IND vs AUS Boxing Day Test: अजिंक्य रहाणे के लिए ‘आपदा’ बन सकती है अवसर

अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे. 66 टेस्ट में 11 शतक लगाने वाले रहाणे कुछ साल पहले सिर्फ टेस्ट क्रिकेट की बात करने पर विराट कोहली से भी 20 बताए जाते थे. वजह थी कोहली से भी बेहतर उनका विदेशी ज़मीं पर खेल.

Source: News18Hindi Last updated on: December 25, 2020, 6:19 AM IST
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IND vs AUS Boxing Day Test: अजिंक्य रहाणे के लिए ‘आपदा’ बन सकती है अवसर
India vs England: अजिंक्य रहाणे ने ठोका अर्धशतक (फोटो-एपी)
अगर किसी छात्र के लिए 12वीं क्लास में अच्छे अंक लाना मुश्किल दिख रहा हो तो उससे मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए दाखिले वाली परीक्षाओं में कामयाब होने की उम्मीद करना ज़्यादती हो सकती है. लेकिन, अगर इसी छात्र ने पहली कक्षा से लेकर 10वीं तक का इम्तहान शानदार तरीके से पास किया हो, सिर्फ उसके बाद कुछ समय के लिए भटका हो तो शायद लोग इस तरह के छात्र से पुरानी कामयाबी की उम्मीदें छोड़ेंगे नहीं, ख़ासकर तब जब ये देखेंगे कि छात्र एक बार फिर से पुरानी राह पर लौटता दिख रहा है.

अगर आप ये सोच रहे हैं कि खेल के पन्ने पर मैं पढ़ाई का ज़िक्र क्यों कर रहा हूं तो आपको ये बताना चाहूंगा कि बॉक्सिंग डे टेस्ट से पहले भारत के टेस्ट कप्तान अंजिक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) की स्थिति कमोबेश उसी छात्र की तरह है जिसका मैंने ऊपर ज़िक्र किया है. भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) के बीच दूसरा टेस्ट मैच 26 दिसंबर से मेलबर्न (Melbourne Test) में खेला जाएगा. रहाणे इस मैच में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे.

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66 टेस्ट में 11 शतक लगाने वाले रहाणे कुछ साल पहले सिर्फ टेस्ट क्रिकेट की बात करने पर विराट कोहली से भी 20 बताए जाते थे. वजह थी कोहली से भी बेहतर उनका विदेशी ज़मीं पर खेल. आलम ये था कि अपनी पहली 13 टेस्ट सीरीज़ में 30 से कम का औसत उनका सिर्फ 1 मौके पर रहा जबकि 9 मौकों पर उन्होंने 50 से ज़्यादा का औसत रखा. उनके खेल में इसी निरंतरता ने उन्हें आर अश्विन जैसे बेहद कामयाब स्पिनर से पहले टेस्ट का उप-कप्तान बनवाया. लेकिन, 2017 में श्रीलंका में एक टेस्ट सीरीज़ के दौरान उनके खेल में ऐसा ग्रहण लगा (औसत 4 से भी कम!) कि बस वो रहाणे खो गया. वो रहाणे जिसमें राहुल द्रविड़ की सौम्यता और विदेशी ज़मीं पर तेज़ गेंदबाज़ों को दिलेरी से सामना करना वाला ज़ज्बा दिखता, वो रहाणे जिसमें कई मौकों पर संकटमोचक वीवीएस लक्ष्मण का स्ट्रोक-प्ले दिखता था, ओझिल हो गया था. 2018 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर कोहली और रवि शास्त्री ने सीरीज़ के पहले दो टेस्ट से बाहर रखा तो मुंबई का होने के बावजूद मुंबई लॉबी इस शांत और विनम्र खिलाड़ी के लिए वैसा शोर नहीं मचा पायी जैसा कि वो रोहित शर्मा के लिए अक्सर कर लेती है. लेकिन, उसी सीरीज़ के तीसरे और आखिरी (जोहानेसबर्ग) टेस्ट में एक बेहद मुश्किल पिच पर दो छोटी लेकिन बेहद उम्दा पारियां खेलकर रहाणे ने फिर से साबित किया कि अच्छा छात्र भले ही कुछ परीक्षाओं में उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं ला पाए लेकिन इसका मतलब कतई नहीं कि उसने पढ़ना बिलकुल छोड़ ही दिया था.
अभी नहीं तो कभी नहीं” वाली चुनौती
मौजूदा ऑस्ट्रेलिया दौरा रहाणे के करियर के लिए “अभी नहीं तो कभी नहीं” जैसी वाली चुनौती लेकर आया है. भारत रवाना होने से पहले ही विराट कोहली (Virat Kohli) ने कहा था कि उन्हें रहाणे की लीडरशीप क्षमता पर पूरा यकीन है और कप्तानी की अतिरिक्त ज़िम्मेदारी मिलने से उनका खेल और निखरेगा. ये बात कोहली ने एडिलेड में रहाणे द्वारा रन आउट होने से पहले कही थी! ख़ैर, कोहली ने जो बात कही उसमें दम है और उसे महज कहने के लिए कह दिया टाइप वाली श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है. रहाणे पिछले 2 साल से एक बार फिर से उस खेल की तरफ लौटते दिख रहे हैं, जिसके मुरीद सभी हैं. एडिलेड की पहली पारी में भले ही वो अर्धशतक बनाने से वो चूके लेकिन जब तक खेल रहे थे तब तक वर्ल्ड क्लास दिखे. दिसंबर 2018 के एडिलेड टेस्ट से लेकर अब तक 14 पारियों में रहाणे ने करीब 1000 रन लगभग 47 की औसत से बनाए हैं जबकि उनका करियर औसत करीब 43 का है.

