बढ़ रहा है धर्म की ख़ातिर फिल्मी दुनिया छोड़ने का चलन

फिल्मी दुनिया से मोह भंग होकर आध्यात्म की तरफ़ झुकने वाले इन फिल्मी कलाकारों मे एक बात कॉमन है कि किसी न किसी वजह से इनके जीवन में तनाव रहा है. ज़्यादातर मामलों में लगातार नाकामी और प्यार में धोखा भी बड़ी वजह रही है. जितनी अभिनेत्रियों ने धर्म की शरण ली उनमे सें ज़्यादातर ने एक्टिंग के नाम पर जिस्म की नुमाइश का रास्ता पकड़ा और जब नाकाम हुई तो धर्म गुरुओं की शरण में पहुंची.

Source: News18Hindi Last updated on: October 10, 2020, 12:03 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
बढ़ रहा है धर्म की ख़ातिर फिल्मी दुनिया छोड़ने का चलन
सना खान से पहले कई अभिनेत्रियां फिल्मी पर्दे को धर्म के कारण अलविदा कह चुकी हैं.(photo credit: instagram/@sanakhaan21)
अपने बोल्ड अंदाज़ के लिए मशहूर रही फिल्म अभिनेत्री सना ख़ान (Sana Khan) ने इस्लाम की ख़ातिर फ़िल्मी दुनिया छोड़ने का ऐलान कर दिया है. सोशल मीडिया (Social media) एकाउंट पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर उन्होंने इसकी वजह बताई. उन्होंने दावा किया है कि वो अपनी बाक़ी ज़िदगी इस्लामी सिद्धातों के मुताबिक़ गुज़ारना चाहती हैं. लिहाज़ा वो अब फिल्मी दुनिया की चकाचौंध छोड़कर ग़रीब बेसहारा और मज़लूमों की सेवा करेंगी.

सना ने फिल्मी दुनिया छोड़ने के लगभग वही दलीलें दी हैं जो सवा साल पहले आमिर ख़ान के साथ दो फिल्मों में काम करने वाली ज़ायरा वसीम ने दी थी. फर्क़ सिर्फ़ इतना है कि ज़ायरा ने अपना फिल्मी करियर बाक़ायदा तौर पर शुरु होने से पहले ही सन्यास लेने का ऐलान कर दिया जबकि सना ख़ान ने 15 साल फिल्म इंडस्ट्री में गुज़ारने के बाद यह क़दम उठाया है. इस दौरान उन्होंने बड़े पर्दे और छोटे पर्दे को साथ ही वेब सिरीज़ में भी अपनी किस्मत आज़माई. ये अलग बात कि उन्हें कहीं कामयाबी नसीब नहीं हुई.

इस दौरान उन्होंने हिंदी, तमिल और तेलुगू कुल मिलाकर 20 फिल्मों में काम किया. साल 2012 में बिग बॉस सीजन 6 की कंटेस्टेंट बनी. हालांकि सना ख़ान ने 2005 में यह है हाई सोसाइटी फिल्म से बॉलीवुड में क़दम रखा था. लेकिन उन्हें पहचान 2007 में एक अंडरवियर के एड से मिली थी. इस विज्ञापन पर खूब बवाल मचा था. इस पर रोक भी लगी दी गई थी. इसके बावजूद सना को फ़िल्मों में कोई ख़ास काम नहीं मिला. कुछ फिल्मों में छोटे-मोटे रोल्स पर ही उन्हें संतोष करना पड़ा. 2013 में सलमान ख़ान की फिल्म जय हो उनकी एक मात्र फिल्म है जिसमें उनके किरदार और उनके अभिनय को सराहा गया.

सना ने साल 2019 में कंफर्म किया था कि वह मेल्विन लुइस को डेट कर रही हैं. एक साल बाद दोनों का ब्रेकअप हुआ था. सना खान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ब्रेकअप के बाद वह डिप्रेशन और एंजाइटी का शिकार हो गई थीं. यही नहीं, वो 20 दिन तक नींद की गोलियां खाकर सोया करती थी. सना ने बताया था कि उन्होंने मेलविन से ब्रेकअप किया क्योंकि वो उन्हें धोखा दे रहे थे. सना ने यह भी कहा था कि मेलविन कई लड़कियों के साथ उन्हें भी धोखा दे रहे थे. यह बात इसी साल फऱवरी की है. उसके बाद में देश में कोरोना का क़हर बढ़ना शुरु हुआ और फिर लंबा लॉकडाउन चला.
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान की उनका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की तरफ़ हुआ. लंबे सोच विचार के बाद आख़िरकार उन्होंने अल्लाह से लौ लगा ली और खुद को फ़िल्मी दुनिया और इसकी चकाचौंध से को दूर करने का फैसला कर लिया. अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के आख़िर में उन्होंने अपने देस्तों से अपील की है कि उन्हें अ फिल्मी दुनियी चकाचौंध वाली पार्टियो की दावत न दी जाए. सना ने लिखा है, "तमाम भाइयों और बहनों से दर्ख्वास्त है कि आप मेरे लिए दुआ फरमाए कि अल्लाह ताला मेरी तौबा को कुबुल फरमाए. आख़िर में तमाम भाईयों और बहनों से दरख्वास्त है कि वो अब मुझे शोविज के किसी काम के लिए दावत न दें. बहुत बहुत शुक्रिया."

