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भ्रष्‍टाचार का नमूना बन गया सरगुजा का ढोडागांव

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 16, 2017, 1:02 PM IST
भ्रष्‍टाचार का नमूना बन गया सरगुजा का ढोडागांव
घने वनों के बीच बसे पहाड़ी गांव ढोडागांव की आबादी करीब 2500 और इसमें 8 बस्तियां हैं. सरकार ने इस गांव तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में कोई कसर नही छोड़ी लेकिन वर्ष 2008 से ही गांव के रसूखदार रोजगार सहायक के साथ सरपंच, सचिव ने विकास की राशि में इस कदर सेंधमारी की है कि विकास तो नहीं हुआ लेकिन पंचायत के नुमाइंदे करोड़पति बन गए. नाली बनी नहीं डकार गए लाखों रुपये : पंचायत ढोडागांव बस्ती के अटल चौक और चिंडरापारा बस्ती मेंं बगैर नाली निर्माण कराए लाखो रुपए निकाल लिए गए. इस गांव के लोगों का तो यहां तक आरोप है कि गांव में वर्षो से पदस्थ रोजगार सहायक क्षत्रमोहन यादव ने अपने घर से नाला तक और फिर नाला से अपने घर तक एक बार सीसी निर्माण कारकर तीन बार रुपये निकाल लिए हैं.
ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 16, 2017, 1:02 PM IST
छत्तीसगढ़ सरकार ने गत 13 वर्षों में आदिवासी बहुल सरगुजा जिले के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए हैं. विभिन्न योजनाएं लागू की गईं ताकि आदिवासियो और अन्‍य निवासियों का भला हो सके लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियो ने जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया. लूट कैसे हुई इसका उदाहरण जिले के सीतापुर ब्‍लॉक का ढोडागांव पंचायत  है.
घने वनों के बीच बसे पहाड़ी गांव ढोडागांव की आबादी करीब 2500 और इसमें 8 बस्तियां  हैं. सरकार ने इस गांव तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में कोई कसर नही छोड़ी लेकिन वर्ष 2008 से ही गांव के रसूखदार रोजगार सहायक के साथ सरपंच, सचिव ने विकास की राशि में इस कदर सेंधमारी की है कि विकास तो नहीं हुआ लेकिन पंचायत के नुमाइंदे करोड़पति बन गए.

 नाली बनी नहीं डकार गए लाखों रुपये 

पंचायत  ढोडागांव बस्ती के अटल चौक और चिंडरापारा बस्ती मेंं  बगैर नाली निर्माण कराए लाखो रुपए निकाल लिए गए. इस गांव के लोगों का तो यहां तक आरोप है कि गांव में वर्षो से पदस्थ रोजगार सहायक क्षत्रमोहन यादव ने अपने घर से नाला तक और फिर नाला से अपने घर तक एक बार सीसी निर्माण कारकर तीन बार रुपये निकाल लिए हैं.

पहली बारिश में ही बह गया 60 लाख का तटबंध

गांव मे एक सड़क के लिए जलसंसाधन विभाग ने 60 लाख रुपए का तटबंध निर्माण किया गया, जो पहली बारिश  मेंं  खत्‍म  हो गया.  उसी तडबंध के अंतिम छोर पर रोजगार सचिव ने ठेकेदारी कर एक डैम बनवाया, जिसमें गिट्टी की जगह बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जिससे ये डैम भी  पानी में बह चुका है.

इंदिरा  आवास बना नहीं रमक हो गई साफ 

गांव के कुओं की मरम्मत के नाम पर भी गांव वालों को छला गया. इंदिर आवास बनवाए बगैर ही रकम साफ हो गई. ग्रामीणों की कई बार शिकायत करने पर जांचदल ने जांच की औपचारिकता पूरी कर फाइल बंद कर दी. कई बार शिकायतकर्ताओं को दबंग लोगों की मारपीट का शिकार होना पड़ा. इस गाँव में विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार का हिसाब किसी के पास नहीं लेकिन यहां पदस्थ सरकारी नुमाइंदो की तेजी से बढ़ती संपत्ति से यह अंदाजा लगाया जा सकता है की भ्रष्टाचार की छाँव में ही ये फल फूल रहे है.
First published: March 16, 2017
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