क्या एमएस धोनी वाकई अगले दो सालों तक क्रिकेट खेलते रहेंगे?

एमएस धोनी (MS Dhoni) चेन्नई पहुंच चुके हैं, जहां से वो यूएई में 19 सितंबर से शुरू हो रहे आईपीएल के लिए उड़ान भरेंगे

Source: News18Hindi Last updated on: August 15, 2020, 7:22 AM IST
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क्या एमएस धोनी वाकई अगले दो सालों तक क्रिकेट खेलते रहेंगे?
क्या है धोनी का असली खेल?
नई दिल्ली. 14 अगस्त को महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने रांची से चेन्नई की उड़ान क्या भरी, सोशल मीडिया पर धोनी-धोनी की गूंज तकरीबन उसी अंदाज़ में लगी जैसा अब से करीब एक दशक पहले सचिन-सचिन की गूंज मैदानों में सुनाई पड़ती थी. यूं तो धोनी पूरे देश के चहेतें हैं, रांची के राजकुमार हैं लेकिन चेन्नई में जितना लाड उन्हें मिलता उसकी मिसाल नहीं. खुद शायद धोनी के शहर रांची में भी उन्हें इस तरह का अभिवादन ना मिले जैसा चेन्नई में उनके साथ होता है. और हो भी क्यों ना.. चेन्नई सुपरकिंग्स का मतलब धोनी और दोनी का मतलब चेन्नई सुपर किंग्स. कम से कम आईपीएल में तो यही सच है. और यही वजह है कि पिछले एक साल से भी ज़्यादा वक्त से धोनी ने अंत्तराष्ट्रीय मैच तो दूर की बात किसी भी तरह के क्रिकेट मैच में नहीं खेले हैं, क्लब स्तर के मैच भी नहीं, बावजूद इसके चेन्नई सुपर किंग्स के कर्ताधर्ता उन्हें अगले 2 साल तक(कम से कम!) आईपीएल में अपनी टीम के लिए खेलते देखना चाहते हैं.

अगले दो सालों तक क्रिकेट खेलेंगे धोनी?
धोनी (MS Dhoni) क्या वाकई अगले दो साल तक क्रिकेट खेलेंगे? क्या वो सिर्फ आईपीएल में सक्रिय रहेंगे? या फिर धोनी 2021 में टी20 वर्ल्ड कप में भी खेलते हुए नज़र आ सकते हैं? ये तमाम सवाल ऐसे हैं जिन्होंने ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में क्रिकेट के चाहने वालों और जानकारों को उलझाये रखा है, चर्चा में उनको बनाये रखा है. धोनी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में अब तक इस मुद्दे पर ना कुछ कहा है और ना ही उनके कुछ कहने की उम्मीद है. हां, इतना ज़रुर है कि एक विज्ञापन में उन्होंने अपने आलोचकों को मज़ाकिया अंदाज़ में ही आड़े लिया जब वो ये कहते सुनाई पड़ते हैं कि आखिर हर किसी को उन्हीं के रिटायरमेंट की क्यों पड़ी है!

