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कागजों पर 43 साल से योजना, कब बुझेगी चास की प्यास!

Gyanendu Jaipuriar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: April 21, 2017, 2:18 PM IST
कागजों पर 43 साल से योजना, कब बुझेगी चास की प्यास!
चास के लोगों की पानी को लेकर जद्दोजहद 43 साल बाद भी जारी है.
Gyanendu Jaipuriar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: April 21, 2017, 2:18 PM IST
तीन लाख से अधिक आबादी वाले बोकारो के उपनगर चास को पानी के एक लिए एक बार फिर से जूझना पड़ रहा है.चास की 43 साल पुरानी जलयोजना अब तक अटकी है, वहीं पानी के लिए जूझ रहे चासवासियों का संघर्ष टैंकर और सार्वजनिक जलस्रोतों पर साफ दिख रहा.

43 साल से अटकी प्यास

चास पेयजलापूर्ति योजना सन् 1973 से शुरु हुई. शुरुआत में इस योजना की लागतएक करोड़ रुपए थी.  आज की तारीख में यह योजना  50 करोड़ तक पहुंच गई है. पर कागजों से उतर कर चास के लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही.  आज भी चास वासियो को पानी के लिए बोकारो की ओर देखना पड़ रहा हैं. चास नगर निगम बनने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पायी.

स्थानीय बेहाल

स्थानीय श्रेष्ठि घोषाल पूछती हैं कि अच्छा दिन आखिर कब आएगा. वहीं एक अन्य स्थानीय का कहना है कि चास की जनता के साथ पानी के नाम पर बार बार छल हुआ. स्थानीय सुधीर कहते हैं कि अहले सुबह से ही हम पानी के लिए संघर्ष शुरू कर देते हैं. बच्चों को पढ़ाई लिखाई छोड़ कर पानी के इंतजाम में भटकना पड़ता है.

 
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