के एल राहुल को सफेद गेंद में उप-कप्तानी देने और लाल गेंद में नज़रअंदाज़ करने के मायने

बीसीसीआई (BCCI) ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया (Australia) के दौरे के लिए टीम का ऐलान किया जिसमें के एल राहुल (KL Rahul) को वनडे-टी का उपकप्तान बनाया गया है

Source: News18Hindi Last updated on: October 27, 2020, 4:50 PM IST
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के एल राहुल को सफेद गेंद में उप-कप्तानी देने और लाल गेंद में नज़रअंदाज़ करने के मायने
केएल राहुल IPL 2020 में 222 रन बना चुके हैं.
नई दिल्ली. अगले महीने से शुरु होने वाले ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए टेस्ट, वन-डे और टी20 फॉर्मेट के लिए भारतीय चयनकर्ताओं ने अलग-अलग टीमों की घोषणा की है और एक आम फैन के लिए शायद ये पता करना मुश्किल हो कि किस फॉर्मेट में कौन खिलाड़ी खेलेगा और किसमें किसका चयन नहीं हुआ है. सिर्फ 3 बल्लेबाज़ ऐसे हैं जो तीनों फॉर्मेट का हिस्सा हैं कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के अलावा के एल राहुल (KL Rahul) और मंयक अग्रवाल (Mayank Agarwal) तीनों फॉर्मेट के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर होंगे जबकि गेंदबाज़ों में मोहम्मद शमी (Mohammad Shami), जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) और नवदीप सैनी हर फॉर्मेट में शिरकत करेंगे.

उप-कप्तानी का चयन दिलचस्प
कप्तान भी तीनों फॉर्मेट में एक ही है-कोहली, लेकिन उप-कप्तानी का चयन बेहद दिलचस्प है. टेस्ट क्रिकेट में एक बार फिर से अंजिक्य रहाणे को उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी दी गई है लेकिन वन-डे और टी20 में राहुल होंगे कोहली के सेनापति. अगर रोहित शर्मा फिट होते तो न तो रहाणे को टेस्ट क्रिकेट में और न ही सफेद गेंद की क्रिकेट में राहुल को उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी मिलती. यहां पर पूर्व टेस्ट खिलाड़ी सुनील जोशी की अध्यक्षता वाली चयनसमिति ने शायद एक चूक की है. रहाणे को टेस्ट में उप-कप्तानी देने की बजाए राहुल को ही ये ज़िम्मेदारी दी जा सकती थी. इससे तो पहला फायदा ये होता कि पूरी टीम को ये पता होता कि कोहली के बाद टीम मैनेजमेंट में सबसे अहम खिलाड़ी राहुल हैं और उन्हें पूरी तरह से भविष्य के कप्तान के तौर पर तैयार किया जा रहा है. वैसे भी भारतीय क्रिकेट में लंबे समय बाद एक ऐसा खिलाड़ी आया है जो महेंद्र सिंह धोनी और कोहली की ही तरह तीनों फॉर्मेट में न सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर बल्कि कप्तान के तौर पर भी अपनी जगह बनाए रखने का माद्दा रखता है. ये बात पिछले एक दशक में भी न तो रहाणे, न अश्विन ना ही रोहित शर्मा के लिए कही जा सकती थी और न ही भविष्य के कप्तानी के दावेदारों में से आने वाले नामों में से श्रेयस अय्यर, शुभमन गिल या फिर ऋशभ पंत के बारे में कही जा सकती है. भारतीय क्रिकेट में गेंदबाज़ों को कप्तानी के तो लायक ही नहीं समझा जाता है नहीं तो बुमराह और शमी की क्रिकेट की समझ उनके कौशल को देखे जाने के बाद उन्हें भी विकल्प के तौर पर देखा जा सकता था.

