IPL 2020: MS धोनी का यूं रनआउट होना उनके 'बीस से उन्नीस' हो जाने की कहानी है...

महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) जिस तरीके से राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ रन आउट हुए, वह इस बात का ऐलान है कि उनमें खेलने की स्वाभाविक भूख नहीं बची है. वे बस प्रोफेशनल खिलाड़ी होने के नाते जी-जान से कोशिश करते हैं कि उनकी टीम जीते. आईपीएल 2020 में चेन्नई सुपरकिंग्स के खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह भी यही है.

Source: News18Hindi Last updated on: October 20, 2020, 6:09 AM IST
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IPL 2020: MS धोनी का यूं रनआउट होना उनके 'बीस से उन्नीस' हो जाने की कहानी है...
एमएस धोनी ने राजस्थान के खिलाफ 28 गेंद पर 28 रन बनाए.
नई दिल्ली. अब उनकी छुई चीज सोना नहीं होती, फैसले चौंकाते नहीं, क्रीज पर रहना जीत की गारंटी नहीं... और इन सबसे बढ़कर अब वो कूल नहीं. जी बात हो रही है महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) की, जो आज की तारीख में भारत के सबसे चहेते क्रिकेटर हैं. लेकिन 2020 तो बदलाव का साल है. खिलाड़ी के जीवन में भी ऐसी तारीखें आती हैं, जब उसका खेल शवाब पर होता है और फिर एक दिन वह अपना साया भी नहीं रह जाता. एमएस धोनी के जीवन की वह दूसरी तारीख आ चुकी है. उनका खेल अब बिलकुल भी उम्मीद नहीं जगाता. माही के कट्टर प्रशंसक भी अब उनकी तरह दूसरों की गलतियों का इंतजार करते हैं, जिसका फायदा उठाकर वे कुछ रन बना लें या रन आउट कर लें.

रन आउट पर आते हैं. एमएस धोनी (MS Dhoni) सोमवार को जिस तरीके से राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ रन आउट हुए, वह इस बात का ऐलान था कि अब उनमें खेलने की स्वाभाविक भूख नहीं बची. हां, प्रोफेशनल खिलाड़ी होने के नाते वे जी-जान से यह कोशिश करते हैं कि उनकी टीम जीते. आईपीएल 2020 (IPL 2020) में चेन्नई सुपरकिंग्स (Chennai Super Kings) के खराब प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह भी धोनी की अप्रोच ही रही है. वरना, यह वही टीम है, जिसने पिछले साल फाइनल खेला था. अगर टीम से सुरेश रैना गए हैं, तो सैम करन मिले भी हैं. लेकिन इस बार कप्तान खुद बेरंग है, इसलिए टीम को बैरंग ही लौटना है.

आईपीएल और चेन्नई सुपरकिंग्स की बात करने से पहले माही के खेल की बात कर लेते हैं. वैसे तो धोनी अपने आप में क्रिकेट की एक पूरी किताब हैं, जिसे जानने-समझने के लिए उनके खेल को पूरी शिद्दत से जीना पड़ता है. फिर भी कुछ वाकये उनके करियर को बयां करने के लिए काफी हैं.

2007 में युवा टीम को लेकर विश्व कप जीतना और फिर अपनी जर्सी टीम इंडिया के प्रशंसक को पहना देना, पहला बड़ा मौका था जब धोनी लोगों के दिलों में समा गए थे. फिर 2011 के विश्व कप फाइनल में इनफॉर्म युवराज सिंह से पहले बैटिंग करना और टीम को फ्रंट से लीड कर चैंपियन बनाना. यह वो पल था, जब उन्होंने भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के दिलों में राज करना शुरू किया.
साल 2019 के विश्व कप सेमीफाइनल में धोनी का रन आउट होना, इस बात का संकेत था कि अब उनका करियर खत्म हो चुका है. धोनी के लिए वह संन्यास का सबसे बेहतरीन पल हो सकता था! पर कभी ‘जिद है तो जीत है’ का नारा गढ़ने वाले धोनी खुद कैसे हार मान लेते. भारत का लाडला जीत के साथ संन्यास लेना चाहता था. उसने इंतजार किया. किस्मत दगा दे गई. कोरोना वायरस ने यह तय कर दिया कि 2020 में टी20 वर्ल्ड कप नहीं होगा. इसके बाद धोनी ने आजादी की सालगिरह पर चुपचाप इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया.

धोनी विश्व कप के बाद सोमवार को फिर रन आउट हो गए. वह साल 2019 था और यह अक्टूबर की 19 तारीख. राजस्थान के खिलाफ उनका आउट होना हैरतअंगेज करता है. वह जैसे ऐलान है कि अब बस. अब और नहीं. जिस आईपीएल में एक दिन पहले तीन सुपर ओवर खेले गए (इससे एक-एक रन की अहमियत समझी जा सकती है). उस आईपीएल में धोनी 18वें ओवर में ऐसे दौड़े, जैसे उनके लिए एक रन ही काफी हो. जैसे उन्हें दूसरा रन चाहिए ही नहीं. यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही खिलाड़ी है, जो फील्डरों के सामने से ऐसे रन चुराता था, जैसे आंख के नीचे से काजल चुरा रहा हो. वही खिलाड़ी सोमवार को जब अपना पहला रन भी पूरा नहीं कर पाया था, तब तक उसका साथी डेढ़ रन दौड़ चुका था.



धोनी के रन आउट को विस्तार से समझते हैं. उन्होंने 18वें ओवर में भारत के ब्रेट ली कहे जा रहे कार्तिक त्यागी की गेंद को लॉन्ग ऑफ पर खेला. गेंद तेजी से जोफ्रा आर्चर की ओर गई, जो मैच में दो बार मिसफील्ड कर चुके थे. पारी का 18वां ओवर और स्कोर 4 विकेट पर 106 रन. ऐसे में पुराना धोनी या आज का कोई युवा क्रिकेटर होता तो तेजी से दौड़कर आर्चर पर दबाव बनाता कि वे गलती करें या मिसफील्ड करें और दूसरे रन का मौका बने. 40 साल के धोनी इसके विपरीत चहलकदमी करते हुए रन ले रहे थे. कुछ उसी अंदाज में जैसे 1990 के दशक में अर्जुन रणतुंगा लिया करते थे. धोनी ऐसा करते हुए भूल गए कि उनके साथ रवींद्र जडेजा क्रीज पर हैं, जो आज भी आंख से काजल चुराने की कला में माहिर हैं. नतीजा जब धोनी पहला रन भी पूरा नहीं कर पाए थे, तब तक जडेजा पहला रन पूरा कर दूसरा रन लेने के लिए आधी क्रीज पार कर चुके थे. यह जडेजा की रनिंग का ही दबाव था कि आर्चर के हाथ से गेंद छिटक गई. धोनी हड़बड़ाए. उन्होंने जैसे तैसे पहला रन पूरा किया और दूसरे रन के लिए जडेजा को बेमन से देखा. तब तक जडेजा उनके पास आ चुके थे. तब धोनी ने टॉप गियर लगाया और सरपट भागे. बहुत देर हो चुकी थी तब तक.

धोनी क्रीज के बाहर पकड़े गए. लेकिन यह छोटी बात है. बड़ी बात यह है कि धोनी पहली बार रन लेने के लिए अनिच्छुक दिखे और यह आसानी से पकड़ में भी आ गया. धोनी थकान के कारण आउट नहीं हुए. वे अपनी अप्रोच के चलते विकेट दे गए. यह ऐसी रनिंग थी, जिसके लिए नन्हें क्रिकेटरों को कोच से हमेशा डांट पड़ती है.


अब इतनी सी बात के लिए कोई धोनी को संन्यास लेने को कहने लगे तो ज्यादती होगी. वैसे भी यह खिलाड़ी भारत के लिए नहीं खेलने का ऐलान कर ही चुका है. सब जानते हैं कि धोनी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. अब तो वे बतौर प्रोफेशनल क्रिकेटर टी20 लीग भर खेल रहे हैं. चेन्नई सुपरकिंग्स ने पूरी ताकत और उम्मीद के साथ उन्हें कप्तान बना रखा है. खिलाड़ी कोई भी हो, हर बार उम्मीद पर खरा नहीं उतरता. राफेल नडाल भी कभी-कभी क्ले कोर्ट में हार जाते हैं. इस बार धोनी का रंग भी उतरा हुआ है. उनका खेल बीस से उन्नीस रह गया है. दमदार खिलाड़ियों से सजी उनकी टीम हार के रिकॉर्ड बना रही है.

जिस धोनी को बड़े से बड़े झटके पर भी प्रतिक्रिया देते नहीं देखा गया, अब वह अंपायर के वाइड बॉल देने पर चिढ़ने लगते हैं. अपने पसंदीदा खिलाड़ी को मैदान पर यूं असहाय देखना बुरा लगता है. लेकिन उल्टी गिनती में 20 के बाद 19 ही आता है. हमने कभी कपिल देव जैसे दिग्गज को आखिरी कुछ विकेटों के लिए परेशान देखा था. आज धोनी की बारी है. कल किसी और की होगी.


और अंत में, यह सच है कि धोनी का खेल कमजोर पड़ा है. वे अब मैचविनर और चौंकाने वाले कप्तान नहीं है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम या कोई भी और उन्हें संन्यास लेने का ज्ञान देने लगे. यह जान और मान लीजिए कि संन्यास, किसी भी खिलाड़ी की मौत की तरह है. कोई भी खिलाड़ी जिस दिन संन्यास लेता है, उस दिन के बाद वह कभी नहीं खेलता. वह किसी भी और रूप में मैदान पर या बाहर दिखता है, लेकिन खेलता नहीं है. जब ऐसा है, तो इतना तो किया ही जाना चाहिए कि खिलाड़ी को खेल छोड़ने के लिए मजबूर ना किया जाए और उसे इतनी आजादी दी जाए कि वह इसकी तारीख खुद चुन सके. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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First published: October 20, 2020, 6:09 AM IST
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