बहुत खूब श्रेयस अय्यर, ऐसी ही बनी रहे तुम्हारी शानदार डगर

India vs New Zealand Test Series: 2021 में अय्यर ने अपने ने अपने पहले टेस्ट की दोनों पारियों में उम्दा खेल दिखाकर आमरे को गुरु-दक्षिणा पेश की है, जिन्होंने खुद डरबन में 1992 में अपने पहले टेस्ट में शतक लगाया था. लेकिन, कानपुर के इसी मैदान पर ठीक 7 साल पहले आमरे ने कोच के तौर पर अय्यर को इस बात के लिए झकझोरा था कि आखिर वो कब तक दूसरों के खेल पर तालियां बजाते रहेंगे और वो वक्त कब आएगा जब लोग उनके खेल पर तालियां बजाएं.

Source: News18Hindi Last updated on: November 29, 2021, 11:28 AM IST
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बहुत खूब श्रेयस अय्यर, ऐसी ही बनी रहे तुम्हारी शानदार डगर

क्सर यह कहा जाता है कि पूत के पांव पलने में ही नज़र आ जाते हैं. भारत और न्यूजीलैंड के बीच कानपुर में पहले टेस्ट (IND vs NZ Kanpur Test) के दौरान श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) भारत के लिए डेब्यू टेस्ट की एक पारी में शतक और दूसरी में अर्धशतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी बने, तो हर किसी ने उनकी बेजोड़ प्रतिभा वाले किस्से सोशल मीडिया पर सुनाने शुरु कर दिए.


लेकिन, बहुत कम लोगों को यह बात पता है कि 2014 अंडर 19 वर्ल्ड कप में श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) अपनी टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले टॉप 3 बल्लेबाज़ों में भी नहीं था. संजू सैमसन, दीपक हुडा और सरफराज ख़ान ने यूएई में हुए वर्ल्ड कप में अय्यर से ज़्यादा रन बनाए थे और टीम इंडिया के लिए भविष्य के सितारे के तौर पर देखे गए थे. आलम ये था कि हिमाचल प्रदेश के अंकुश बेन्स तक ने भी अय्यर से ज़्यादा रन बटोरे थे.


भाग्यशाली अय्यर के पास आमरे जैसा गुरु मिला

बहरहाल, अय्यर भाग्यशाली थे कि उनके पास प्रवीण आमरे के तौर पर एक ऐसा निजी कोच था, जिसने उन्हें शुरु से ही इस बात को बताए रखा कि क्रिकेट लंबी रेस का खेल होता है, जहां पर हर कोई सचिन तेंदुलकर की तरह शानदार शुरुआत से महान नहीं बन पाता है, तो हर कोई विनोद कांबली की तरह लाजवाब शुरुआत के बाद भी एक तय दिख रही महानता को छूने से पहले ही ओझल हो जाता है. आमरे इस बात को बखूबी जानतें है क्योंकि वो भी तेंदुलकर और कांबली के साथ रमाकांत आचरेकर के चेले रहें हैं. अय्यर को जिस समय सबसे ज़्यादा मार्ग-दर्शन की ज़रुरत होती है , आमरे उनके साथ रहे हैं.


2021 में अय्यर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ (India vs New Zealand) अपने पहले टेस्ट की दोनों पारियों में उम्दा खेल दिखाकर आमरे को गुरु-दक्षिणा पेश की है, जिन्होंने खुद डरबन में 1992 में अपने पहले टेस्ट में शतक लगाया था. लेकिन, कानपुर के इसी मैदान पर ठीक 7 साल पहले आमरे ने कोच के तौर पर अय्यर को इस बात के लिए झकझोरा था कि आखिर वो कब तक दूसरों के खेल पर तालियां बजाते रहेंगे और वो वक्त कब आएगा जब लोग उनके खेल पर तालियां बजाएं. 2017 में अय्यर को विराट कोहली की जगह टेस्ट टीम में मौका मिला लेकिन धर्मशाला टेस्ट में वो प्लेइंग इलेवन का हिस्सा ना हो पाएं और उसके बाद अगले 4 साल तक कोई मौका ही नहीं मिला.