राहुल पर पूरा भरोसा दिखाने में हिचकिचाकहट क्यों
खैर, रहाणे को टेस्ट में उप-कप्तानी देकर चयनकर्ताओं ने राहुल के साथ पूरी तरह से भरोसा दिखाने में हिचकिचाकहट क्यों दिखाई? जो खिलाड़ी पिछले दौरे(फरवरी-मार्च में न्यूज़ीलैंड) में टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं था तो उसे अचानक ही बिना कुछ किये टेस्ट टीम में वापसी कराने के साथ-साथ उप-कप्तानी देना भी थोड़ी ज़्यादा मेहरबानी वाली बात होती. पूर्व खिलाड़ी संजय मांजरेकर ने तो पिछली 5 टेस्ट सीरीज़ में राहुल की नाकामी का हवाला देते हुए कहा कि आईपीएल में बढ़िया खेल के चलते राहुल को टेस्ट टीम में चुना जाना ही सही नहीं है. लेकिन, मांजरेकर और कई जानकार ये भूल रहें हैं कि राहुल अब सिर्फ एक बल्लेबाज़ नहीं बल्कि ‘संपूर्ण पैकेज’ के तौर पर टेस्ट टीम में वापस आ रहें हैं. राहुल जहां ओपनर की भूमिका निभा सकते हैं वहीं मिडिल ऑर्डर में भी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं. ज़रुरत पड़ने पर वो कीपिंग दस्ताने भी पहन सकते हैं. ऑस्ट्रलियाई पिचों पर समान उछाल होने के चलते पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे समेत कई जानकार राहुल को टीम में विकेट-कीपर बल्लेबाज़ के तौर पर भी प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की वकालत तक करते हैं.

न्यूज़ीलैंड दौरे पर भी जानकार हुए थे हैरान
न्यूज़ीलैंड दौरे पर राहुल ने पहले टी20 और उसके बाद वन-डे क्रिकेट में तहलका मचा दिया था लेकिन वो टेस्ट दौरे का हिस्सा नही थे क्योंकि टीम पहले ही चुनी जा चुकी थी. उस दौरे पर मैं भी टीम इंडिया के साथ न्यूज़ीलैंड में था और इयन स्मिथ से लेकर ब्रैंडन मैक्कलम, क्रेग मैकमलिन से लेकर क्रिस हैरिस तक कई स्थानीय खिलाड़ियों ने राहुल के टेस्ट टीम में नहीं होने पर बहुत हैरानी जतायी थी. अगर चयनकर्ता ओपनर पृथ्वी शॉ की नाकामी को नजरअंदाज कर उनपर दांव खेल सकते थे तो राहुल के साथ तो ऐसा रवैया अख़्तियार किया ही जा सकता था.कोहली न सही रोहित के विकल्प तो बन ही सकते हैं राहुल
चूंकि, इस दौरे पर रोहित शर्मा का खेलना निश्चित नहीं है और ऐसे में राहुल के लिए टेस्ट क्रिकेट में फिर से खुद को स्थापित करने का ये शानदार मौका साबित हो सकता है. चयनकर्ता चाहते तो आसानी से उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी भी राहुल को दे सकते थे जिससे शायद कोहली को भी ये संदेश जाता कि भविष्य में कप्तानी को लेकर उनके पास ठोस विकल्प हैं. पिछले एक दशक में भारतीय क्रिकेट ने देखा है कि जो कोई खिलाड़ी भी कोहली की कप्तानी को दूर से भी चुनौती देने में सक्षम दिखता था, उसका किसी एक फॉर्मेट से पत्ता कट जाता. 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट में रहाणे ने मुश्किल मौके पर कप्तानी संभाली और टीम को जीत दिलायी लेकिन जीत के बाद प्रेस कांफ्रेंस में वाहावाही लूटने के लिए नियमित कप्तान कोहली प्रकट हो गए.

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रहाणे जो कि टेस्ट क्रिकेट के शानदार खिलाड़ी हुआ करते थे उन्हें साउथ अफ्रीका में 2018 के दौरे पर पहले 2 टेस्ट मैच में ड्रॉप कर दिया गया. उसक बाद तो मुंबई के इस बल्लेबाज़ का आत्म-विश्वास ऐसा डोला कि अब उनसे आईपीएल तक में रन नहीं बन रहें हैं. रोहित को वन-डे और टी20 में बेहतरीन खेल और कप्तानी का जलवा दिखाने के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में सही तरीके से मौके नहीं दिए गए जिससे कि वो अपनी जगह स्थायी कर पाते और कोहली के सीरीयस विकल्प के तौर पर उभर कर सामने आ पाते.
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: October 27, 2020, 4:50 PM IST
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