युवराज सिंह को अपने हीरो विवि रिचर्ड्स की बात सुननी चाहिए या शाहिद अफरीदी की!

विवि रिचर्ड्स (viv richards) का कहना था कि किसी भी खिलाड़ी के लिए संन्यास बेहद कठिन फैसला होता है. संन्यास एक तरह से मृत्यु की तरह है, जहां से कोई वापसी नहीं हो सकती.

Source: News18Hindi Last updated on: September 16, 2020, 3:54 PM IST
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युवराज सिंह को अपने हीरो विवि रिचर्ड्स की बात सुननी चाहिए या शाहिद अफरीदी की!
युवराज सिंह ने पिछले साल इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था (फाइल फोटो)
दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में से एक सर विवियन रिचर्ड्स (viv richards)  का मैनें 2007 वर्ल्ड कप के दौरान जमैका के किंस्टन शहर में एक टीवी इंटरव्यू लिया था. रिचर्ड्स से मैनें उस दौरान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के संघर्ष और भारत में उनके रिटायरमेंट की चर्चा से जुड़ा एक सवाल पूछा था. जिस पर सचिन के बहुत बड़े फैन रिचर्ड्स ने एक शानदार जवाब दिया था. रिचर्ड्स का कहना था जब आप किसी को संन्यास के लिए कहते हैं तो आपको काफी संभलकर बोलना पड़ता है, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी के लिए संन्यास बेहद कठिन फैसला होता है. संन्यास एक तरह से मृत्यु की तरह है, जहां से कोई वापसी नहीं हो सकती है. आपने एक बार रिटायरमेंट की घोषणा कर दी तो आप बहुत लंबे वक्त तक रिटायर ही हो जाते हैं.

रिचर्ड्स का ये वाकया मेरे जेहन में अचानक ताजा हुआ, क्योंकि 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जिताने में अहम किरदार निभाने वाले युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने संन्यास के करीब 15 महीने बाद फिर से क्रिकेट में वापसी करने की चर्चा करके हर किसी को चौंका दिया. ये सही है कि युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नहीं, बल्कि पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट में वापसी के लिए बीसीसीआई का दरवाजा खटखटाया है. उनके घरेलू राज्य पंजाब को अपने ‘युवा खिलाड़ियों के मार्ग-दर्शन के लिए’ युवराज जैसे अनुभवी खिलाड़ी की जरूरत  है, तो खुद युवराज के मुताबिक वो पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट में (टी20 फॉर्मेंट में) ट्रॉफी जीतना चाहते हैं.

समझ से परे हैं युवराज की दलील
दिलचस्प बात ये है कि युवराज ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट(चार-दिवसीय रणजी ट्रॉफी) में वापसी की बात नहीं की. आखिर हरभजन सिंह के साथ अगर घरेलू क्रिकेट की कोई ट्रॉफी जीतनी है तो वो रणजी ट्रॉफी ही हो सकती थी, जिसे पंजाब ने सिर्फ 1 बार 1993 में जीता है जब दोनों पंजाबी दिग्गज स्कूल में थे, तो ऐसे में पंजाब के लिए घरेलू ट्रॉफी जीतने वाली दलील तो समझ से परे हैं.
दूसरी बात है कि अगर युवराज शुभमन गिल जैसे युवा पंजाबी प्रतिभा की मदद करना चाहते है तो वो कोचिंग का रुख अख्तियार कर सकते थे, कुछ राहुल द्रविड़ की तरह. खुद युवराज ने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन के साथ मई के महीने में इंस्टाग्राम पर चैट के दौरान कोचिंग में (खास तौर पर सीमित ओवर क्रिकेट में) हाथ आजमाने की बात की थी. फिर लॉकडाउन के दौरान युवी ने अपनी फिटनेस पर इतनी मेहनत की और इतने फिट हो गए कि उन्हें एहसास हुआ कि फिर से बल्ला पकड़ा जाए? लेकिन युवराज सिर्फ टी20 फॉर्मेट खेलना चाहते हैं, आखिर क्यों? टीम इंडिया में वापसी की तो कोई उम्मीद है ही नहीं, क्योंकि पिछले साल रिटायरमेंट से पहले जिस युवराज को आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में कोई भाव नहीं दे रहा था तो फिर टीम इंडिया की राह तो बहुत दूर की बात है.

आखिर क्‍या जरूरत थी घोषणा करने की
2019 के ऑक्शन के शुरू में तो उनपर किसी ने बोली भी नहीं लगाई. जैसे-तैसे मुंबई इंडियंस ने उन्हें टीम में शामिल तो कर लिया, लेकिन वो सिर्फ 4 मैच ही खेल पाए. उससे पहले 2018 में किंग्स इलेवन पंजाब के लिए भी वो 2018 में 6 मैचों में 65 रन ही बना पाए थे. बहरहाल पिछले हफ्ते ही युवराज के एक ऑस्ट्रेलियाई मैनेजर ने खुलासा किया कि वो उनके लिए बिग बैश लीग का करार ढूंढ रहे हैं, लेकिन टीमों ने युवराज के नाम पर बहुत दिलचस्पी नहीं दिखायी. अटकलें इस बात की भी थी कि युवी इस साल इंग्लैंड में होने वाले नये टूर्नामेंट ‘द हंड्रेड’ में खेल सकतें हैं, लेकिन वो टूर्नामेंट ही एक साल के लिए टल गया है.अब आप ये सोच रहें होंगे कि आखिर जब युवराज अपने संन्यास के फैसले को लेकर उतने निश्चित नहीं थे तो क्या जरूरत थी, उन्हें ऐसी घोषणा करने की? भई, हरभजन सिंह ने भी तो संन्यास की कोई घोषणा नहीं की है. भज्जी को पता है वो टीम इंडिया के लिए अब दोबारा नहीं खेल पाएंगे, लेकिन जब मन होता है तो आईपीएल में खेल लेते हैं और जब मन होता है तो कमेंट्री कर लेतें हैं. ये विकल्प तो युवी के पास भी था.

छोटे फॉर्मेट में बड़े ब्रांड का था आभास
विकल्प तो था, लेकिन युवी की हसरत कुछ और थी. युवराज को शायद ऐसा आभास था कि वो टी20 फॉर्मेंट के एक बहुत बड़े खिलाड़ी होने के साथ-साथ बड़े ब्रांड भी हैं. ऐसे में अगर उन्हें पहली विदेशी लीग में (ग्लोबल टी20 लीग, कनाडा, अगस्त 2019 में टोरंटो नेशनल्स के लिए) खेलने की अनुमति बीसीसीआई से मिली तो इसकी वजह थी उनका हर फॉर्मेट से रिटायर होना. इसके बाद नवंबर 2019 में युवी अबु धाबी में टी10 में मराठा अरेबियंस के लिए खेले. युवी की उम्मीद थी कि उन्हें कैरेबियन प्रीमियर लीग में भी कोई टीम शामिल कर लेगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.
ऐसा नहीं है कि युवी दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने संन्यास के वापसी की बात की हो. पाकिस्तान में इमरान खान से इसकी शुरुआत हुई तो शाहिद अफरीदी  ने अनगिनत बार वापसी करके संन्यास शब्द का ही मजाक बना डाला. अंतरराष्ट्रीय खेल इतिहास की बात करें तो ब्योन बोर्ग, माइकल जॉर्डन, मोहम्मद अली, माइकल शुमाकर, इयान थोर्प और मार्क स्पिट्ज़ सरीखे दिग्गजों ने रिटायरमेंट से वापसी करने के बाद फैंस के सामने अपनी पुरानी करिश्माई छवि को धूमिल ही करवाया.

कोई फैन नहीं चाहेगा युवी की वापसी
युवी का कोई भी फैंस ऐसा नहीं चाहेगा कि इस शानदार बल्लेबाज की विदाई फिर मायूस तरीके से हो (आखिर पहली विदाई भी तो युवराज ने मैदान के बाहर से ही की थी). जब नाम युवराज का आये तो एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाला और कैंसर को मात देकर क्रिकेट मैदान में वापसी करने वाले जांबाज खिलाड़ी की याद आए, न कि किसी छोटे-मोटे घरेलू टी20 मैच में वापसी करके फिर से कुछ समय बाद वापस बल्ला टांगने वाले खिलाड़ी की.
ब्लॉगर के बारे में
विमल कुमार

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: September 16, 2020, 3:45 PM IST
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