एक मैसेज, 24 मौत

एक मैसेज, 24 मौत

WhatsApp के मैसेज से 24 लोगों की जान चली गई. उन्माद फैलाने वाले WhatsApp के ये मैसेज कहां से आए, कोई नहीं जानता. इन्हें किसने सबसे पहले भेजा, अभी भी ये गुत्थी सुलझी नहीं है. झारखंड से तमिलनाडु और असम से गुजरात तक ये मैसेज जंगल की आग की तरह फैल रहे हैं. इसकी वजह से अभी तक 24 निर्दोष लोगों की हत्या की जा चुकी है.

WhatsApp पर फैली अफवाहों से मौत

| Hindi.News18.com @HindiNews18

Published: JUNE 27, 2018

खतरनाक WhatsApp मैसेज टेक्स्ट और ऑडियो दोनों में थे. ये मैसेज तेलगू, कन्नड़, तमिल, हिंदी, असमिया, गुजराती और दूसरी भाषाओं में थे. मैसेज कुछ इस तरह था...

दोस्तो, अलर्ट रहें.

आज सुबह मेरे दोस्त के घर के पास से तीन बच्चों को किडनैप कर लिया गया था...10 लोग बच्चों को बिस्कुट दे रहे थे और उस इलाके के लोगों ने सभी 10 लोगों को पकड़ लिया और उनकी सूचना के आधार पर 5 और लोगों को पकड़ा गया.

मैसेज में आगे लिखा था...

पुलिस मौके पर पहुंच गई है और उन्होंने सूचित किया है कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग के लिए हैदराबाद (या बेंगलुरु या चेन्नई या कार्बी आंगलोंग या सिंहभूम या किसी दूसरी जगह) में करीब 400 लोग आए हैं. मेरा अगला वीडियो चेक करें और उसे दोबारा पोस्ट करें. पैरेंट्स अलर्ट रहें.



WhatsApp मैसेज का असर

किसी को इस बात का आइडिया नहीं था कि ये मैसेज कहां से आया या इसे भेजने वाला कौन था. लेकिन, जब किसी के बच्चे की सुरक्षा की बात आती है तो ये सवाल प्रासंगिक नहीं रह जाते हैं. हो सकता है कि अगर किसी ने ये सवाल पूछे होते तो फर्जी WhatsApp मैसेज से एक साल में 24 लोगों की हत्याएं नहीं होतीं.

महज संदेह के आधार पर भीड़ ने 24 लोगों को मार दिया. यह मैसेज जंगल में लगी आग की तरह झारखंड से तमिलनाडु और असम से गुजरात तक फैल गया. हर राज्य में इस मैसेज ने स्थानीय लोगों को दूसरे राज्यों के लोगों के खिलाफ भड़का दिया. यह मुद्दा भी तब गरमाया जब राजनीतिक दृष्टि से पहले ही उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति दो राहे पर खड़ी नजर आ रही थी. वैसे किसने इस फेक मेसज को शेयर किया ये तो पता नहीं लग पाया है. लेकिन इस मैसेज ने पूरे देश में जो खलबली मचाई वह भयावह है.

सच्चाई नहीं परखते 40% पढ़े-लिखे युवा

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में हुई रिसर्च के मुताबिक, 40 फीसदी पढ़े-लिखे युवा भी खबर की सच्चाई नहीं परखते, यहां तक कि अगर उन्हें लगता है कि कुछ गलत है तो भी सिर्फ 45 फीसदी युवा ही खबर की सत्यता जांचते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट के प्रसार से भारत में समस्या और भी गंभीर हो गई है. भारत में हमेशा ही लिखी गई बात को पत्थर की लकीर माना जाता रहा है. ऐसे में इंटरनेट के जरिए आने वाले फेक मैसेज का इस तरह से कहर बरपाना लाजिमी है.

