कोरोना की तीसरी लहर के पहले वैक्सीन का पेटेंट सस्पेंड हो तो भारत के साथ दुनिया बचेगी

अमेरिका के बाद यूरोपियन यूनियन, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों की सहमति मिलने के आसार बढ़ने से भारत का वैश्विक व्यवस्था में प्रभाव भी बढेगा. लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि अमीर देशों की सरकारों के फैसलों में फार्मा कंपनियों की भारी दखलअंदाजी रहती है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 7, 2021, 9:15 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
कोरोना की तीसरी लहर के पहले वैक्सीन का पेटेंट सस्पेंड हो तो भारत के साथ दुनिया बचेगी
रामाफोसा ने इस छूट को लेकर दुनिया भर में बन रही सहमति की.
दुनिया में 43 करोड़ लोग कोरोना से प्रभावित हैं और 32 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस की वजह से मौत का शिकार हो गए हैं. पिछले साल अक्टूबर में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सामने भारत और दक्षिण अफ्रीका ने कोरोना की वैक्सीन यानी टीका से जुड़े पेटेंटस को सस्पेंड कराने का प्रस्ताव दिया था. उस पर अब अमेरिका की सहमति मिलने से पूरी मानवता का उत्साह बढ़ गया है भारत में 17 करोड़ से ज्यादा टीके की खुराक देने का काम हो चूका है, लेकिन दुनिया के 120 देशों में अभी तक वैक्सीन ही नहीं पंहुची.

भारत में 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन देने का राष्ट्रीय अभियान, वैक्सीन की कमी के वजह से सफल नहीं हो पा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 6 मई तक लगभग 3.2 करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज और 9.9 करोड़ लोगों को वैक्सीन की सिर्फ एक डोज मिली है. वैज्ञानिकों की माने तो कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बड़ा खतरा है, इसलिए अब हमें 135 करोड़ की पूरी आबादी को वैक्सीन देने के लिए तैयारी करनी होगी, जिसके लिए पेटेंट कानूनों का सीमित अवधि के लिए सस्पेंशन जरूरी है.

डब्ल्यूटीओ और पेटेंट पर ट्रिप्स का अंतर्राष्ट्रीय समझौता
जेनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ में इस समय 164 सदस्य देश हैं. इसके तहत 1995 में ट्रिप्स समझौते से पेटेंट जैसे बौद्धिक संपदा के अधिकारों की रक्षा के लिए मानक तय किए गए थे. पेटेंट बौद्धिक संपदा का वो कानूनी हक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार एक निश्चित अवधि के लिए सरकार द्वारा किसी व्यक्ति, कंपनी, संस्थान, यूनिवर्सिटी या लैब को दिया है. इसके बाद कोई दूसरा उस तकनीकी का इस्तेमाल करे तो उसे अपराध माना जाता है. भारत के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर ट्रिप्स कानून की धारा 1,4,5 और 7 सीमित अवधि के लिए यदि सस्पेंड हो गयी तो कोरोना की वैक्सीन को अन्य कंपनियां या सरकार बना सकती है. भारत के  प्रस्ताव के पक्ष में एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के अधिकांश देश शामिल हैं.
अमेरिका के बाद यूरोपियन यूनियन, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों की सहमति मिलने के आसार बढ़ने से भारत का वैश्विक व्यवस्था में प्रभाव भी बढेगा. लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि अमीर देशों की सरकारों के फैसलों में फार्मा कंपनियों की भारी दखलअंदाजी रहती है. डब्ल्यूटीओ के प्रस्तावों में यदि सर्वसम्मति से फैसला नहीं हुआ तो फिर उन्हें स्वीकार करना मुश्किल होगा. फैसला अगर हो भी जाय और दवा कंपनियां उसके खिलाफ यदि अदालत चली गयीं तो इस नेक मुहिम को अंजाम तक पंहुचाना मुश्किल होगा.

