क्रिकेट ही नहीं ज़िदगी के कई मामलों में 'शिखर' पर हैं धवन

दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के स्टार बल्लेबाज शिखर धवन (Shikhar Dhawan) मंगलवार को आईपीएल (IPL) में लगातार दो शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने हैं

Source: News18Hindi Last updated on: October 24, 2020, 4:00 PM IST
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क्रिकेट ही नहीं ज़िदगी के कई मामलों में 'शिखर' पर हैं धवन
शिखर धवन युवाओं के लिए हैं प्रेरणा (फोटो-@DelhiCapitals)
नई दिल्ली. आईपीएल (IPL 2020) में मंगलवार रात को शिखर धवन (Shikhar Dhawan) ने न सिर्फ अपने 5000 रन पूरे किए बल्कि इस टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार 2 मैचों में शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने. बावजूद इसके उनकी टीम हारी लेकिन जब वो मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार लेने आए तो उनके चेहरे पर वही मुस्कान थी जो जीतने पर होती. वैसे तो भारतीय क्रिकेट में ‘कूल’ शब्द पर एकाधिकार तो महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) का हो चुका है लेकिन अगर इस शब्द का कोई छोटा उत्तराधिकारी तलाशा जाए तो शायद वह धवन ही होंगे.

मेरे ऐसा लिखने की निजी वजह है. करीब से उस खिलाड़ी को देखने की यादें हैं. युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा के लिए अक्सर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और धोनी समेत कई दिग्गजों की कहानियों और किस्से सुना दिए जाते हैं जो काफी आसान और सहज भी होता है लेकिन धवन की कहानी भी किसी से उन्नीस नहीं है.

2004 में ही दिखाया था शिखर में पहुंचने का कमाल

साल 2004 में मेरी पहली मुलाकात दिल्ली के वेकेंटेश्वर कॉलेज में धवन से उस वक्त हुई जब एक टीवी चैनल के लिए मैं उनका इंटरव्यू करने उनके क्लब सोनेट में पहुंचा. शर्मीला और चुपचाप सीधे-सीधे बात करने वाला ये लड़का अंडर 19 वर्ल्ड कप में भारत के लिए ही नहीं टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा(500 से ऊपर जबकि दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के भविष्य के कप्तान एलिस्टर कुक रहे थे जिनसे 400 रन भी नहीं बने थे) रन बनाकर लौटा था. वो कहते हैं न पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं. धवन को भारतीय क्रिकेट का भविष्य बताते हुए मैंने अपनी पीटीसी (कैमरे के सामने जब रिपोर्टर अपनी स्टोरी की अहम बात जब बताया करता था) के बैकड्रॉप में धवन को बल्ले से अभ्यास करने की गुज़ारिश की तो वो हिचकने के बावजूद मुझे मना नहीं कर पाए.
अफसोस की बात है कि जिस धवन के बारे में मैंने अगले 1-2 साल में भारत के लिए खेलने की भविष्याणी की थी वो अगले 6 सालों तक टीम इंडिया के लिए किसी भी फॉर्मेट में खेल नहीं पाया था. जबकि उस दौरान अंडर-19 वर्ल्ड कप के साथी खिलाड़ी रुद्र प्रताप सिंह, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, रॉबिन उथ्प्पा जैसे खिलाड़ी न अंडर 19 से टीम इंडिया का फासला खत्म कर चुके थे बल्कि बल्कि स्टार भी बन चुके थे.

