) को विकसित करना ही अनुसंधान और विकास का लक्ष्‍य है. इसमें तीन गतिविधियां होती हैं. पहली, आधार अनुसंधान (Basic Research), दूसरी, अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान (Applied Research) और तीसरी प्रायोगिक विकास (Experimental Development). देश निर्माण, संस्‍थानों से ही संभव है. ऐसे में दो भारतीय संस्थान का ही उदाहरण लें जिनका योगदान बेमिसाल है. सीएसआईआर, की स्थापना वर्ष 1942 में एक स्वायत्त संस्था के रूप में हुई. सीएसआईआर, 37 अत्याधुनिक संस्थान का ऐसा समूह है, जिसकी गिनती विश्व के अग्रणी वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान संगठनों में होती है. अत्याधुनिक अवसंरचनात्मक सुविधाओं एवं वैज्ञानिक तथा तकनीकी कार्मिक-शक्ति के साथ सीएसआईआर वास्तव में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के सभी क्षेत्रों जैसे कि वांतरिक्ष (Aerospace) से समुद्री अन्वेषण, माइक्रो–इलेक्ट्रॉनिक्स से संरचनात्मक और पर्यावरणीय अभियांत्रिकी, स्मार्ट मेटीरियल से मेकाट्रॉनिक्स, पेट्रोरसायन से संश्लेषित जीवविज्ञान तथा रोबोटिक्स और माइक्रो मशीन से औषधीय तथा कृषिरसायन तक, में कार्यरत है. वहीं, सीएसआईआर, केंद्रीय विद्युत रसायन अनुसंधान संस्थान की 25 जुलाई 1948 कारैकुडी (तमिलनाडु) में स्थापना की गई. 14 जनवरी 1953 को इसे देश की 12 वीं राष्‍ट्रीय प्रयोगशाला घोषित किया गया. यह संस्थान दक्षिण एशिया में विद्युत रसायन अनुसंधान का एक विख्यात एवं बड़ा अनुसंधान संस्थान है. 750 पेटेंट, 250 प्रोसेस, 600 प्रायोजित तथा अनुदान प्राप्त परियोजनाएं, 450 लाइसेंस, 5500 अनुसंधान एवं समीक्षात्मक लेख के साथ यह संस्थान अग्रणी है. वहीं, नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआरडीसी) भारत में विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत एक संस्था है जिसकी स्थापना 1953 में हुई थी. इसका उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) संस्थाओं / विश्वविद्यालयों में खोजी जाने वाली प्रौद्योगिकियों, विधियों, आविष्कारों, पेटेंटों, प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना, विकास करना और उन्हें व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध कराना है. अनुसंधान के क्षेत्र में CSIR, DRDO, ICAR, ISRO, ICMR, C-DAC, NDRI, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे कई विख्यात संस्थान भारत में हैं. सरकार के सहयोग से हुए वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष अनुसंधान, विनिर्माण, जैव-ऊर्जा, जल-तकनीक, और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश और विकास हुआ है. हम धीरे-धीरे परमाणु प्रौद्योगिकी में भी आत्मनिर्भर हो रहे हैं.
अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां
विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति भारत में है. वैश्विक अनुसंधान एवं विकास खर्च में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है. इंडियन साइंस एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडस्ट्री रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में शीर्ष रैंकिंग वाले देशों में शामिल है. नैनो तकनीक पर शोध के मामले में भारत दुनियाभर में तीसरे स्थान पर है. मौसम पूर्वानुमान एवं निगरानी के लिये प्रत्युष नामक शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बनाकर भारत इस क्षेत्र में जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के बाद चौथा प्रमुख देश बन गया है. भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों में सातवें स्थान पर है. वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में हम 57वें स्थान पर हैं.

भारत के समक्ष चुनौतियां और नयी पहल दक्षिण एशिया में अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में चीन और जापान, दुनिया को टक्‍कर दे रहे हैं. एक मीडिया रिपोर्ट की माने तो वैज्ञानिक प्रतिस्‍पर्धा के दौर में भारत शोध कार्य करने में पीछे हो गया है. कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में उपलब्धियों को छोड़ दें तो वैश्विक संदर्भ में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास तथा अनुसंधान की स्थिति को और बेहतर करना चाहिए. कुछ तथ्यों पर गौर करना ज़रूरी है, जैसे- भारत विश्व में वैज्ञानिक प्रतिद्वंद्विता के नजरिए से कहां है? हालांकि भारत में नयी पहलों से नया वातावरण बन रहा है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने दूरदर्शन और प्रसार भारती के साथ मिलकर विज्ञान संचार के क्षेत्र में डीडी साइंस और इंडिया साइंस नाम की दो नई पहलों की भी शुरुआत की है. विदेशों में एक्सपोज़र और प्रशिक्षण प्राप्त करने के उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिये ओवरसीज विजिटिंग डॉक्टोरल फेलोशिप प्रोग्राम चलाया जा रहा है. आम जन के बीच भारतीय शोधों के बारे में जानकारी देने और उनका प्रसार करने के लिये अवसर-AWSAR (ऑगमेंटिंग राइटिंग स्किल्स फॉर आर्टिकुलेटिंग रिसर्च) स्कीम जैसी योजनाएं हैं. वाहनों के प्रदूषण से निपटने के लिये वायु-WAYU (Wind Augmentation & Purifying Unit) डिवाइस लगाए जा रहे हैं. इंटर-डिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS) और द ग्लोबल कूलिंग प्राइज शामिल किए गए हैं. भारतीय और आसियान शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों के बीच नेटवर्क बनाने के उद्देश्य से आसियान-भारत इनोटेक शिखर सम्मेलन का आयोजन हुए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI), डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और स्वच्छ विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत और ब्रिटेन मिलकर काम कर रहे हैं. इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने ‘टेक्नोलॉजी विज़न 2035’ रूपरेखा भी तैयार की है. इसमें शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य, खाद्य और कृषि, जल, ऊर्जा, पर्यावरण इत्यादि जैसे 12 विभिन्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
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First published: August 11, 2020, 4:28 PM IST
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