पिछले 4 सालों में भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल 150 फीसदी बढ़ गया है. साथ ही स्मार्टफोन की खरीदारी के मामले में 83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. डेटा प्लान के सस्ते होने से उस इलाके में भी लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पा रहे हैं, जहां फेक न्यूज और डिजिटल प्राइवेसी क्या होती है, लोग वाकिफ ही नहीं हैं.



बेंगलुरु के रिसर्च संगठन सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुनील अब्राहम ने कहा, 'ऐसे में लोगों के द्वारा इस तरह की अफवाहों के झांसे में फंसना लाजिमी है. जाहिर है कि उन्हें इसके लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.'

लोगों को इस तरह बनाया गया निशाना

ये मैसेज कहां से आए, कोई नहीं जानता. किसने सबसे पहले भेजा, अभी भी ये गुत्थी सुलझी नहीं है. झारखंड से तमिलनाडु और असम से गुजरात तक ये मैसेज जंगल कि आग की तरह फैल रहे हैं. इसकी वजह से अभी तक 24 निर्दोष लोगों की हत्या की जा चुकी है. (स्रोतः मीडिया रिपोर्ट्स)

अफवाह फैलाने की मशीन बनता WhatsApp

दुर्भाग्य से WhatsApp इस तरह की अफवाहों को फैलाने के लिए एक बड़ा जरिया बन गया है. मौजूदा समय में इस ऐप के 200 मिलियन ऐक्टिव यूजर्स हैं. यही यूजर्स WhatsApp की गुमनाम दुनिया से आई इस तरह की फेक न्यूज का शिकार होते हैं.

फेक न्यूज को फैलने से रोकने का एक तरीका प्रभावित क्षेत्र में इंटरनेट बंद करना है, लेकिन इसके बावजूद जो असल में दोषी होता है वह छुप जाता है और फिर मान लिया जाता है कि उनका भांडा फोड़ना मुमकिन ही नहीं है. फेसबुक और अन्य वेबसाइट इस समस्या का हल निकालने के लिए दुनियाभर से दबाव झेल रही हैं, लेकिन इसका हल कब निकलेना शायद इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है.

Alt News के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा ने कहा, "जो लोग इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं उनका पता नहीं लगाया जा सकता क्योंकि वे WhatsApp ग्रुप में हैं. मुझे लगता है कि उन्होंने WhatsApp ग्रुप में अफवाहों को फैलाना इसलिए शुरू किया क्योंकि यहां किसी का पता लगाना बहुत कठिन है. जैसे ही अफवाह एक जगह से फैलनी शुरू होती है, यह किसी आग की तरह हर जगह फैलती चली जाती है. जब किसी को यह मैसेज मिलता है तो वह दूसरे को इसे WhatsApp पर भेज देता है या अपने Facebook में डाल देता है. इस तरह से यह किसी बीमारी की तरह फैलता है."



जैसे कि WhatsApp की पहुंच बहुत बड़ी है, इस तरह से यह नफरत फैलाने का एक सबसे सस्ता जरिया बन गया है. बंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने पाया कि इस केस से जुड़ा हुआ मुख्य आरोपी सैकड़ों WhatsApp ग्रुप का एडमिन है. वहीं, केटी नवीन कुमार नाम का शख्स, जिसने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. उसने तीन साल पहले ही बेंगलुरु के नजदीक मांड्या में अपना संगठन 'हिंदू युवा सेना' बनाया था.

इस हिंदुत्व कार्यकर्ता ने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने हिंदू बचाओ एजेंडे को हवा देने के लिए कई सारे WhatsApp ग्रुप हिंदू युवा सेना, जागो हिंदू मददुर, बजरंग मददुर और कावेरी बॉएज नाम से बनाए. जब आप एक WhatsApp ग्रुप बना लेंगे और लोगों को जोड़ लेंगे तो आप किसी को भी एडमिन बना सकते हैं. जो खुद से कई सारे लोगों को जोड़ सकता है. WhatsApp में ज्यादा से ज्यादा कितने लोग जोड़े जा सकते हैं इसको लेकर तय संख्या अब तक पता नहीं है.

झारखंड

बच्चों को किडनैप करने वालों वाली फेक न्यूज ने झारखंड में आग में जैसे घी डालने का काम किया. गौर करने वाली बात है कि पिछले कई सालों से वास्तव में झारखंड बच्चों की किडनैपिंग और तस्करी से जूझ रहा है. इस राज्य से छोटी-छोटी बच्चियों को अगवा कर लिया जाता है और दूसरे राज्यों में भीख मंगाने के काम पर लगा दिया जाता है.



गांव वाले जिन्होंने फेक न्यूज के बारे में कभी नहीं सुना था, उन्होंने जब ये अफवाह सुनी तो उनके कान खड़े हो गए. साथ ही जो फोटोज उन्होंने देखी उसने उन्हें भीतर से दहला दिया. गौर करने वाली बात है कि इंटरनेट पर मौजूद ग्राफिक इमेज का इस्तेमाल इन मैसेज के साथ बखूबी किया गया. अफवाह फैलाने वालों की यह चाल काम कर गई और स्थानीय आदिवासियों के बीच रोष व्याप्त हो गया.

सिंहभूम जिले में हुईं अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 9 लोगों ने अपनी जान गंवाई. गुस्साई भीड़ ने शक के बिनाह पर व्यक्ति विशेष को मौत के घाट उतार दिया. उन्होंने ये सब अपने बच्चों को उस गैंग से बचाने के लिए किया, जिसका जिक्र उस मैसेज में किया गया था. जिसमें कहा गया था कि वे बच्चों को उठाकर ले जाते हैं और उनके शरीर के पार्ट निकालकर बेच देते हैं.

अगर जमशेदपुर शहर में फेक न्यूज और हत्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाता तो मौत और भी ज्यादा हो सकती थीं. जैसा कि लोगों के विरोध प्रदर्शन ने पुलिस को सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे इस नफरत के अभियान के खिलाफ सतर्क कर दिया, साथ ही लोगों को यह भी पता चला कि फेक मैसेज वाली भी कोई चीज होती है. अगले कुछ दिनों में भी कथित बच्चे उठाने वाले दूसरे गांवों में पकड़े गए लेकिन उन्हें सीधे पुलिस के हवाले कर दिया गया. इस तरह से यह फेक न्यूज का अभियान धीरे-धीरे झारखंड में खत्म हुआ लेकिन अब यह दूसरे राज्यों में तबाही मचा रहा है.

तमिलनाडु

झारखंड से 2,000 किलोमीटर दूर यह मैसेज तमिलनाडु में किसी कहर की तरह टूट पड़ा. मैसेज में बताया गया कि उत्तर भारतीयों से सतर्क हो जाओ, क्योंकि करीब 400 उत्तर भारतीयों का गैंग बच्चों के शरीर के अंगों की खरीद-फरोख्त के लिए उन्हें बहला-फुसला रहा है. मैसेज में बताया गया है कि ये लोग घर के भीतर किसी सामान को सुधारने या अखबार वाले का झांसा देकर घुस आते हैं. साथ ही, इस मैसेज के साथ जो क्षत-विक्षत फोटो भेजी गईं उसने स्थानीय लोगों को भीतर से दहला दिया.

वैसे किसी ने यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि बिना किसी रोक-टोक के 400 लोगों का गैंग इतनी दूर चेन्नई तक कैसे आ सकता है. साथ ही न ही किसी ने 100 नंबर पर कॉल करके इस अफवाह के तह तक जाने की कोशिश की. जाहिर है कि अगर पुलिस आ जाती तो वे आसानी से लोगों को इस अफवाह के बारे में वाकिफ करा सकते थे. चेन्नई के उत्तरी इलाके तिरुवल्लुवर में एक व्यक्ति इस फेक न्यूज का पहला शिकार बना.