किस्मत ने फिर कोहली के जरिए दस्तक देने का मौका दिया

लेकिन, अय्यर को किस्मत ने एक बार फिर से कोहली की ही जगह दोबारा टेस्ट टीम में दस्तक देने का मौका दिया. इस बार भी ऐसा लग रहा था कि अय्यर चाहे कुछ भी कर लें, मुंबई में होने वाले दूसरे टेस्ट में उन्हें कप्तान के लिए जगह खाली ही करनी ही पडेगी. लेकिन, शायद किसी को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि अय्यर खुद को साबित करने के लिए कितने भूखे थे. उनके पिता का अरमान था कि वो वेट्ट क्रिकेट खेले जिसके लिए उन्होंने 4 साल तक अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल की तस्वीर तक नहीं बदली थी.


अय्यर को शायद अपने कप्तान कोहली को यह भी बताना था कि  2019 world cup से पहले  उनको वन-डे क्रिकेट से बाहर रखना सही नहीं था. ख़ासकर यह देखते हुए कि उनका औसत करीब 42 का और स्ट्राइक रेट करीब 100(97) का रहा था. कोहली की ज़िद और अय्यर पर सही समय पर भरोसा नहीं दिखाने का शायद टीम इंडिया को वर्ल्ड कप में नुकसान हुआ हो, क्योंकि नंबर 4 की समस्या ही आखिर टीम इंडिया को ले डूबी थी.


वर्ल्ड कप के बाद जैसे ही चयनकर्ताओं ने इस भूल को सुधारा तो अय्यर का औसत तो वही रहा लेकिन स्ट्राइक रेट और बेहतर होकर 100 से ज़्यादा का हो गया.


शास्त्री अय्यर की प्रतिभा को कैसे नज़रअंदाज़ कर गए?

हैरानी की बात है कि मुंबई के रवि शास्त्री कोच के तौर पर अय्यर की प्रतिभा को नज़रअंदाज़ कर गए. शास्त्री कैसे यह भूल गए कि मुंबई की बल्लेबाज़ी संस्कृति में जहां खडूस होने को काफी अहमियत दी जाती है, वहां अय्यर अपने स्टोक्स-प्ले के चलते नार्थ वाली शैली वाले बल्लेबाज़ के तौर पर अलग पहचान बना रहे थे. स्पिनर के ख़िलाफ़ शानदार दबदबे वाले इस खिलाड़ी ने रणजी ट्रॉफी के एक सीजन में वीवीएस लक्ष्मण के सबसे ज़्य.दा रन बनान के रिकॉर्ड को तोड़न के बहुत करीब आ चुका था.


ये वही अय्यर थे जिसको पहली बार देखते ही रिकी पोटिंग जैसा दिग्गज फैन हो गया और आईपीएल के बीच में उन्होंने बेहद अनुभवी गौतम गंभीर को हटाकर अय़्यर को कैपिटल्स की कप्तानी आईपीएल में दिलावा दी.


अय्यर से कुछ सीखना है तो उनके जुझारु रवैए से सीखिए





बहरहाल, अगर किसी को अय्यर से कुछ सीखना है तो वो उनकी बल्लेबाज़ी नहीं बल्कि उनके जुझारु रवैए से सीखे. और ये सीख सिर्फ किसी खिलाड़ी के लिए बल्कि आपके और मेरे जैसे लोगों के लिए भी है, जो अक्सर थोड़ी सी समस्या से घिरने पर आस-पास अंधेरा महसूस करने लगतें हैं. अगर आप श्रैयस अय्यर हो तों तो इस साल की उनकी यात्रा को देखें. 2020 आईपीएल के दौरान वो डेलही कैपिटल्स के कप्तान थे, लेकिन 2021 की शुरुआत में वो कंधे की चोट के चलते आईपीएल के पहले हॉफ में नहीं खेल पाएं.


कप्तानी उनसे निकलकर जूनियर रिशभ पंत के पास चली गई और उन्हें वापस भी नहीं मिली. कोई बात नहीं. श्रीलंका में जब वन-डे टीम का चयन हुआ तो शिखर धवन कप्तान बनकर गए. कोई मायूसी नहीं. आईसीसी T20 World Cup 2021 में उन्हें 15 खिलाड़ियों तक में शामिल नहीं किया गया. तो क्या हुआ? अगर वापसी करने का हौसला हो तो अय्यर जैसा, दूसरों को ग़लत साबित करने का जूनून हो तो अय्यर जैसा, मौके पर चौका की बजाए छक्का लगाने का इरादा हो तो अय्यर की तरह. इस युवा खिलाड़ी से कितना कुछ आप सीख सकते हैं. बहुत खूब अय्यर, ऐसी ही बनी रहे तुम्हारी शानदार डगर…


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: November 29, 2021, 11:28 AM IST
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