संघर्ष औऱ गुमनामी ने नहीं तोड़ा मनोबल

दिल्ली के लिए रणजी मैचों की कवरेज के दौरान (उस दौर में टीवी पत्रकारिता में खेल के मैदान से भी जमीनी रिपोर्टिंग हुआ करती थी) जब-जब मैं शिखर से मिलता तो सहानूभूति जताने की कोशिश करता लेकिन वो अपनी मुस्कराहट से मुद्दा ही बदल देते थे. जब कभी वीरेंद्र सहवाग पर स्टोरी करनी होती तो एक बाइट के लिए धवन ही अक्सर मिला करते थे ताकि स्टोरी थोड़ी बेहतर लगे. नई सदी के पहले एक दशक में दिल्ली के ही दो ओपनर सहवाग और गौतम गंभीर ने ऐसा समां बांधा कि धवन के लिए भारतीय टीम में आने की उम्मीद करना भी संभव नहीं दिखता. लेकिन, इसी दौर में उनके एक साथी और 4 साल जूनियर विराट कोहली ने इतनी तेज़ी से अपने क़दम बढ़ाये कि वो एक तरह से ज़बरदस्ती टीम इंडिया में जगह न रहते हुए भी अपनी जगह बना गए. कोहली और धवन बहुत करीबी दोस्त रहे हैं और मुझे ऐसा लगता है कि शायद धवन को भी प्रेरणा कोहली के नज़रिये से भी मिली हो. 2010 में वो पहली बार सफेद गेंद क्रिकेट के लिए टीम इंडिया में चुने गए. लेकिन, कुछ खास नहीं किया. अगले 3 साल फिर घरेलू क्रिकेट की गुमनामी में वो खुद का वजूद तलाश करने की जद्दोजहद में जुड़े रहे.आईपीएल ने बुरे वक्त में धवन को बंधाया ढांढस

धवन के लिए अच्छी बात ये रही कि 2008 से आईपीएल शुरु हो चुका था. भारत के लिए जो प्रतिभाशाली खिलाड़ी अच्छा नहीं खेल पाता वो आईपीएल में अपने खेल से हर किसी का ध्यान खींचने की कोशिश करता. विंडबना की बात ये रही कि अपने पहले सीजन में अपने घरेलू शहर दिल्ली के लिए टॉप-3 रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल होने के बावजूद उन्हें अगले सीजन उन्हें मुंबई इंडियंस इसलिए भेज दिया गया क्योंकि आशीष नेहरा मुंबई से उनके बदले में दिल्ली आ सकते थे. खैर, अलग-अलग फ्रेंचाइजी से खेलते-खेलते आखिरकार जब धवन हैदराबाद शहर (डेक्कन चार्जस पहले और बाद में सनराइजर्स) का हिस्सा बने तो उन्होंने अपना लोहा मनवा लिया.

अहम का दूर-दूर तक निशान नहीं

2013 में जब धवन पहली बार टेस्ट टीम में चुने गए तो मैं एक बार फिऱ उनका इटंरव्यू करने उनके घर पहुंचा. इस बार इंटरव्यू की शुरुआत में मेरे इंट्रोडक्शन में धवन के बदले कोहली निकला(युवा प्रतिभा का बार बार ज़िक्र करते हुए शायद कोहली मेरी ज़ुबां पर भी अपनी जगह पक्की कर गये थे!) जिसे मैं पकड़ नहीं पाया लेकिन धवन ने बड़ी नम्रता से मेरी उस चूक की तरफ इशारा किया. मैनें रिटेक(दोबारा अपने वाक्य को छठीक करने का प्रयास) तो किया लेकिन गलती फिर दोहरायी. धवन ने फिर मुस्कराते हुए वही बात कही. इस बार मुझे फिर यकीन नहीं हुआ लेकिन मैनें कैमरे कि रिकॉर्डिंग चैक की तो वो सही थे! मुझे आज भी इस बात पर थोड़ी शर्मिंदगी महसूस होती है कि ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था तो उस दिन धवन का नाम लेने की बजाए मेर मुंह से ग़लती से कोहली क्यों बार-बार निकल रहा था. खैर, इटंरव्यू खत्म हुआ और फिर जब अगली मुलाकात हुई तो धवन ने कभी भी इस पूरानी लेकिन ठेस पहुंचा सकने वाली बात को अहम का मुद्दा नहीं बनाया. ये कोई मामूली बात नहीं थी. भारतीय क्रिकेट में मैंने कई ऐसे खिलाड़ियों को देखा है जो छोटी-सी-छोटी बात पर नाराज होकर कई सालों तक आपसे दूरियां बना बैठते हैं, लेकिन गब्बर वाकई में ऐसे नहीं है. वो दिल के बेहद साफ और खुले हुए हैं. जो कहना होता है आपके मुंह पर कहेंगे भले ही वो बात शायद आपको अच्छी ना लगे. भारतीय क्रिकेट में हार्दिक पंड्या और कोहली ऐसे खिलाड़ी रहें है जिन्होंने धवन की दिलदारी और यारों का यार होने की बातें कई बार साझा की हैं. खुद धोनी गब्बर की संजीदगी के मुरीद रहें हैं.

