कश्मीर में धर्मांतरण पर धर्मगुरुओं की चुप्पी

सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदरजीत सिंह सिरसा ने महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों और मुस्लिम धर्मगुरुओं से दो टूक पूछा है कि आख़िर वो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर चुप क्यों हैं?

Source: News18Hindi Last updated on: June 29, 2021, 7:15 PM IST
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कश्मीर में धर्मांतरण पर धर्मगुरुओं की चुप्पी
म्मू-कश्मीर में धर्मांतरण का मामला सामने आया है. आरोप है कि कश्मीर घाटी में दो सिख लड़कियों को अगवा करके पहले उनका जबरन धर्मांतरण कराया गया. फिर, उनका निकाह उनसे कहीं ज़्यादा उम्र के लोगों से करवा दिया गया. इसे लेकर बवाल मचा हुआ है. सिख समुदाय ने श्रीनगर और जम्मू से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर उतर कर आक्रोश जताया है. इस घटना को लेकर सिखों का ग़ुस्सा चरम पर है.

पाकिस्तानी झलक
सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदरजीत सिंह सिरसा ने महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों और मुस्लिम धर्मगुरुओं से दो टूक पूछा है कि आख़िर वो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर चुप क्यों हैं? उनका आरोप है कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तान की तर्ज़ पर हिंदू और सिख लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और मुस्लिमों से उनके निकाह का सिलसिला योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है. उन्होंने स्थानीय अदालतों पर भी पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. साथ ही, उन्होंने इस मामले की जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से शिकायत करके इस सिलसिले को ख़त्म करने की अपील की है.

कश्मीरियत पर दाग़
सिरसा के आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं, तो पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं है. जबरन धर्मांतरण संगीन अपराध है. ये देश के संविधान की मूल भावना और क़ानून के ख़िलाफ तो है ही, इसे नैतिक रूप से भी सही नहीं ठहराया जा सकता. न प्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन किया जा सकता है और न ही अप्रत्यक्ष रूप से. लेकिन, अगर-मगर, किंतु-परंतु के साथ टिप्पणी करना भी एक तरह से इसका समर्थन करने जैसा ही है. कश्मीर के मामले में तो ये और भी गंभीर हो जाता है. कश्मीर अपनी ख़ास मिलीजुली तहज़ीब के लिए पहचाना जाता है. इसे कश्मीरियत कहते हैं. जबरन के आरोप कश्मीरियत पर बदनुमा दाग़ हैं.

ज़िम्मेदारों की चुप्पी
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जम्मू-कश्मीर के ज़िम्मेदार लोगों ने इस पूरे मामले पर या तो चुप्पी साध रखी है या फिर गोलमोल तरीके से प्रतिक्रिया दी है. राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों में से दो ने इस पूरे मामले पर ख़ामोशी की चादर ओढ़ रखी है. डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला और ग़ुलाम नबी आज़ाद का न बयान आया और न ही कोई ट्वीट. बाक़ी दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने घटना के बहाने सिख-मुस्लिम एकता के दरकने पर तो अफ़सोस जताया है, लेकिन जबरन धर्मांतरण जैसे अतिसंवेदनशील मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा.महबूबा का दर्द, उमर की चिंता
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर इस घटना को लेकर अपना दुख साझा किया है. उन्होंने लिखा है,‘कश्मीर में दो सिख लड़कियों की घटना की ख़बर सुनकर व्यथित हूं. जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम और सिख सबसे बुरे समय में शांति से सह-अस्तित्व में रहे हैं. उम्मीद है कि जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक तेज़ी से पहुंचेंगी.’ सूबे के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी धर्मांतरण के मूल मुद्दे से ज़्यादा इस घटना से सिख-मुस्लिम एकता में पड़ी दरार को लेकर चिंतित दिखे. उन्हें भी ये घटना सिख और मुस्लिम समुदाय के बीच दूरियां पैदा करने की साज़िश लगती है. उन्होंने लिखा है,

‘कश्मीर में सिखों और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करने के किसी भी कदम से जम्मू-कश्मीर को अपूरणीय क्षति होगी. सदियों पुराने रिश्तों को नुकसान पहुंचाने की अनगिनत कोशिशों को झेलते हुए दोनों समुदायों ने एक-दूसरे का साथ दिया है.’


