दिल्ली बॉर्डर सील करना असंवैधानिक, इससे अराजकता और तकलीफ बढ़ेगी

अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से अनलॉक (Unlock 1.0) करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेशों पर दिल्ली के सीएम (Arvind Kejriwal) और एनसीआर के डीएम द्वारा पलीता लगाया जाना असंवैधानिक होने के साथ दुर्भाग्यपूर्ण भी है.

Source: News18Hindi Last updated on: June 1, 2020, 6:45 PM IST
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दिल्ली बॉर्डर सील करना असंवैधानिक, इससे अराजकता और तकलीफ बढ़ेगी
दिल्ली सरकार ने सोमवार को राज्य के सभी बॉर्डर सील करने का फैसला लिया है.
कोरोना (Corona) की संक्रामक बीमारी से स्वास्थ्यगत और लॉकडाउन (Lockdown) से बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक मंदी के बड़े संकट से पूरा देश जूझ रहा है. आम जनता को बचाने के लिए फ्रंटलाइन के अनेक वारियर्स कोरोना के खिलाफ लड़कर शहीद हो रहे हैं. दूसरी तरफ जिलों में डीएम और राज्यों में सीएम द्वारा अपना रिपोर्ट कार्ड बेहतर रखने के चक्कर में मनमाफिक सीलिंग से राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि दी जा रही है. अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से अनलॉक (Unlock 1.0) करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेशों पर दिल्ली के सीएम (Arvind Kejriwal) और एनसीआर के डीएम द्वारा पलीता लगाया जाना असंवैधानिक होने के साथ दुर्भाग्यपूर्ण भी है.

दिल्ली-NCR के करोड़ों लोग परेशान
दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है. इसमें पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों के क्षेत्रों को मिलाने से एनसीआर का बड़ा इलाका बनता है. हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली के 100 से ज्यादा छोटे-बड़े बॉर्डर हैं, जिनमे से 13 बॉर्डर से लोगों का काफी ज्यादा आवागमन है. कई हफ्ते बाद हरियाणा ने सीमाओं को खोलने का एलान किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश की तरफ से सीमाओं की सीलिंग जारी है. अब मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली की सीमाओं को सील करने का एलान किया है. इससे देश के राजधानी में आने-जाने वाले 7-8 लाख वाहनों पर गतिरोध के साथ लाखों लोगों की आजीविका पर संकट बढ़ गया है. नोएडा (Noida), गुरुग्राम (Gurugram), गाजियाबाद और फरीदाबाद में केंद्र सरकार के हज़ारों कर्मचारी रहते हैं. कई उद्योग धंधों के मालिक दिल्ली में रहते हैं तो फैक्ट्री नोएडा में है और मजदूर फरीदाबाद से आते हैं. बॉर्डर सील करके लोगों के रोजगार को छीनने का, दिल्ली सरकार (Delhi Govt) को कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. नौकरी से हाथ धोने वाले लोगों को अब यदि आवागमन से भी वंचित किया गया तो अराजकता और अपराध दोनों बढ़ेंगे.

अनलॉक-1 गाइडलाइन्सबॉर्डर को सील करने का कोई तुक नहीं
अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, ट्रेन और फिर ऑटो चलने के साथ उनमे सोशल डिस्टेंसिंग की छूट मिल रही है. आरोग्य सेतु एप जैसी टेक्नोलॉजी से अब कोरोना के मरीज़ और संक्रमित लोगों की पूरी ट्रैकिंग की जा सकती है. केंद्र सरकार की नयी गाइडलाइन्स के अनुसार अब एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए किसी प्रकार के ई-पास की भी जरूरत नहीं है. ऐसे में दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा देश की राजधानी का बॉर्डर सील किया जाना प्रशासनिक और संवैधानिक दोनों दृष्टि से गलत है. राजधानी में चल रही इस सीलिंग से देश के अन्य राज्यों में गलत सन्देश जा रहा है, जिससे आर्थिक संकट और ज्यादा बढ़ सकते हैं.

दिल्ली सरकार को बॉर्डर सील करने का संवैधानिक अधिकार नहीं 
संविधान के तहत संसद को राज्यों की सीमायें बदलने के साथ उन्हें ख़त्म करने का भी अधिकार है. विदेश से आए कोरोना के खिलाफ पूरे देश को राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक जंग लड़ने की बजाय पंचायत, जिला, राज्य और RWA के स्तर पर लोकल नाकेबंदी से आम जनता की तकलीफें बढ़ रही हैं. संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस जैसे मामले केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन हैं. दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच अधिकारों के बटवारे पर लम्बी कानूनी लड़ाई का 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अंत हुआ था. पिछले सप्ताह ही दिल्ली दंगे मामले में पब्लिक प्रासीक्यूटर की नियुक्ति के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को दिल्ली सरकार ने मंजूरी दी थी. मार्च में पहले चरण के लॉकडाउन के पहले भी दिल्ली सरकार ने घरेलु उड़ानों को बंद करने का जो आदेश दिया था, उसे केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया था. इसलिए अब दिल्ली सरकार को देश की राजधानी के बॉर्डर सील करने के आदेश को तुरंत रद्द करना चाहिए.सीएम और डीएम के आदेशों को पीएम रद्द करें
चौथे चरण का लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद अर्थव्यवस्था को अनलॉक करने के लिए केंद्र सरकार की पहली गाइडलाइंस के अनुसार कंटेनमेंट जोन यानी संक्रमित क्षेत्रों में प्रतिबन्ध लगाने पर राज्य सरकार को पूरा अधिकार है. उत्तर प्रदेश सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार भी अब संक्रमित मरीज़ मिलने पर पूरा इलाका सील करने की बजाय इमारत या एक फ्लोर को सील करने का निर्देश है. राजधानी के बॉर्डर को सील करने के दिल्ली सरकार के इस तुगलकी आदेश के पालन की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी, जो केंद्र सरकार के अधीन है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने पहले ही कहा है कि महामारी के भयावह दौर में न्यापालिका को सुपर गवर्नमेंट की भूमिका नहीं निभानी चाहिए. इसलिए बॉर्डर सील करने के लिए जारी दिल्ली के सीएम और नॉएडा के डीएम के आदेशों को अब केंद्र सरकार को रद्द कराना चाहिए. इससे देश के अन्य राज्यों में बढ़ रही प्रशानिक अराजकता और इंस्पेक्टर राज पर लगाम के साथ, आम जनता के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी हो सकेगा.

(लेखक @viraggupta सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)
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First published: June 1, 2020, 5:43 PM IST
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