भीड़ ने उसे निर्दयता से पीटा और पुलिकट के पुल पर 10 मई को टांग दिया. भीड़ ने उस व्यक्ति की एक भी नहीं सुनी. दूसरी हत्या इस घटना के 24 घंटे के भीतर हुई. इस बार शिकार एक अधेड़ उम्र की महिला बनी जिसका नाम रुक्मणि था. यह हत्या थिरुवन्नमलाई में हुई. वह अपने रिश्तेदारों के साथ मंदिर से लौट रही थी. इसी बीच, उन्होंने अपनी कार एक गांव में रोकी. रुक्मणि विदेशी टॉफी बच्चों को देने लगी. इसी बीच बात फैल गई कि महिला बच्चों को मीठा खिलाकर बहला-फुसला रही है.

रुक्मणि के रिश्तेदारों ने बताया, "भीड़ ने उसकी एक न सुनी. बच्चों को चॉकलेट देने से कोई तस्कर नहीं बन जाता. इस घटना के बाद मुझे बाहर निकलने तक में डर लग रहा था." पुलिस ने इस मामले में करीब 30 लोगों पर मामला दर्ज किया है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

इसके बाद इस मैसेज ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कहर ढाया और एक बार फिर से दूसरे प्रदेश से आए लोगों को मोहरा बनाया गया. पहला हमला दोपहर के वक्त हुआ जब 12 लोगों पर पार्थी गैंग का सदस्य होने का शक किया गया. गौर करने वाली बात है कि पार्थी गैंग मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का कुख्यात अपराधी गैंग है. कुछ दिनों के बाद, भीड़ ने विशाखापत्तनम में दो भिखारियों को पीट-पीटकर मार डाला.

एक दूसरा मामला हैदराबाद में देखने को मिला जहां करीब 200 लोगों की भीड़ ने एक किन्नर (ट्रांसजेंडर) को पत्थर से पीट-पीटकर मार डाला. यह किन्नर महबूबानगर जिले से अपने 3 साथियों के साथ रमजान में लोगों से खैरात मांगने गया था. जल्दी ही यह फेक न्यूज दूसरे शहरों में भी आग की तरह फैल गई. अपने रिश्तेदारों के यहां निजामाबाद में आए व्यक्ति को भीड़ ने इसलिए मार डाला क्योंकि वह उन्हें यह बताने में नाकामयाब रहा कि वह वहां आया क्यों है. तेलंगाना के यादाद्रि जिले में एक मर्डर, फिर विकाराबाद जिले में 9 लोगों पर हमला और गुंटूर रेलवे स्टेशन पर महिला पर हमला इसके कुछ दिनों बाद ही हुआ.

कर्नाटक

फेक न्यूज कैंपेन से भड़की मानसिकता वाली भीड़ देखते-देखते कर्नाटक पहुंची, जो चुनाव प्रचार के दौरान 'स्थानीय बनाम बाहरी' को लेकर यह बड़ा मुद्दा बनीं. भारत में सिलिकन वैली माने जाने वाले बेंगलुरु में व्हाट्सऐप यूजर्स को कन्नड़ में 'चाइल्ड लिफ्टर्स' को लेकर मैसेज मिलने लगे.

इन मैसेज में से एक था ''अपने बच्चों को अकेला मत छोड़िए...अगर आपको ऐसे किडनैपर्स मिलते हैं तो उन्हें बांध लीजिए और पुलिस को बुलाइए.'' ऐसे ही मैसेज के कारण राजस्थान के 26 साल के एक मजदूर की जान चली गई. काम की तलाश में राजस्थान से बेंगलुरु आए कालू राम को पश्चिम बेंगलुरु के चमराजपेट में गलियों में घसीटा गया और उसे बैट व अन्य घरेलू चीजों से पीटा गया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई.

बेंगलुरु वेस्ट के एडिशनल कमिश्नर बी के सिंह के अनुसार आज से बीस साल पहले भी भारत में इसी तरह का पागलपन देखा गया था जब भगवान गणेश के दूध पीने की खबर खूब वायरल हुई थी. लेकिन व्हाट्सऐप ने इसको भयावह स्थिति में पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा, ''वह बेचारा अकेले जा रहा था. वहां मौजूद दो लोगों ने उसे देखा और उसका पीछा करने लगे. अचानक भीड़ इकट्ठा हो गई. लोगों को जो भी मिला क्रिकेट बैट, स्टम्प, रस्सी वो लेकर आए और उस पर हमला कर दिया.''