घटना का दूसरा पहलू
इस घटना का दूसरा पहलू भी है. यह भी कहा जा रहा है कि सिख लड़की ने दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्ज़ी से धर्म बदलकर निकाह किया है. इस पर, सिख समुदाय का कहना है कि कोर्ट लड़की को एक सप्ताह के लिए उसके परिवार को सौंप दे. अगर उसके बाद लड़की परिवार के साथ न रहकर अपने शौहर के पास जाना चाहेगी, तो उसे कोई नहीं रोकेगा. उन्होंने अदालत पर भी मुसलमानों का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. सिरसा के मुताबिक़ सिखों ने कोर्ट को घेर कर रखा, तो रात साढ़े 10 बजे पुलिस ने मजबूरन बच्ची को वापस कर दिया.

अदालत पर आरोप
सिखों ने अदालत पर पक्षपात की आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कोरोना प्रॉटोकॉल के बहाने लड़की के परिवार वालों को अंदर जाने से रोक दिया, लेकिन मुस्लिम परिवारों को अंदर जाने दिया गया. ग़ौरतलब है कि भारतीय संविधान बालिग़ लड़के-लड़कियों को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार देता है. अदालत में उनके दिए बयान पर ही जज फैसला करते हैं. अगर लड़की कहे कि उसने अपनी मर्ज़ीं से धर्म बदला है तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक़ अदालतों और पुलिस की ऐसे जोड़े को संरक्षण देने की ज़िम्मेदारी बनती है.

क्या कहता है इस्लाम?
क़ुरआन में मुसलमानों को हिदायत दी गई है कि ईसाई और यहूदी औरतों को छोड़कर दूसरे धर्मों की स्त्रियों से तब तक विवाह ना करो, जब तक कि वो इस्लाम क़ुबूल न कर लें. लेकिन कुरान की इस हिदायत को जबरन किसी का धर्म परिवर्तन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अपनी पहचान छुपाकर झूठ बोलकर या दबाव डालकर तो बिल्कुल नहीं. क्योंकि क़ुरआन में यह भी साफ़ कहा गया है कि दीन के मामले में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है. कोई गैर मुस्लिम इस्लाम तभी क़ुबूल कर सकता है, जब दिल से वह उसे सच्चा दीन माने. किसी को बहला-फुसलाकर, लालच देकर या किसी भी तरह की धमकी देकर इस्लाम क़ुबूल नहीं करवाया जा सकता.

क्या कहता है संविधान?
भारतीय संविधान दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत बग़ैर अपना धर्म बदले शादी करने की इजाज़त देता है. धर्म के मामले में विवाद होने पर इस क़ानून का फ़ायदा उठाया जा सकता है. देश में न जाने कितने लोगों ने इसे कानून के तहत शादी की हुई है. वो बग़ैर अपना धर्म बदले खुशी से एक दूसरे के साथ जिंदगी गुजार रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री राजनीति और पत्रकारिता जगत में ऐसे हजारों उदाहरण मिलेंगे. एक जमाने में अंतर धार्मिक विवाह करने के लिए लड़का-लड़की को घर से भागना पड़ता था. लेकिन, अब तो इसे काफी हद तक सामाजिक स्वीकार्यता मिल चुकी है. बाकायदा अरेंज्ड मैरिज भी होने लगी है.