इंग्लैंड के विल्फ्रेड रोड्स के नाम 52 साल की उम्र तक टेस्ट क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड है लेकिन वो करीब 100 साल पहले की बात है. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक ने 42 साल की उम्र तक टेस्ट क्रिकेट खेली लेकिन उनका करियर काफी देर से शुरु हुआ था. आईपीएल में प्रवीण तांबे ने तो 41 साल की उम्र में अपना पहला मैच खेला. लेकिन, धोनी 39 साल के हो चुके हैं. 90 टेस्ट, 350 वन-डे और 98 टी20 इंटरनेशनल मैच तो किसी भी खिलाड़ी को थका दे, ख़ासकर अगर वो विकेटकीपर-बल्लेबाज़ की दोहरी भूमिका निभाता हो. अभी तो हमने कप्तानी की ज़िम्मेदारी का मानसिक दबाव वाले फैक्टर को तो शामिल भी नहीं किया और ना ही घरेलू क्रिकेट में 317 टी20 मुकाबले(ज़्यादातर आईपीएल में) का ही जिक्र किया है. इतनी क्रिकेट की थकान तो बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं देती है. लेकिन, धोनी तो धोनी (MS Dhoni) हैं. वो हर तर्क को झुठला सकते हैं.
बेहद फिट हैं धोनी
धोनी (MS Dhoni) की फिटनेस कभी भी सवालों के घेरे में नहीं रही है. आईपीएल साल में सिर्फ 2 महीने के लिए होती है. धोनी की भूमिका चेन्नई के लिए विकेटकीपर औऱ बल्लेबाज़ से ज़्यादा कप्तान के तौर पर होती है. अगर धोनी बल्लेबाज़ और कप्तान के तौर पर खरा नहीं उतरते हैं तो सिर्फ अपनी कप्तानी के बूते वो चेन्नई टीम के लिए अहम योगदान दे सकतें हैं. और अगर नई पीढ़ी के पाठकों को ऐसा लगे कि ये क्या बात है तो वो इंग्लैंड के माइक ब्रेयरली का नाम गूगल में जाकर सर्च कर लें. 39 टेस्ट में बल्लेबाज़ी करते हुए 23 से कम का औसत और सिर्फ 9 अर्धशतक(66 पारियों में) और एक भी शतक नहीं. लेकिन, इतिहास उन्हें ना सिर्फ इंग्लैंड के बल्कि दुनिया के सर्वकालीन महान कप्तानों में से एक में गिनता है. कहने का मतलब ये है कि बाकि खेलों को तुलना में क्रिकेट में कप्तान की एक ख़ास भूमिका होती है.

कई मौकों पर उसके फैसले बल्लेबाज़ के रनों और गेंदबाज़ के विकेट से ज़्यादा निर्णायक साबित हो सकते हैं. और यही वजह है कि रवि शास्त्री अब भी कहते हैं कि अगर धोनी चाहें तो वो टीम इंडिया के लिए खेल सकते हैं. विराट कोहली ने भी हमेशा यही बात दोहरायी है. भारतीय क्रिकेट में किसी पूर्व कप्तान को मौजूदा कप्तान से ऐसा सम्मान कभी नहीं मिला है. कपिल देव- सुनील गावस्कर का दौर रहा हो, अज़हरुद्दीन-तेंदुलकर का दौर रहा हो या फिर गांगुली-द्रविड़ का , इतिहास गवाह है कि पूर्व कप्तान के सामने मौजूदा कप्तान ने हमेशा खुद को असुरक्षित ही पाया है. लेकिन, धोनी के साथ ऐसा नहीं है. वो खिलाड़ियों के खिलाड़ी हैं.और कप्तानो के कप्तान. अगर तेंदुलकर पिछली पीढ़ी के लिए ‘पाजी’ थे तो इस पीढ़ी के लिए ‘माही भाई’ हैं.अगले 3 महीने धोनी के लिए अहम
आने वाले तीन महीने धोनी के लिए दिलचस्प होंगे. अगर उसी अंदाज़ में हैलीकॉप्टर शॉट मैदान से बाहर जाता है, अगर विकेट के पीछे वही चीते वाली फुर्ती दिखाई देती है और स्पिनर को स्टंप्स माइक्रोफोन पर निर्णायक सलाह मिलती है तो यकीन मानिये टीम इंडिया में माही-भाई को वापस लाओ की गूंज फिर से सुनाई देने लगेगी. लेकिन, अगर ऐसा नहीं हुआ तो... क्रिकेट एक बेहग क्रूर खेल है. ये अपने बड़े से बड़े हीरो को ये एहसास कराने से नहीं चूकता कि खेल बड़ा है खिलाड़ी नहीं. तभी तो डॉन ब्रैडमैन आखिरी पारी में शून्य पर आउट होते हैं नहीं तो सौ का पर्फेक्ट औसत होता, तेंदुलकर पहली बार जब एक टेस्ट सीरीज़ (2011 में वेस्ट इंडीज़ का दौरा) के बदले आईपीएल को अहमियत देते हैं तो अगले 2 साल तक वो अपने शतकों की संख्या को 99 से 100 तक पहुंचाने के लिए जूझते हैं. तो क्या माही के लिए भी क्रिकेट ने कोई ऐसा ही एंटीक्लाईमैक्स तो लिख नहीं रखा है!
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: August 15, 2020, 7:22 AM IST
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