सिंह ने कहा, ''जब एक जनसमूह भीड़ बन जाए तो आप उसे कंट्रोल नहीं कर सकते हैं. उनमें से काफी लोग विनम्र स्वभाव के होंगे, लेकिन भीड़ के कारण वे भी उसमें समा गए. भीड़ में शामिल लोगों को ऐसा लगता है कि अगर वे एक साथ कुछ करेंगे तो पुलिस कुछ नहीं करेगी और वे आसानी से भाग जाएंगे.''

CCTV फुटेज और आसपास खड़े लोगों द्वारा लिए गए वीडियो के आधार पर 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसमें 26 साल का अन्बु मुख्य आरोपी में से एक है जिसके खिलाफ पहले से केस रजिस्टर्ड हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में से चार महिलाएं और एक नाबालिग भी है. इन सबके ऊपर मर्डर का केस दर्ज है. फेक न्यूज के कारण तमिलनाडु में भी हिंसात्मक घटनाएं हुईं. बक्शी गार्डन के पेन्शन मोहल्ला जहां यह घटना हुई वहां तमिल लोगों का खूब जमावड़ा है. इन अफवाहों के बेंगलुरु में कदम रखने से पहले ही कुछ लोगों को इसके बारे में जानकारी थी. इसी तरीके से एक और व्यक्ति की सलेम में हत्या कर दी गई वहीं पूरे राज्य में ऐसी और सात घटनाएं हुईं.



असम

फेक न्यूज के कारण होने वाली सबसे ताजा घटना असम में देखी गई, जहां 8 जून को गुवाहाटी के दो युवकों की कार्बी आंगलोंग जिले में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने बताया अभिजीत नाथ और निलोत्पल दास कांठे लंगशु पिकनिक स्पॉट जा रहे थे तभी पंजुरी कचरी विलेज के पास लोगों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया. चश्मदीदों ने बताया कि दोनों ही युवकों को बांस और लाठी से पीटा गया और उनकी हत्या कर दी गई.

एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, '' यह तब हुआ जब किसी स्थानीय व्यक्ति ने गांव वालों को सूचना दी कि दो आदमी काली कार में एक अपहरण की गई बच्ची के साथ घूम रहे हैं. कुछ गांव वाले सड़क किनारे के एक ढाबे पर शराब पी रहे थे और कार को ट्रेस करने के लिए उन्होंने तुरंत और लोगों को बुलाया. सूचना मिलने के बाद पहुंची भीड़ ने कार को चारों तरफ से घेर लिया. गांव के बुजुर्गों ने लोगों को युवकों को पिटने से रोका लेकिन उन्होंने एक ना सुनी.''

व्हाट्सऐप के फॉरवर्ड किए गए मैसेज से उन्माद फैलाकर एक बार फिर इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया. मैसेज में लोगों को आगाह किया गया कि बच्चे चोरी करने वाला गिरोह घटना को अंजाम देनें की फिराक में है. कार्बी आंगलोंग देश के सबसे पिछड़े क्षेत्र में से एक है और उन्होंने इस मैसेज को गंभीरता से ले लिया.

अग्रवाल ने बताया, ''हमने अब तक इस मामले में 35 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें से कुछ लोग सीधे तौर पर हमले में शामिल थे वहीं एक को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है. इस क्षेत्र में बच्चों की किडनैपिंग करने वालों को लेकर अफवाह फैलाने की कोई जगह नहीं है लेकिन इसने लोगों एक तरीके का पागलपन पैदा कर दिया.

Translation-Abhishek Srivastav, Devbrat Bajpai

Produced-Vishnu Soni, Om Prakash

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