IPL Special: बल्लेबाज़ों की फौज़ नहीं, गेंदबाज़ी आक्रमण से मिलेगी जीत

मैच जिताने के लिए एक बल्लेबाज़ कई बार अपने दम पर तस्वीर बदल देता है लेकिन अक्सर ये गेंदबाज़ या फिर गेंदबाज़ी आक्रमण का ही कमाल होता है जिसके चलते टीमें टूर्नामेंट जीतती है.

Source: News18Hindi Last updated on: October 12, 2020, 10:56 AM IST
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IPL Special: बल्लेबाज़ों की फौज़ नहीं, गेंदबाज़ी आक्रमण से मिलेगी जीत
गेंदबाज़ बनाएंगे चैंपियन
'भारत और पाकिस्तान ने अब तक टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लिए हैं और इसलिए वो फाइनल में पहुंचे हैं. मेरी थ्योरी है कि बल्लेबाज़ आपके लिए मैच जीतते हैं, गेंदबाज़ आपको टूर्नामेंट जितातें हैं.'

पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ और पूर्व गेंदबाज़ी कोच अज़हर महमूद ने 2017 में पाकिस्तान-भारत चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल मुकाबले से ठीक पहले ये बात कही थी. इत्तेफाक से उस टूर्नामेंट को पाकिस्तान ने जीता था और महमूद की ये थ्योरी काफी प्रचलित हुई. पहले वन-डे क्रिकेट और बाद में अगर टी20 और ख़ास तौर पर आईपीएल के इतिहास पर नज़र डालें, तो आमतौर पर वहीं टीमें चैंपियन बनती हैं जिनके पास एक असाधारण गेंदबाज़ या फिर 2-3 शानदार गेंदबाज़ों की फौज हो.

मौजूदा आईपीएल में भी अगर दो सबसे मजबूत टीमों पर गौर करें तो यह बात फिर से नज़र आती है. मुंबई इंडियंस के पास ना सिर्फ असाधारण जसप्रीत बुमराह हैं बल्कि उनका साथ देने के लिए ट्रेंट बोल्ट और जेम्स पैटिंसन जैसे तेज़ गेंदबाज़ है तो रिजर्व में नाथन कूल्टर नायल. स्पिन गेंदबाज़ों में उनके पास किफायती राहुल चाहर और चालाक क्रुणाल पंड्या हैं, तो एक ऐसा धाकड़ गेंदबाज़ भी है जिसने अभी तक गेंद थामी ही नहीं हैं. वो हैं हार्दिक पंड्या. पंड्या के हीरो केरन पोलार्ड का भी हर मैच में रोहित शर्मा पूरे 4 ओवर इस्तेमाल नहीं करते हैं. जब उन्हें लगता है कि पोलार्ड के विशाल अनुभव की उन्हें ज़रुरत है तभी उनको गेंदबाज़ी के लिए बुलाते हैं.

दिल्ली कैपिटल्स की टीम का भी फॉर्मूला बिलकुल अलग नहीं हैं. अगर इनके पास साउथ अफ्रीका के कगिसो रबाडा और एनरिच नार्के हैं तो इशांत शर्मा भी, स्पिन गेंदबाज़ के तौर पर आर अश्विन और अक्षर पटेल शानदार गेंदबाज़ी कर रहें हैं तो अमित मिश्रा चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं. लेकिन अभी नेपाल के संदीप लमिचाने को इन्होंने मौका भी नहीं दिया है जबकि पंड्या-पोलार्ड टाइप वाला गेंदबाज़ मार्कस स्टोयनीस दिल्ली के पास है. यानि दिल्ली ने भी मुंबई की तरह अपना गेंदबाज़ी आक्रमण इस तरीके से तैयार है कि अगर कोई 1 या 2 गेंदबाज़ टूर्नामेंट से पहले या बीच में बाहर हो जाये तो टीम को बहुत बड़ा झटका ना लगे.
अगर आईपीएल के इतिहास पर भी नज़र डालें तो सिर्फ 2012 में ऐसा हुआ है जब चैंपियन टीम यानि कि कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज़ रॉबिन उथप्पा ने ऑरेंज कप जीता है. इस साल भी देख लीजिए, के एल राहुल और मयंक अग्रवाल आपस में ही ऑरेंज कैप की छीन-झपटी कर रहें है लेकिन उनकी टीम का हाल बेहाल है.

वैसे उस साल भी कोलकाता के लिए सुनील नरेन ने 24 विकेट लिए थे और उनके इकॉनोमी रेट(5.47) के आस-पास भी कोई टॉप 25 गेंदबाज़ नहीं था जबकि विकेट के मामले में सिर्फ मार्ने मोर्कल ने 1 विकेट ज़्यादा लिए थे लेकिन उनका इकॉनोमी 7.19 रन प्रति ओवर का रहा था.