द्रविड़-गिलक्रिस्ट वाली राह पर चलेंगे रहाणे?कोहली के वापस लौटने पर पहली बार रहाणे को ये मौका मिला है कि दुनिया के सामने ये दिखाये कि वाकई उनमें दम है. सिर्फ बल्लेबाज़ के तौर पर ही नहीं बल्कि कप्तान के तौर पर. इसके लिए उन्हें कहीं दूर ज़्यादा जाने की ज़रुरत नहीं बल्कि अपने बचपन से लकर जवानी तक के आदर्श द्रविड़ के करियर के किताब के कुछ पन्नों को पलटना होगा. 2004 में भारत ने जो ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ पाकिस्तान में जीती उसके 1-0 की बढ़त दिलाने वाले कप्तान द्रविड़ थे जबकि गांगुली तीसरे टेस्ट के लिए टीम में वापस आए थे. द्रविड़ की ही तरह एडम गिलक्रिस्ट ने 2004-05 के भारत दौरे पर उप-कप्तान होने के बाद कप्तानी की बागडोर ली (चूंकि नियमित कप्तान रिकी पोटिंग चोटिल हो गए थे) तो उन्होंने इतिहास रच डाला. 35 सालों से भारतीय ज़मीं पर टेस्ट सीरीज़ जीतने के सूखे को एक अनियमित कप्तान गिलक्रिस्ट ने पूरा किया जो बेहद कभी बेहद कामयाब कप्तानों में से एक स्टीव वॉ के लिए फाइनल फ्रंटियर हुआ करता था तो पोटिंग का एशेज के बाद सबसे बड़ा सपना. कहने का मतलब ये है कि उप-कप्तानों ने ऐसे नाज़ुक लम्हों में ना सिर्फ टीम को संभाला है बल्कि एक अलग स्तर पर ले गए हैं.

उम्मीदों का दबाव नहीं, हर रन, हर जीत होगा बोनस
ये ठीक है कि रहाणे के पास ना तो कोहली जैसा धुरंधर बल्लेबाज़ है और ना मोहम्मद शमी जैसा चतुर गेंदबाज़. लेकिन, नाकाम होने पर आलोचक उन्हें वैसे नहीं घेरेंगे जैसा कि कोहली को घेरते. उम्मीदों का दबाव उन पर वैसा नहीं होगा. रहाणे जो भी करेंगे उसे बोनस माना जाएगा. और ऐसा नहीं कि रहाणे ने निर्णायक मौके पर अपनी कप्तानी से दिल नहीं जीता है. 2017 में अपने पहले टेस्ट धर्मशाला में रहाणे ने टीम इंडिया को जीत दिलाकर सीरीज़ जीत दिलाई थी जो लगभग ऑस्ट्रेलिया की मुठ्टी में जा चुका था.

आपदा में अवसर ढूंढ़ने से बनते हैं चैंपियन!
एक बात और जो रहाणे अपने साथी और नियमित कप्तान कोहली से सीख सकते हैं. 2014-15 दौरे पर महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट सीरीज़ हारने के बाद अचानक कप्तानी छोड़ दी और कोहली को एडिलेड में टीम को लीड करने का मौका मिला. दोनों पारियों में शतक लगाने के अलावा एक अंसभव सी दिखने वाले चुनौती के करीब पहुंचाया था तब नए कप्तान ने. टीम इंडिया भले ही वो मैच हार गई लेकिन उसके बाद से कोहली बल्लेबाज़ के तौर पर और कप्तान के तौर पर बिल्कुल अपने आप को अलग स्तर पर ले जाने में कामयाब रहे. आपदा में अवसर ढूंढ़ना ही तो खिलाड़ियों को अक्सर चैंपियन बनाता है!

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जब कोई बढ़िया छात्र कुछ नाकामियां झेलने के बाद कामयाब होता है जो अक्सर हमारा समाज ये कहकर तालियां बजाता है और खुद को ये कहकर आश्वस्त करता है कि देखो हमने तो पहले ही कहा था ये लड़का कुछ ना कुछ ज़रुर करेगा. इसमें तो प्रतिभा थी जिसे उसने नतीजे में बदल दिया. दुनिया भर के क्रिकेट जानकार अगर ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ ख़त्म होने के बाद अगर कुछ वैसा ही रहाणे के लिए कहते हुए नज़र आएं तो उससे सुखद बाद भारतीय क्रिकेट के लिए और क्या हो सकती है? (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: December 25, 2020, 6:19 AM IST
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