उनकी पोस्ट के इस आख़िरी हिस्से को पढ़कर ऐसा लगता है कि फ़िल्मी दुनिया में आने और यहां काम करने का उन्हें बहद अफ़सोस है. उन्होंने अल्लाह से तौबा की है. यानि माफ़ी मांगी है. दोस्तों से अपील की है वो उनकी तौबा (माफ़ी) क़ुबूल करने के लिए भी दुआ करें. साफ़ है कि सना ने मान लिया है कि उन्होंने फिल्मी दुनिया में काम करके बहुत बड़ा गुनाह (पाप) किया है. इसके प्रायश्चित के लिए कभी अपने जिस्म की नुमाइश को मौक़े ढूंढने वाली सना ने अब अपने चेहरे तक पर हिजाब पहन लिया है. अपने सोशल मीडिया एकाउंट से उन्होंने अपनी पुरानी तमाम बोल्ड तस्वारें तक हटा दी हैं.

सना ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि गरीब, मज़लूमों और बेसहारा लोगों की सेवा कैसे करेंगी? इसके लिए वो क्या काम करेंगी? कोई नया ट्रस्ट बनाएगी किसी एनजीओ से जुड़ेंगीं? या फिर चेहरे पर हिजाब पहनने भर से यह मक़सद की पूरा हो जाएगा? क्या ऐसा करने भर सो ही वो इस्लामी सिंद्धातों पर चल पाएंगी? क्या उनसे पहले जिन अभिनेत्रियों ने ऐसी ही दलीलें देकर इस्लाम की ख़ातिर फिल्मी दुनिया को अलविदा कहा, उन्होंने ऐसा क्या काम किया जिससे इस्लाम को या फिर इस्लाम के मानने वालों को कोई फायदा हुआ? ये सवाल इसलिए उठने चाहिए कि सच सामने आए. जिस इस्लाम के नाम पर फिल्मी दुनिया को अलविदा कहा जा रहा है क्या उसके लिए कुछ किया भी जा रहा है या सिर्फ उसकी आड़ लेकर अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है?
सना से पहले पिछले साल ज़ायरा वसीम ने जून के आख़िर में फिल्मी दुनिया को अलविदा कहा था. सवा साल में ज़ायरा ने इस्लाम या फिर मुस्लिम समाज के लिए कोई उल्लेखनीय काम किया हो, ऐसी कोई ख़बर नहीं आई.
उनसे पहले पाकिस्तानी अभिनेत्री वीणा मलिक और सोफिया हयात ने भी ऐसे ही तर्को के साथ फिल्मी दुनिया छोड़ी थी. वीणा मलिक ने कई हिंदी फिल्मों में न्यूड सीन तक दिए थे. पाकिस्तान की तबलीग़ी जमात के प्रमुख तारिक जमील से उनकी कहीं मुलाक़ात हई. उनका दिल बदला. अब वीणा मलिक बाक़ायदा चेहरे पर हिजाब पहन कर सिर्फ़ न’आत (नबी का शान में पढ़ी गई शायरी) गाती हैं.