मैच जिताने के लिए एक बल्लेबाज़ कई बार अपने दम पर तस्वीर बदल देता है लेकिन अक्सर ये गेंदबाज़ या फिर गेंदबाज़ी आक्रमण का ही कमाल होता है जिसके चलते टीमें टूर्नामेंट जीतती है. आईपीएल के पहले दो सीज़न में ही ये बात साफ हो गई थी जब पाकिस्तान के सौहेल तनवीर और डेक्कन चार्जर्स के रुद्र प्रताप सिंह ने राजस्थान रॉयल्स और हैदराबाद को चैंपियन बनने के साथ साथ अपनी अपनी टीमों के लिए पर्पल कैप भी जीता था. 2010 में चेन्नई सुपर किंग्स की पहली जीत इस थ्योरी का अपवाद रही तो 2011 में टॉप 11 गेंदबाज़ों में से 3 चेन्नई की टीम के ही रहे जिससे ये बात फिर साबित हुई कि गेंदबाज़ कितने अहम होते हैं.
2013 में पहली बार मुंबई इंडियंस ने इसी फॉर्मूले पर काम करते हुए ट्रॉफी जीती जिसमें हरभजन सिंह, मिचैल जॉनसन और लसिथ मलिंगा की तिकड़ी ने कमाल दिखाय, 2015 में ऑस्ट्रेलियाई जॉनसन की जगह न्यूज़ीलैंड के मिचैल मैक्लाघेन, फिर 2017 में बुमराह-मैक्लाघन की जोड़ी ही काफी रही टीम को तीसरी बार चैंपियन बनाने में. मुंबई इंडियंस ने आईपीएल में अपनी कामयाबी से इस फॉर्मूले को पूरी तरह से स्थापित कर दिया कि अगर आईपीएल जीतना है तो गेंदबाज़ी को मज़बूत करो.


2016 में सनराइजर्स हैदराबाद पहली बार चैंपियन बनी तो उसमें भुवनेश्वर कुमार और मुस्तफिज़ूर रहमान टॉप 5 गेंदबाज़ों में शामिल थे. हां, सिर्फ 2014, 2018 और 2019 में ये बात पूरी तरह से लागू नहीं हुई. इतना ही नहीं 1983 में वन-डे क्रिकेट का पहला वर्ल्ड कप हो या फिर 2011 में दूसरा वर्ल्ड कप, गेंदबाज़ी यूनिट ने ही टीम इंडिया की जीत तय की. अगर 2007 टी वर्ल्ड कप की बात करें तो इरफान पठान, आरपी सिंह, श्रीशंत और हरभजन सिंह की चौकड़ी ने यही कमाल दिखाया था.

2017 में whiteballanalytics.com ने एक ज़बरदस्त सर्वे किया था जिसमें दुनिया भर के तमाम टी20 टूर्नामेंट के साथ वन-डे क्रिकेट और टी20 वर्ल्ड चैंपियन टीमों की जीत पर अध्ययन किया गया और उससे ये आकलन किया गया कि करीब 54 फीसदी टूर्नामेंट जीतने वाली टीमों के पास नंबर 1 गेंदबाज़ी आक्रमण था. सिर्फ 21 फीसदी चैंपियन टीमों के पास नंबर 1 बैटिंग यूनिट थी.

चलते-चलते एक उदाहरण आईपीएल की ही एक और हाई प्रोफाइल टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से देखतें हैं. विराट कोहली और एबी डिबिविलियर्स जैसे महानतम बल्लेबाज़ों की मौजूदगी के बावजूद ये टीम हमेशा उम्मीद से नीचे ही खेलती रही है. इन दोनों दिग्गजों के अलावा इस टीम से क्रिस गेल से लेकर युवराज सिंह समेत एक-एक से धुरंधर खेल चुके हैं लेकिन ट्रॉफी कभी नहीं मिली.
2016 में जब कोहली की बल्लेबाज़ी(करीब 1000 रन) के बूते बैंगलोर ने इस सूखे को ख़त्म करने की उम्मीद जगायी लेकिन फाइनल में वो टूर्नामेंट क सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ी आक्रमण यानि सनराइजर्स के खिलाफ चूक गये. उसके बाद से लगातार डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ों की समस्या के चलते ही कोहली को बार-बार मायूस होना पड़ा.

इस साल अगर कोहली की टीम ने बेहतरीन उम्मीदें जगायीं है तो इसके लिए बल्लेबाज़ी नहीं बल्कि युजवेंद्र चहल, वाशिंगटन सुंदर जैसे पावर-प्ले के बेहतरीन गेंदबाज़ हैं और साथ ही क्रिस मौरिस और नवदीप सैनी जैसे तेज़ गेंदबाज़ भी जो डेथ ओवर्स की समस्या को सुलझा सकते हैं. किंग्स इलेवन पंजाब की गेंदबाज़ी का बुरा हाल ही ही जिसने राहुल और अग्रवाल के बल्ले की चमक को जीत में बदलने नहीं दिया है. इस बार पंजाब के लिए चैंपियन बनने की उम्मीद तो लगभग खत्म हो गई है लेकिन अगर दिल्ली या बैंगलोर पहली बार चैंपियन बनतें है तो इसमें भूमिका गेंदबाज़ी आक्रमण की ही ज़्यादा रहेगी.
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: October 12, 2020, 10:56 AM IST
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