Sunday Special: चौकों-छक्कों के मेले में कप्तानों के लिए आखिर 1 रन क्यों है सबसे अहम?

क्रिकेट में जीत के लिए केवल एक रन का अंतर ही काफी होता है औऱ कई बार यह कप्तानों के लिए जीत और हार का फैसला कर देते हैं

Source: News18Hindi Last updated on: September 28, 2020, 2:07 PM IST
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Sunday Special: चौकों-छक्कों के मेले में कप्तानों के लिए आखिर 1 रन क्यों है सबसे अहम?
महेंद्र सिंह धोनी को कई मौकों पर एक रन के अंतर के कारण हार का सामना करना पड़ा है
नई दिल्ली. आईपीएल (IPL) के हर सीज़न, हर मुकाबले में इतने चौके-छक्के लगतें हैं कि आपको असाधारण से असाधरण शॉट भी कुछ दिनों के बाद याद नहीं रहते हैं. बावजूद इसके चौके-छक्के के मेले वाले आईपीएल (IPL) में कप्तानों के लिए अक्सर 1 रन की अहमियत बहुत ज़्यादा होती है. वैसे तो क्रिकेट के मूल स्वभाव में ही 1 रन की अहमियत रची-बसी है क्योंकि जीत और हार के बीच का फर्क इसी 1 रन से ही शुरू होता है. चाहे वह खेल आप अपने छत के ऊपर खेल रहें हैं, गली-मोहल्ले में, पार्क में या फिर अंत्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में. क्रिकेट इतिहास में अलग-अलग फॉर्मेट में नतीजों पर अगर आप नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि ये सिर्फ कहने की बात है कि 1 रन बहुत अहम होता है.

टेस्ट मैच में केवल एक बार एक रन के अंतर से हुआ है जीत का फैसला
क्रिकेट के सबसे पुराने और महान फॉर्मेट टेस्ट क्रिकेट को करीब 143 साल हो गए हैं और 2393 मैच अब तक खेले जा चुके हैं. बावजूद इसके सिर्फ एक ही मौका ऐसा आया है जब मैच का फैसला 1 रन के अंतर से हुआ है. वेस्टइंडीज (West Indies) ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) को 1993 के एडिलेड टेस्ट में एक रन से हराया था और 0-1 से पीछे चल रही टेस्ट सीरीज़ में 1-1 से पहले वापसी की, इसके बाद अगला टेस्ट मैच पर्थ (Perth) खेला गया और वहां भी उन्होंने बाजी मारी और सीरीज़ भी जीत कर लौटे. यानि टेस्ट क्रिकेट में पहली और आखिरी बार एक रन ने न सिर्फ एक मैच बल्कि 5 मैचों की सीरीज़ का भी निर्णायक फैसला तय किया.

हां, कई लोग ये तर्क ज़रूर दे सकते हैं कि दो मौकों पर दो टीमों को एक रन की कमी के चलते जीत नसीब नहीं हुई. ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच 1960 में और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 1986 में टेस्ट मैच दो बार टाई यानी बिल्कुल बराबरी पर छूटे. अगर किसी एक टीम ने भी 1 रन ज़्यादा बना लिया होता तो नतीजा कुछ और हो सकते था.
वनडे में वर्ल्ड कप में भी देखने को मिला एक रन के अंतर का असर
ख़ैर, टेस्ट के बाद वन-डे क्रिकेट के उदय से 1 रन के अंतर से नतीजे वाले मैचों की संख्या स्वभाविक तौर पर बढ़ी क्योंकि इस फॉर्मेट टेस्ट की ही तरह ड्रॉ का विकल्प टीमों के पास नहीं था. अब तक खेले गए 4261 वन-डे मैचों में सिर्फ 32 मौके पर टीमों ने 1 रन के अंतर से मैच जीता है. 38 मैच यहां भी टाई हुए हैं जिसमें से दो मैचो तो वर्ल्ड कप इतिहास के महानतम मैचों में शुमार हैं.