इसी तरह सोफ़िया हयात अब नन बन चुकी हैं. उन्होंने भी कई फिल्मों में बेहद वोल्ड सीन दिए हैं. इसके उलावा उनका एक सेक्स वीडियो भी लीक हुआ था. इस सब से परेशान होकर सोफिया हयात को भी अहसास हुआ कि शायद उन्होंने ग़लत राह पकड़ ली है. अपनी ग़लती सुधारते हुए उन्होंने नन का चोला पहन लिया. कई और अभिनेत्रियों नें भी अपने धर्म की ख़ातिर अपने डूबते हुए करियर का बलिदान दिया है.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ इस्लाम की ख़ातिर ही अभिनेत्रियों ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ी है. हिंदू धर्म की ख़ातिर भी यह बलिदान दिया गया है. 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने अचानक फिल्म इंडस्ट्री छोड़ी और साध्वी बन गईं. लेकिन उन्होंने भी यह क़दम लागातार कई फिल्मे फ्लॉप होने के बाद उठाया. इसी तरह पुराने ज़माने की मशहूर अदाकारा शशिकला का भी 90 के दशक में मोह भंग हो गया था और वो बॉलीवुड छोड़कर हरिद्वार आ बसी थीं. कई साल वो आध्यात्मिक जीवन जीती रहीं. उन्हे किसी धर्मगुरू ने यह बता दिया था कि फिल्मों में बुरी औरतों के किरदार निभाकर उन्होंने बहुत बड़ा पाप किया है. इसके प्रायश्चित के लिए उन्हें कुछ साल तमाम सुख चैन त्याग कर सन्यासी जैसा जीवन बिताना पड़ेगा.

इस मामले में सबसे चर्चित नांम दिवंगत अभिनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद खन्ना का है. अपने करियर के चरम पर फिल्म इंडस्ट्रा को छोड़कर वो आध्यात्म की तलाश में ओशो के साथ अमेरिका में उनके आश्रम में रहने चले गए थे. कई साल बाद जब ओशो से उनका मोह भंग हुआ तो वापिस चले और फिर से बतौर अभिनेता दूसरी पारी शुरु की. 1998 में भाजपा में शामिल होकर पहले सांसद बने और फिर अटल सरकार में मंत्री बने.


फिल्मी दुनिया से मोह भंग होकर आध्यात्म की तरफ़ झुकने वाले इन फिल्मी कलाकारों मे एक बात कॉमन है कि किसी न किसी वजह से इनके जीवन में तनाव रहा है. ज़्यादातर मामलों में लगातार नाकामी और प्यार में धोखा भी बड़ी वजह रही है. जितनी अभिनेत्रियों ने धर्म की शरण ली उनमे सें ज़्यादातर ने एक्टिंग के नाम पर जिस्म की नुमाइश का रास्ता पकड़ा और जब नाकाम हुई तो धर्म गुरुओं की शरण में पहुंची. धर्म गुरुओं को उनकी शरण में आने वालों को उनके पापों का एहसास कराके प्रायश्चित कराने में महारत हासिल होती है. ममता कुलकर्णी, सोफ़िया हयात, वीणा मलिक, ज़ायरा वसीम के साथ ऐसा ही हुआ है. अब सना ख़ान भी इसी रास्ते पर चल पड़ी हैं.

दरअसल यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है. कई बार नाकामी के बाद लोगों को लगने लगते तगता है कि उनसे कहीं कुछ ग़लत हो रहा है. इसी मनोदशा में लोग धर्म की शरण में आते हैं. ऐसा करने से उन्हें अच्छा महसूस होता है. सबसे बड़ा उदाहरण अभिनय सम्राट दिलीप कुमार (यूसुफ़ ख़ान) का है. बताया जाता है कि वो अपनी हज करने इसलिए नहीं गए क्योंकि उन्हें लगता था कि फिल्मों में काम करके वो जो पैसा कमा रहे हैं वो जायज़ नहीं है बल्कि हराम है. इस पैसे से किया गया उनका हज क़ुबूल नहीं होगा. उनके क़रीबी यह भी दावा करते है कि वो हज करने के लिए टाइप राइटर से काम करके पैसा जमा कर रहे थे लेकिन उनके पास इतने पैसे कभी जमा ही नहीं हो पाए. राज्यसभा सदस्य रहते उन्हें हज डेलीगेशन में हज पर जाने का ऑफर दिया गया था. लेकिन उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया था कि जब वो हलाल कमाई से इतने पैसे जमा कर लेगें तो हज पर चले जाएंगे.

धर्म की ख़ातिर फिल्मी दुनिया और इसकी चकाचौंध छोड़ने का फैसला किसी भी कलाकार का निजी फैसला है. इससे न तो किसी धर्म की सेवा हो रही है और न ही किसी धर्म के मानने वालों का कोई भला हो रहा है. यह सिर्फ अपने दिल को सुकून देने वाला फैसला हो सकता है. इससे किसी दूसरे का किसी तरह को भला होने की उम्मीद करना बेईमानी है.
facebook Twitter whatsapp
First published: October 9, 2020, 10:16 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर