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    फिंगर स्पिनर: IPL 2020 में ‘अक्सर-सुंदर’ क्यों दिख रहे हैं पटेल और वाशिंगटन?

    आईपीएल 2020 में उंगलियों के दम पर बल्लेबाज़ों का नचाने वाले गेंदबाज़ों ने एक बार फिर वापसी की है. अश्विन का खेल चौंकाने वाला नहीं है लेकिन भारत के दो स्पिनर अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर ने इस बार अपने प्रदर्शन में निरंतरता से हर किसी को हैरान किया हैं.

    Source: News18Hindi Last updated on: October 19, 2020, 8:12 AM IST
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    फिंगर स्पिनर: IPL 2020 में ‘अक्सर-सुंदर’ क्यों दिख रहे हैं पटेल और वाशिंगटन?
    अक्षर पटेल और वॉशिंटन सुंदर
    आईपीएल में अगर इस सीजन सबसे कामयाब गेंदबाजों के बारे में आपसे पूछा जाए तो सबसे पहले आपके ज़ेहन में कैगिसो रबाडा, राशिद ख़ान, जसप्रीत बुमराह और युज़वेंद्र चहल जैसे गेंदबाज़ों के नाम आयेंगे. ये स्वभाविक ही है क्योंकि ना सिर्फ इस साल बल्कि अमूमन हर साल या तो शानदार रफ्तार वाले तेज़ गेंदबाज़ या फिर कलाई से गेंद को घुमाने वाले लेग स्पिनर ही टी20 फॉर्मेट में गेंद के हीरो बनकर उभरते हैं. आलम ये रहा कि हरभजन सिंह और आर अश्विन जैसे उंगलियों के जादूगर को भी कामयाबी के बावजूद आईपीएल में वो अहमियत नहीं मिलती जिसके वो हकदार हैं क्योंकि एक धारणा बनी हुई है कि इस फॉर्मेट के असली जादूगर तो बस तूफानी तेज़ गेंदबाज़ या फिर कलाई वाले स्पिनर ही होते हैं.

    बहरहाल, आईपीएल 2020 में उंगलियों के दम पर बल्लेबाज़ों का नचाने वाले गेंदबाज़ों ने एक बार फिर वापसी की है. अश्विन का खेल चौंकाने वाला नहीं है लेकिन भारत के दो स्पिनर अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर ने इस बार अपने प्रदर्शन में निरंतरता से हर किसी को हैरान किया हैं. दोनों गेंदबाज़ों ने राशिद या रबाडा की तरह अपनी झोली में भरपूर विकेट तो नहीं झटके हैं लेकिन अलग ही अंदाज़ में अपनी-अपनी टीमों के लिए बड़े निर्णायक गेंदबाज़ बनकर उभरे हैं.

    सबसे किफायती गेंदबाज़ों की सूची में पटेल और सुंदर का नाम सिर्फ राशिद से पीछे हैं. अगर हम उन गेंदबाज़ों की बात करें जिन्होंने कम से कम इस सीजन 4 मैचों में शिरकत की है.
    अगर 8 मैचों में पटेल ने सिर्फ 5.59 रन प्रति ओवर खर्च किए हैं तो सुंदर ने 9 मैचों में 5.89 रन प्रति ओवर. इनके अलावा 6 रन से कम खर्च वाला कोई गेंदबाज़ आईपीएल में फिलहाल नहीं हैं. राशिद ने अगर 9 मैचों में 11 विकेट झटके हैं तो पटेल ने 7 और सुंदर ने 5.


    लेकिन, पटेल और सुंदर का काम अपनी टीमों के लिए विकेट लेने की बजाए पावरप्ले ओवर्स में रनों की गति पर अंकुश लगाना रहा है. और इस काम को दोनों खिलाड़ियों ने अपनी अपनी टीमों के लिए शानदार तरीके से निभाया है. अगर दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम अंक-तालिका में लगातार टॉप 3 में बनी है तो इसके पीछे उनके तरकश में ये दो तीर रहे हैं. आखिर पिछले सीज़न तक दिल्ली और बैंगलोर के गेंदबाज़ी आक्रमण में तो ऐसे ही खिलाड़ियों की कमी थी. विराट कोहली ने देर से ही सही सुंदर की उस काबिलियत पर भरोसा दिखाया जिसमें पावर-प्ले के मुश्किल ओवर्स में नई गेंद से वो बेहद आक्रामक बल्लेबाज़ों को चुप कराने में कामयबा रहें हैं. शुरुआती मैचों में जब कोहली ऐसा नहीं कर रहे थे या फिर सुंदर का स्पेल पूरा नहीं करवा पा रहे थे तो उनकी खूब आलोचना भी हो रही थी.
    सुंदर की कामयाबी को आसानी से बयां करना मुश्किल है क्योंकि ना तो उनके पास राशिद या अश्विन जैसी विविधता है, और ना ही वो गेंदों को फ्लाइट करते हैं. उनमें तो गेंदों को ज़बरदस्त तरीके टर्न कराने वाली क्षमता भी नहीं है. लेकिन, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि टी20 का व्याकरण ही अलग है. यहां पर आप अगर विकेट नहीं भी लेते है लेकिन रनों की रफ्तार को रोकने में शानदार तरीके से कामयाब होते है तो ये अपने आप में एक बड़ी योग्यता है और इसलिए सुंदर भारत की टी20 टीम का नियमित हिस्सा हैं. पावर-प्ले में इस सीजऩ सुंदर ने अपने 4 ओवर कोटा के 50 फीसदी गेंदबाज़ी यहीं की है और कोहली को कप्तान के तौर पर ज़बरदस्त विकल्प दिए हैं.

    दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी पटेल वैसी ही भूमिका निभा रहे हैं जो सुंदर कोहली के लिए कर रहे हैं. अक्षर की शैली भी दूर से आपको साधारण ही लगे. सुंदर की ही तरह अक्सर भी लो-प्रोफाइल रहते हैं और लाइमलाइट की बजाए टीम की जीत में अपना रोल अदा करने में यकीन रखते हैं.
    बाएं हाथ के स्पिनर पटेल ने अगर 18 साल की उम्र में गुजरात के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेली तो सुंदर 17 साल की उम्र में आईपीएल खेल गए. अब तक भारत के लिए सफेद गेंद की क्रिकेट में 49 मैच खेल लिए हैं तो सुंदर ने भी करीब आधे (24 मैच). दोनों गेदबाज़ों की हसरत भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना है लेकिन ये राह दोनों के लिए फिलहाल बड़ी मुश्किल है.


    21 साल के युवा के तौर पर पटेल 2015 में वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा थे लेकिन एक भी मैच नहीं खेले वहीं ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में सुंदर का चुना जाना लगभग तय था लेकिन वो टूर्नामेंट ही फिलहाल स्थगित हो गया है. यानि ऑस्ट्रेलिया में दोनों को वर्ल्ड कप में खेलने का मौका नहीं मिला!
    आईपीएल में अक्षर ने शुरुआत 2013 में मुंबई इंडियंस के लिए की, 2014 में किंग्स इलेवन पंजाब के लिए एमर्जिंग प्लेयर चुने गए. 2017 में गुजरात लॉयंस के लिए 17 विकेट लिए जिसमें एक हैट्रिक भी शामिल रही. उसी साल महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ एक ओवर में 23 रन को वो डिफेंड नहीं कर पाए थे लेकिन 2018 में जब पंजाब ने सिर्फ 1 खिलाड़ी को रिटेन किय तो वो पटेल ही थे. कैपिटल्स ने उन पर 5 करोड़ खर्च करके टीम में शामिल किया और गेंद के साथ-साथ बल्ले से कमाल दिखाकर पटेल एक-एक पाई वसूल रहे हैं.


    सुंदर में भी पटेल की ही तरह बल्ले से मैच जिताने की क्षमता है जिसके चलते उन्हें भी कोहली ने एक मैच में टॉप ऑर्डर में भेजा. बैंगलोर ने उन पर 3.20 करोड़ का दांव खेला है जिसे वो भी अपने खेल से वसूलवा रहे हैं. सुंदर ने 2017 में पुणे सुपरजाइंट्स के लिए शानदार शुरुआत की और अब इस साल भी तहलका मचा रहे हैं. अगर अक्सर को अपने ही राज्य के हीरो और उसी शैली में गेंदबाज़ी करने वाले रविंद्र जडेजा के चलते सुर्खियां नहीं मिली तो टीक वैसे ही चेन्नई से आने वाले सुंदर को अपने हीरो अश्विन से शुरुआती तुलना के दौर से गुजरना पड़ा हैं. लेकिन इस साल आईपीएल में अपने लाजवाब खेल से दोनों ने ये दिखाया है कि अब इन्होंने अपनी पहचान अलग तरीके से बना ली है. दोनों की उम्र, रास्ते,लक्ष्य और संघर्ष भले ही अलग अलग रहें है लेकिन आईपीएल में उंगली की कला को फिर से जीवंत करने में भूमिका बिलकुल एक-जैसी. (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
    ब्लॉगर के बारे में
    विमल कुमार

    विमल कुमार

    न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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    First published: October 19, 2020, 8:12 AM IST
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