इंग्लैंड में खेले गये 1999 वर्ल्ड कप के समीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका का मैच टाइ हो गया था लेकिन तकनीकी कारण के चलते कंगारू पहले फाइनल में पहुंचे और बाद में ट्रॉफी भी जीत ली. पिछले साल एक बार फिर से चमत्कारिक इत्तेफाक के ज़रिए इस बार वर्ल्ड कप का ही एक और अहम मैच, या यू कहें सबसे अहम मैच टाइ हो गया. लेकिन, सुपर ओवर का नया नियम भी गुत्थी नहीं सुलझा पाया और आखिर में ज़्यादा चौके लगाने वाली इंग्लैंड को जीत मिली.वन-डे के बाद नई सदी में टी20 का जन्म हुआ और क्रिकेट के सबसे तेज़ फॉर्मेट में 1 रन के अंतर से मैच के फैसले और ज़्यादा संख्या में होने लगे. अब तक खेले गये 1097 मैचों में 15 बार मैचों का नतीजा 1 रन के अंतर से हुआ है. 19 मैचों में मुकाबले टाइ हुए और इसी के चलते क्रिकेट ने ऐसे नज़दीकी मामलों को निपटाने के लिए बॉल आउट और फिर सुपर ओवर के नियम ईजाद किए गए.

आईपीएल में हुए हैं कई रोमांचक मैच
आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में जहां पर रोमांच की कमी कभी भी आपको दिखाई नहीं देती है, उस लीग में हर किसी को 1 रन के अंतर से मैच का फैसला होने का इंतज़ार हर फैंस को होता है. आखिर 1 विकेट से जीत या 1 रन से जीत से ज़्यादा रोमांचक और क्या हो सकता है! लेकिन, अजीब बात है कि अब तक अपने 13वें सीज़न में चल रहे आईपीएल में सिर्फ 9 सुपर ओवर वाले मुकाबले हुए हैं. इस सीज़न दिल्ली ने पंजाब को सुपर ओवर में हराया है. जहां तक 1 रन के अंतर से मैच जीतने की बात है तो ऐसा सिर्फ 10 मौके पर ही हुआ है.

एक रन के मामले में अनलकी रहे हैं महेंद्र सिंह धोनी
लेकिन, इन 10 मैचों के दौरान 2 मौके ऐसे भी रहें है जिन्होंने न सिर्फ मैच बल्कि आईपीएल चैंपियन का भी फैसला किया है, और यही वजह है कि आईपीएल में हर कप्तान को 1 रन की अहमियत बहुत ज़्यादा लगती है. ख़ासकर, उन दो कप्तानों को जिन्होंने आईपीएल की 12 ट्रॉफी में से 7 अपने नाम की है.

कहतें हैं, कि बिजली एक ही जगह पर दोबारा दस्तक नहीं देती है. लेकिन, आईपीएल के सबसे लकी माने जाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इस 1 रन के चलते एक नहीं बल्कि 2 मौके पर अनलकी रहें हैं. उनके हाथ से आयी आईपीएल ट्रॉफी 1 नहीं बल्कि 2-2 बार छिटक गई. लेकिन, रोहित शर्मा को ऐसे 1 रन से शिकायत नहीं बल्कि खुशी है क्योंकि 2017 और 2019 में दोनों मौकों पर मुंबई इंडियंस ने ख़िताब पर कब्ज़ा 1 रन के अंतर के चलते ही किया. धोनी 2017 में पुणे सुपरजाएंट्स के लिए कप्तानी कर रहे थे तो पिछले साल अपनी सदाबहार टीम चेन्नई सुपर किंग्स के लिए.

ज़रा सोचकर देखिये कि अगर 1 रन की अहमयित न होती तो धोनी के पास आईपीएल में 3 नहीं बल्कि 5 ट्रॉफी होती और वो सबसे कामयाब कप्तान होते. रोहित शर्मा, जिन्हें आईपीएल में कई जानकार धोनी की बराबरी स्तर वाला कप्तान मानतें है, 1 रन की कमी के चलते अभी सिर्फ 2 ट्रॉफी पर ही टिके होते और उनमें और गौतम गंभीर में कोई फर्क नहीं होता.
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: September 28, 2020, 2:05 PM IST
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