विदेशी ज़मीं पर इतिहास की सबसे उम्दा है मेलबर्न टेस्ट की जीत!

भारत ने ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) को दूसरे टेस्ट मैच में 8 विकेट से हराया. अंजिक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) की कप्तानी में इस जीत को विदेशी ज़मीं पर किसी भी भारतीय टीम (Team India) द्वारा हासिल सबसे उम्दा जीत कहा जा सकता है.

Source: News18Hindi Last updated on: December 29, 2020, 6:43 PM IST
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विदेशी ज़मीं पर इतिहास की सबसे उम्दा है मेलबर्न टेस्ट की जीत!
टीम इंडिया ने दो पिंक बॉल टेस्ट खेले हैं. एक जीता, एक हारा है.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) को दूसरे टेस्ट मैच में 8 विकेट से हराया. सच पूछिए तो ऐसी ऐतिहासिक और चमत्कारिक जीत तो सपने में भी नहीं मिलती है! ऐसा लगता है कि जैसे ऊपरवाला ही इतनी बेहतरीन जीत की पटकथा लिख रहा हो और टीम इंडिया के सारे खिलाड़ियों ने बस अपना अपना किरदार बखूबी निभाया हो. अंजिक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) की कप्तानी में इस जीत को विदेशी ज़मीं पर किसी भी भारतीय टीम (Team India) द्वारा हासिल सबसे उम्दा जीत कहा जा सकता है. जानकार और फैंस इस पर बहस कर सकते हैं, बहुत से लोग असहमत हो सकते हैं लेकिन अगर सही मायनों में आकलन किया जाए तो इस बात पर शायद ही किसी को संदेह हो. ऐसा कहने की 5 अहम वजह हैं.

1. किसी नियमित कप्तान के बगैर आई ये जीत
विदेशी ज़मीं पर चाहे आप पहली जीत (ड्यूनेडिन 1968) की बात करें या फिर 1971 में पोर्ट ऑफ स्पेन और ओवल में जीत की बात करें, उन टीमों के पास टाइगर पटौदी या फिर अजीत वाडेकर जैसा नियमित कप्तान था. 2004 में मुल्तान टेस्ट राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आई क्योंकि उस मैच के लिए सौरव गांगुली अनफिट थे. निश्चित तौर पर बिना नियमित कप्तान के आई वो जीत भी बड़ी यादगार और अहम है. लेकिन रहाणे की टीम की जीत द्रविड़ की टीम की उस जीत से बेहतर इसलिए है क्योंकि पिछले टेस्ट में इतनी करारी हार नहीं झेली थी.

2. करारी हार के बाद किया ऐसा पलटवार
भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे (India vs Australia) पर पहले टेस्ट की दूसरी पारी में 36 रन पर समिट गई थी और 8 विकेट से हार गई थी. अब उसने दूसरा टेस्ट 8 विकेट से जीत लिया है. 50 या उससे कम रन पर आउट होने के बाद अगला टेस्ट मैच जीतने का कोई भी उदाहरण इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई ज़मीं पर नहीं मिलता है. हकीकत तो ये है कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले सिर्फ 3 मौकों पर ऐसा हुआ जब कोई टीम 50 या उससे कम पर ऑल आउट हो और अगले ही मैच में अपने विरोधी को पटखनी दे.

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3. दौर के सबसे बड़े बल्लेबाज़ के बिना मिली ये जीतऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली का रिकॉर्ड तेंदुलकर-लक्ष्मण जैसा लाजवाब है. ऐसे में अगर उस क्लास का बल्लेबाज़ टीम से हट जाए तो बल्लेबाज़ी कितनी कमज़ोर हो जाए, यह बताने की ज़रूररत नहीं है. इससे पहले विदेशी ज़मीं पर 51 टेस्ट जीत पर नज़र दौड़ाएंगे तो आपको सिर्फ 2001 कैंडी टेस्ट (श्रीलंका के ख़िलाफ) याद आएगा जहां पर सचिन तेंदुलकर के बिना गांगुली-द्रविड़ की जोड़ी ने चौथी पारी में एक बेहद मज़बूत श्रीलंकाई टीम के ख़िलाफ़ 264 रन के लक्ष्य का पीछा किया था. उस टेस्ट से पहले भी टीम इंडिया सीरीज़ का पहला मैच हार गई थी.

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4. टीम के 3 अहम गेंदबाज मेलबर्न में मौजूद नहीं थे
कैंडी टेस्ट में भी गांगुली के पास ना तो जवागल श्रीनाथ थे और ना ही अनिल कुंबले. उस दौर के 2 चैंपियन गेंदबाज़. लेकिन, रहाणे के पास तो दौरे से पहले ही ईशांत शर्मा (सबसे ज़्यादा टेस्ट विकेट मौजूदा भारतीय गेंदबाज़ों में और सबसे ज़्यादा ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाले गेंदबाज़), भुवनेश्वर कुमार नहीं थे तो मोहम्मद शमी (पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे के हीरो में से एक) कप्तान कोहली के साथ ही वतन लौट गए क्योंकि वो अनफिट हो गए थे. बात इतनी ही नहीं रही, रहाणे को प्लेइंग इलेवन के सबसे अनुभवी और सबसे कामयाब तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव को भी दूसरी पारी में खोना पड़ा. यानि टॉस हारकर गेंदबाज़ी करते हुए और वो भी 2 स्पिनर के साथ खेलते हुए रहाणे के पास तीसरी पारी में गेंदबाज़ी करने की चुनौती थी.

5. दौर के सबसे बेहतरीन आक्रमण के ख़िलाफ़ मिली जीत
1968 में न्यूज़ीलैंड से लेकर 2020 में ऑस्ट्रेलिया में विदेशी ज़मीं पर हर 52 जीत के आक्रमण पर नज़र दौड़ाएंगे तो शायद ही पाएंगे कि विरोधी टीम अपने सर्वश्रेष्ठ आक्रमण के साथ खेल रही थी. 1971 में ओवल में इंग्लैंड आक्रमण में जॉन स्नो, रेमंड इलिंगवर्थ और डेरेक अंडरवुड जैसे शानदार गेंदबाज़ थे, 1976 में पोर्ट ऑफ स्पेन में 403 रन के चेज़ में कैरेबियाई आक्रमण के पास सिर्फ एक युवा माइकल होल्डिंग ही था, 1980 में मेलबर्न में कंगारुओं के पास डेनिस लिली-लेन पास्को की जोड़ी ही थी, 2001 कैंडी में श्रीलंका के पास मुरलीधरऩ और चामिंडा वास ही थे. 2006 में साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ डेल स्टेन, मखाया एंटिनी, शॉन पॉलक और जैक कैलिस का आक्रमण तगड़ा था और 2018 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड में भी ऑस्ट्रेलिया के पास जोश हेज़लवुड, मिचेल स्ट्रार्क, पैट कमिंस और नाथन लॉयन का अदभुत आक्रमण था. लेकिन, तब भारत सीरीज़ में 0-1 से पीछे नहीं चल रहा था. और ना ही अपने दौरे से सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ और गेंदबाजों के बगैर टेस्ट में उतरे थे.

ऐसे में अगर हालात, माहौल, खिलाड़ी, कप्तान, दबाव, इतिहास, आक्रमण, विरोधी और हर फैक्टर को ध्यान में रखते हुए आप आकलन करेंगे तो पाएंगे कि मेलबर्न टेस्ट की जीत हर मायने में असाधारण है और भारतीय क्रिकेट में इसका कोई जोड़ नहीं है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: December 29, 2020, 6:43 PM IST
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