मैदान से ज्यादा मैदान के बाहर के निजी फैसले प्रेरणादायी

बहरहाल, जहां तक इस खिलाड़ी से प्रेरणा लेने की बात है तो आप हमेशा उनसे ये सीख सकतें हैं जिंदगी आपको हमेशा मौके देगी अगर आपमें अपनी काबिलियत पर यकीन करते हुए सही वक्त का इंतजार करने का सब्र होगा. आखिर, जिस खिलाड़ी ने 167 मैचों तक आईपीएल में कोई शतक नहीं जमाया था अगर वही लगातार 2 मैचों में शतक लगाने वाला खिलाड़ी बन सकता है तो आप भी जिंदगी में कई ऐसे लक्ष्य साध सकते हैं जो शायद आपने कभी हासिल न किए हो. अगर आपके विरोधी आपसे मजबूत हो (सहवाग-गंभीर) तो आप मायूस होने की बजाए खुद को बेहतर करने पर ध्यान दो और हो सकता है कि भविष्य में आप अपने लिए एक अलग छवि बनाने में कामयाब हो जाएं. ये काम तो धवन ने किया है. 2013 तक धवन आईसीसी के किसी भी टूर्नामेंट में नहीं खेले थे लेकिन जब खेले तो हर आईसीसी टूर्नामेंट में ऐसी धाक जमायी कि लोग ये कहने लगे कि ये खिलाड़ी बड़े मैचों और बड़े टूर्नामेंट का वाकई में बड़ा खिलाड़ी है. इस बात से प्रेरणा ये ली जी सकती है कि आप कभी भी अपने खिलाफ पुरानी धारणाओं को अपने शानदार काम से बदल सकते है.

लेकिन, जो सबसे बड़ी प्रेरणा भारतीय युवा खिलाड़ी धवन से ले सकते हैं वो ये कि कैसे अपने बेफिक्र अंदाज़ को लापरवाही में नहीं बदलने दिया जाए. स्टार बनने के बावजूद उनका रवैया वही आम घरेलू क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ी वाला ही रहा, करोड़ों रुपये बैंक बैलेंस होने के बावजूद पैसे की चकाचौंध ने उनका स्वभाव नहीं बदला. जवानी के उस मोड़ पर जब उन पर सैकड़ों लडकियां मरतीं थी लेकिन उन्होंने शादी उस लड़की से की जिनसे उनको सच्चा प्यार हुआ था और वो भी बिना मिले! उस लड़की के साथ उनके बच्चों को ऐसे अपनाया और प्यार दिया जैसे कोई अपने सगे बच्चों के साथ करता है. धवन के चरित्र की ये बात मुझे उनकी तमाम क्रिकेट उपलब्धियों को फीका कर देती हैं. आप धवन को सिर्फ आईपीएल या अंत्तराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक लगाने वाले या रनों का अंबार लगाने वाले खिलाड़ी के तौर पर नहीं बल्कि एक बेहतरीन और प्रेरणा देने वाले इंसान के तौर पर भी देखें. भले ही उनके साथ कोहली वाला ग्लैमर न हो, धोनी जैसी मीडिया की दिलचस्पी न हो और न ही रोहित शर्मा की तरह सोशल मीडिया पर कट्टर समर्थक लेकिन धवन तो क्रिकेट ही नहीं ज़िंदगी के कई मामलों में शिखर पर हैं.
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: October 21, 2020, 12:19 PM IST
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