दवा कंपनियों का विरोध
वैश्विक स्तर पर फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्रेजनेका, जॉनसन एंड जॉनसन जैसी बड़ी कंपनियां, भारत के प्रस्तावों का पुरजोर विरोध कर रही हैं. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने भी पेटेंट को सस्पेंड करने के दुष्परिणाम पर कुछ आशंकाएं जाहिर की हैं. आलोचकों के अनुसार पेटेंट नियमों में छूट देने से ही वैक्सीन का निर्माण शुरू नहीं हो सकता. वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन चाहिए, जिसकी इस समय भारी किल्लत है. दवा कंपनियों के अनुसार यदि पेटेंट अधिकार छोड़ने की परंपरा शुरू हुई तो अगली महामारी के लिए वैक्सीन बनाने पर भारी निवेश में कमी आएगी. कंपनियों का यह भी कहना है कि यदि वैक्सीन बनाने की खुल्लम खुल्ला छूट दी गई तो फिर क्वालिटी में गिरावट के साथ नकली वैक्सीन बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा. लेकिन फिलहाल तो पूरा तकाजा मानवता को बचाने का है. कई दशक पहले एड्स के खिलाफ जंग भी पेटेंट नियमों में ढील से संभव हुई थी.दवा कंपनियों को यह भी समझने की जरूरत है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन और बिक्री बढ़ने से कंपनियों के कुल मुनाफे में कोई कमी नहीं आएगी. अमीर देशों को यह समझना ही होगा कि कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी गरीबी और अमीरी का भेद नहीं देखती. दुनिया के किसी भी देश में यदि कोरोना का संक्रमण बना रहता है तो महामारी का खतरा पूरे विश्व पर कायम रहेगा. इसलिए दवा, बचाव और वैक्सीन के मुद्दे पर सभी देशों को मिलकर लड़ने की जरूरत है.

भारत में भी पेटेंट क़ानून सस्पेंड करके वैक्सीन बन सकती है
भारत में पेटेंट का कानून 1970 बना था. 2005 तक भारत में प्रोसेस पेटेंट का कानूनी सिस्टम था. इसकी वजह से सस्ती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में सहूलियत हुई, जिसका आम जनता को बड़ा फायदा मिला. डब्ल्यूटीओ के दबाव के बाद क़ानून में बदलाव से प्रोडक्ट पेटेंट का सिस्टम बना, जिसकी वजह से भारत में दवाओं और वैक्सीन का संकट बढ़ा. भारत में फिलहाल दो वैक्सीन के निर्माण की इजाजत मिलने के साथ रुसी वैक्सीन के इम्पोर्ट को भी अनुमति मिल रही है. कोविशील्ड का निर्माण भारत की एसआरआई कंपनी द्वारा हो रहा है, जिसके लिए उन्हें एस्त्रेज़ेनका और ऑक्सफ़ोर्ड से लाइसेंस से मिला है. जबकि कोवैक्सीन वैक्सीन के पेटेंट के अधिकार भारत बायोटेक और आईसीएमआर संस्थान के पास हैं.

देश में विकसित इस वैक्सीन के रिसर्च और पेटेंट के लिए भारत सरकार ने भी बड़ा निवेश किया है. स्वास्थ्य के इस आपातकाल में मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भारत में अनेक उद्योगों पर ताला लगा दिया गया है. भारत के क़ानून के अनुसार राष्ट्रीय आपदा या संकट के समय सीमित अवधि और गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पेटेंट क़ानून को सस्पेंड किया जा सकता है. इससे भारत की अन्य दवा कंपनियों के साथ वैक्सीन की सूचना, शोध, अनुसंधान और तकनीक साझा हो सकेगी.

जल्द ही यदि ऐसा हो सके तो देशवासियों को इस आपदा से बड़ी राहत मिल सकेगी. इसके साथ ही भारत को डब्ल्यूटीओ के माध्यम से भी पेटेंट को सस्पेंड कराने की मुहिम का नेतृत्व करते हुए, पूरी मानवता को इस महामारी से बचाने का प्रयास जारी रखनी चाहिए. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
विराग गुप्ता

विराग गुप्ताएडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान तथा साइबर कानून के जानकार हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्र और पत्रिकाओं में नियमित लेखन के साथ टीवी डिबेट्स का भी नियमित हिस्सा रहते हैं. कानून, साहित्य, इतिहास और बच्चों से संबंधित इनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. पिछले 4 वर्ष से लगातार विधि लेखन हेतु सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा संविधान दिवस पर सम्मानित हो चुके हैं. ट्विटर- @viraggupta.

और भी पढ़ें

facebook Twitter whatsapp
First published: May 7, 2021, 9:05 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर