नुसरत जहां की शादी का विवाद और सात बड़े कानूनी पहलू

निखिल ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि उनका नुसरत के साथ पिछले नवंबर 2020 से कोई सम्बन्ध नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि नुसरत का भाजपा नेता यश दासगुप्ता के साथ रिश्ता है. इंडियन पेनल कोड (आईपीसी) की धारा 497 के तहत व्यभिचार यानी विवाहित महिला के साथ सम्बन्ध भारत में बड़ा अपराध माना जाता था. सुप्रीम कोर्ट ने सन 2018 के फैसले से व्याभिचार कानून की आपराधिकता को रद्द कर दिया है.

Source: News18Hindi Last updated on: June 10, 2021, 10:49 PM IST
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नुसरत जहां की शादी का विवाद और सात बड़े कानूनी पहलू
नुसरत ने निखिल के साथ 3 साल की दोस्ती के बाद टर्की में शादी की थी (फोटो साभारः @nusratchirps/Instagram)
टीएमसी सांसद नुसरत जहां ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि निखिल जैन के साथ टर्की में हुई शादी को भारत में रजिस्टर नहीं करवाया गया, इसलिए उसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है. उनका यह भी दावा है कि यह एक लिव-इन रिलेशनशिप का मामला था, जिसमे तलाक लेने का कोई तुक नहीं बनता. उनके कथित पति निखिल जैन ने शादी को रद्द करने के लिए अदालत में जो केस दायर किया है, उसके कानूनी दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुए.

नुसरत ने निखिल के साथ 3 साल के दोस्ताने के बाद टर्की में शादी थी तो वे अब इसे लिव-इन रिलेशनशिप का नाम कैसे दे सकती हैं? इस मामले में सात बड़े कानूनी पहलु उभर रहे हैं. नुसरत ने 2019 में अपनी कथित शादी के बाद सिंदूर, मंगलसूत्र, शादी का जोड़ा, मेहंदी, बिंदी आदि प्रतीकों का इस्तेमाल करके हिन्दू पद्धति से शादी का एहसास कराया था. इसके खिलाफ उलेमाओं ने उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया था.

दो अलग धर्मों की शादी के लिए भारत में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कानूनी प्रावधान हैं. दो हिन्दू विदेश में शादी करने के बाद भारत में फिर से शादी की रस्म कर लें तो उनकी शादी हिन्दू विवाह अधिनियम से संचालित हो सकती है.

विदेशों में एक ही धर्म के या अलग-अलग धर्मों के दो लोग शादी करें, तो उन सभी का भारत में रजिस्ट्रेशन विदेशी विवाह अधिनियम के तहत ही होगा. नुसरत जहां मुस्लिम हैं या उन्होंने शादी के पहले या शादी के बाद जैन या हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया, उससे उनके इस कानूनी विवाद पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.
विदेशों में हुई शादी की भारत में वैधता
दो वयस्क लोग आपसी रजामंदी से विदेश में शादी कर सकते हैं, लेकिन भारत में रजिस्ट्रेशन के लिए उनमे से एक या फिर दोनों का भारतीय नागरिक होना जरूरी है. इस कानून के तहत विदेशी देश, विदेशी देश का समुद्र तट, अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र, जहाज और भारत के बाहर कोई भी स्थान शामिल है. इसके तहत विदेशों में भारतीय दूतावास में विवाह अधिकारी के सामने भी भारतीयों द्वारा शादी का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है.

विदेशों में हुई शादी को भारत में मान्यता दिलवाने के लिए फॉरेन मैरिज एक्ट 1969 की धारा 14 के तहत शादी के सर्टिफिकेट लेने का प्रावधान है. इसके बाद उन लोगों के वैवाहिक और तलाक आदि के मामलों का निर्धारण स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत होता है. नुसरत मामले में यदि शादी का रजिस्ट्रेशन भारत में नहीं हुआ. तो फिर स्पेशल मैरिज एक्ट कानून के तहत उनके तलाक या शादी को रद्द कराने की प्रक्रिया संभव नहीं दिखती.क्या इस शादी को टर्की में तोड़ा जा सकता है?
सिविल क़ानून की भाषा में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट है, जिसे लागू करने के लिए उसी धरती के क़ानून और अदालत का क्षेत्राधिकार होता है. इसीलिये विदेशों में किए गए किसी भी कॉन्ट्रैक्ट को भारत में लागू करवाना मुश्किल होता है. टर्की पश्चिम एशिया में स्थित इस्लामिक देश है, जहां पर शादी के लिए सिविल कोड और अन्य कानून बने हैं.

टर्की में विदेशियों द्वारा शादी कराने के लिए इच्छुक व्यक्तियों को अपने देश की नागरिकता आदि के कागज़ दिखाना जरूरी है. यदि नुसरत जहां और निखिल जैन की शादी टर्की में विधि सम्मत तरीके से हुई और वहां पर रजिस्ट्रेशन हुआ है तो फिर उन्हें टर्की के कानून के अनुसार शादी को रद्द कराने या फिर तलाक लेने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है.

नुसरत जहां और यशदास गुप्ता से सम्बन्ध और व्याभिचार का क़ानून
निखिल ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि उनका नुसरत के साथ पिछले नवंबर 2020 से कोई सम्बन्ध नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि नुसरत का भाजपा नेता यश दासगुप्ता के साथ रिश्ता है. इंडियन पेनल कोड (आईपीसी) की धारा 497 के तहत व्यभिचार यानी विवाहित महिला के साथ सम्बन्ध भारत में बड़ा अपराध माना जाता था.

सुप्रीम कोर्ट ने सन 2018 के फैसले से व्याभिचार कानून की आपराधिकता को रद्द कर दिया है. इसलिए नुसरत जहां की निखिल जैन के साथ यदि वैध शादी होती तो भी उनका अन्य व्यक्ति के साथ रिश्ता या गर्भधारण, वर्तमान कानून के हिसाब आपराधिक नहीं होता. यदि यह शादी वैध होती तो निखिल जैन इस तीसरे नापाक रिश्ते के आधार पर नुसरत के खिलाफ तलाक का मामला दायर कर सकते थे.


संपत्ति और पैसों पर विवाद
नुसरत जहां ने कहा है कि निखिल जैन उनके बैंक खाते से पैसा निकालने के साथ उनकी ज्वेलरी और अन्य सामान वापस नहीं कर रहे. परंपरागत मामलों में महिलाओं के पास स्त्री धन, ससुराल के घर पर अधिकार और घरेलु हिंसा आदि के अनेक कानूनी हथियार होते हैं, जिनके इस्तेमाल से पति के खिलाफ सिविल और आपराधिक मुक़दमे चलाये जा सकते हैं.

इस मामले में क्योंकि नुसरत जहां खुद को शादीशुदा नहीं मान रही. इसलिए उन्हें निखिल जैन से अपना पैसा, सामान और संपत्ति आदि हासिल करने के लिए मालिकाना हक़ प्रूव करने के साथ सिविल और आपराधिक क़ानून के तहत मामले चलाने होंगे. इन आरोपों के पीछे उनकी रणनीति भी हो सकती है, जिससे वो निखिल के साथ अपनी शर्तों पर सुलह करके शादी को ख़त्म कराना चाहती हों.

अब लिव-इन रिलेशनशिप के कानून पर गंभीर बहस हो
21वीं सदी के आधुनिक समाज में अब पुरानी पिछली शताब्दी के कानून बेमानी होते जा रहे हैं. भारत में लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल है और इन्हें बदलने पर गंभीर बहस चल रही है. अदालतों ने लिव-इन रिलेशनशिप को अनौपचारिक मान्यता देना शुरू कर दिया है. अब शादी के बगैर ही स्त्री और पुरुष सिंगल पेरेंट्स बन सकते हैं.

लिविंग रिलेशनशिप में डोमेस्टिक वायलेंस के तहत मामले भी दर्ज हो सकते हैं. ऐसे जोड़ों को पुलिस की सुरक्षा देने के लिए भी अनेक अदालतों ने आदेश दिए हैं. भारत में परंपरागत शादी सात जन्मों का रिश्ता माना जाता है. लेकिन नयी पीढ़ी के कई युवा अब एक जन्म के बंधन में बंधने के लिए भी तैयार नहीं हैं, जिसमे शादी तोड़ने के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़े.

जिस तेजी से समाज में डिस्पोजेबल कल्चर के बदलाव हो रहे हैं, उसमे कई युवा शादी की बजाय लिव-इन रिलेशनशिप को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में समलैंगिकता को अनापराधिक घोषित कर दिया, लेकिन इसे कानूनी मान्यता अभी तक नहीं मिली है. इससे परंपरागत कानून और आधुनिक समाज के बीच खाई बढ़ने से अराजकता भी बढ़ गयी है.

पिछले कई दशकों से यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने पर बहस हो रही है, पर क़ानून में बदलाव नहीं हुए. नुसरत और कई अन्य मामलों के बाद सरकार और संसद को लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर स्पष्ट कानून बनाने की ठोस पहल करनी होगी.


संसद के विशेषाधिकार के हनन का मामला
नुसरत जहां ने लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद, टर्की में जाकर निखिल से शादी की. वहां से लौटकर उन्होंने सांसद के तौर पर शपथ लेते समय अपने नाम के साथ जैन शब्द लगाया. लोकसभा के दस्तावेजों में खुद को विवाहित बताते हुए उन्होंने पति का नाम भी लिखवाया है. इस बारे में उन्होंने चुनाव के पहले कोई गलत डिक्लेरेशन नहीं दिया, इसलिए इस आधार पर चुनाव को रद्द करने का मामला नहीं बनता.

लेकिन संसद के दस्तावेजों में उन्होंने खुद को विवाहित घोषित किया और अब खुद को लिव-इन रिलेशनशिप में बता रही हैं. अदालतों के साथ यह विवाद संसद के विशेषाधिकार के हनन का संगीन मामला बन सकता है. कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी की शिक्षा और डिग्री के मामले में डा. सुब्रमण्यम स्वामी ने जब कानूनी कारवाई शुरू की तो श्रीमती गांधी ने इसे टाइपिंग की गलती बताकर, पूरे विवाद से पल्ला ही झाड़ लिया.

नुसरत ने अनेक इंटरव्यू में खुद को विवाहित बताया, जो सबूत के तौर पर सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं. नुसरत बंगला फिल्मों की सफल अभिनेत्री हैं. लेकिन लोकसभा स्पीकर के सामने खुद को सही साबित करने के लिए अभिनय से ज्यादा उन्हें क़ानून और नैतिकता की शक्ति चाहिए होगी.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
विराग गुप्ता

विराग गुप्ताएडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान तथा साइबर कानून के जानकार हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्र और पत्रिकाओं में नियमित लेखन के साथ टीवी डिबेट्स का भी नियमित हिस्सा रहते हैं. कानून, साहित्य, इतिहास और बच्चों से संबंधित इनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. पिछले 4 वर्ष से लगातार विधि लेखन हेतु सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा संविधान दिवस पर सम्मानित हो चुके हैं. ट्विटर- @viraggupta.

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First published: June 10, 2021, 8:47 PM IST
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