सोच बदलना ज़रूरी
शादी जैसे मामले सांप्रदायिक रंग ना लें, इसके लिए बेहद ज़रूरी है कि धर्मगुरुओं को आगे आकर समाज को समझाना चाहिए कि अगर कोई लड़की अपना धर्म नहीं बदलना चाहती तो उससे स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की जा सकती है. भारतीय संविधान देश के सभी नागरिकों को अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को चुनकर उस पर अमल करने के साथ-साथ उसके प्रचार-प्रसार की भी इजाज़त देता है. ऐसे में शादी के नाम पर किसी को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना, न तो संवैधानिक रूप से ठीक है और ना ही नैतिक रूप से. इस समस्या का समाधान समाज में लोगों की सोच बदलने से ही हो सकता है.

क्यों ख़ामोश हैं धर्मगुरु
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम समाज में अभी भी बड़े पैमाने पर ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि किसी गैर मुस्लिम लड़की से तब तक शादी नहीं की जानी चाहिए, जब तक कि वह इस्लाम क़ुबूल न कर ले. लेकिन इसके लिए कई बार दबाव भी बनाया जाता है. इसी तरह अगर कोई मुस्लिम लड़की किसी हिंदू लड़के से शादी करना चाहती है तो उस पर भी शुद्धीकरण कराकर हिंदू धर्म अपनाने को मजबूर किया जाता है. धर्मांतरण जैसे संवेदनशील ऐसे मुद्दे पर धर्मगुरुओं, मौलवियों, मुफ्तियों की ख़मोशी और चुप्पी समझ से परे है. एक तरफ तो लोग दावा करते हैं कि अपने देश के क़ानूनों का पालन करना फ़र्ज़ है. दूसरी तरफ स्पेशल मैरिज एक्ट जैसे मुद्दे पर इनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता. जबकि यह एक्ट धर्मांतरण के विवादों को खत्म करने के लिए अहम है.

मुस्लिम संगठनों की भूमिका
कश्मीर मामले में मुस्लिम संगठनों की अहम भूमिका हो सकती है. मुस्लिम संगठन अगर इस मुद्दे को समझें और समाज की सोच बदलने के लिए आगे आएं तो शादी के नाम पर आए दिन होने वाले जबरन धर्मांतरण की समस्या से निजात पाई जा सकती है. अक्सर यह भी देखा गया है कि अलग-अलग धर्मों के लड़का लड़की एक दूसरे से प्रेम में पड़ने के बाद कई बार ऑनर किलिंग का शिकार हो जाते हैं. कई प्रेमी युगल घर से भाग कर शादी कर लेते हैं. इनमें से कईयों का तो जिंदगी भर के लिए अपने मां-बाप से रिश्ता नाता टूट ही जाता है. कईयों को रिश्ते सुधारने में बरसो लग जाते हैं.

सवाल यह उठता है कि जब प्रेम जाति धर्म देखकर नहीं होता तो फिर शादी क्यों जाति और धर्म देखकर की जाए. ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर धर्मगुरुओं और संगठनों की चुप्पी इस मायने में अपराधिक है कि उनकी ख़ामोशी की वजह से इन मुद्दों पर समाज में बेवजह का तनाव पैदा होता है. इसे रोकने की ज़िम्मेदारी सभी की है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
यूसुफ अंसारी

यूसुफ अंसारीवरिष्ठ पत्रकार

जाने-माने पत्रकार और राजनीति विश्लषेक. मुस्लिम और इस्लामी मामलों के विशेषज्ञ हैं. फिलहाल विभिन समाचार पत्र, पत्रिकाओं और वेब पोर्टल्स के लिए स्तंत्र लेखन कर रहे हैं. पूर्व में ‘ज़ी न्यूज़’ के राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख एवं एसोसिएट एडीटर, ‘चैनवल वन न्यूज़’ के मैनेजिंग एडीटर, और ‘सनस्टार’ समाचार पत्र के राजनितिक संपादक रह चुके हैं.

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First published: June 29, 2021, 6:26 PM IST
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