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दिल्ली-मुंबई नहीं, रांची से चलेगी सबसे तेज ट्रेन!

स्ट्रिंग रेल की स्पींड 40 से 500 किलोमीटर प्रति घंटा तक है. रांची से जमशेदपुर तक की स्पीसड 150 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी.

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: April 6, 2017, 12:47 PM IST
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: April 6, 2017, 12:47 PM IST
बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अब देश में 5th जेनरेशन ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम शुरू करने की तैयारी हो रही है. जिससे समय और पैसे की बचत के साथ प्रदूषण भी कम होगा. दावा है कि इसका एक्‍सीटेंड रेट जीरो है. यानी दुर्घटना की संभावना न के बराबर है.

बेलारूस की रैपिड इलेक्‍ट्रिक स्‍ट्रिंग रेल नाम की इस टेक्‍नॉलोजी से बनने वाले ट्रांसपोर्ट सिस्टम की नींव 2020 में रखी जाएगी. इसकी अधिकतम गति 500 किलामीटर प्रति घंटा तक होगी. यानी दिल्‍ली से लखनऊ, अमृतसर, जयपुर और झांसी जैसे शहरों तक एक घंटे में पहुंचा जा सकेगा.

लेकिन यह अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले देश की राजधानी में नहीं बल्कि झारखंड की राजधानी रांची में शुरू होगा. क्रिकेटर एमएस धोनी का शहर रांची इसका पहला गवाह होगा. इसके लिए झारखंड सरकार ने भारतीय कंपनी टिनाची इंजीनियरिंग ग्रुप एवं बेलारूस की कंपनी स्‍काईवे से लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया है.

मोमेंटम झारखंड के दौरान इस लेटर पर झारखंड के डायरेक्‍टर-इंडस्‍ट्रीज ने हस्‍ताक्षर किए हैं. इस प्रस्ताव के अमल में आने के बाद रांची शहर में 16 किलोमीटर का नेटवर्क बनेगा.

इसके अलावा रांची से जमशेदपुर तक 125 किमी का नेटवर्क भी बनेगा. दोनों प्रोजेक्‍ट पर करीब 5800 करोड़ करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है. इसे बेलारूस का स्‍काईवे ग्रुप एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर बनाएगा.

इसे बनाने का काम करने वाली भारतीय कंपनी टिनाची इंजीनियरिंग ग्रुप के चेयरमैन हरीश मेहता ने न्‍यूज18हिंदी डॉटकॉम को बताया कि दूसरा प्रोजेक्‍ट  मैकलोडगंज से धर्मशाला तक शुरू होने की संभावना है.

इसमें मेट्रो के मुकाबले कंस्‍ट्रक्‍शन कॉस्‍ट 30 और ऑपरेशन कॉस्‍ट 50 फीसदी तक कम होगी. खास बात यह है कि एक ही लाइन पर ऊपर पैसेंजर कार होगी और नीचे कार्गो. एक पैसेंजर कार में 2 से लेकर 40 लोगों तक के बैठने की सुविधा और क्षमता होगी.
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उन्‍होंने बताया कि पॉड टैक्‍सी सिंगल वायर पर चलती है जबकि नई टेक्‍नालॉजी की स्‍ट्रिंग रेल डबल वायर पर दौड़ेगी. इस तरह की ट्रेन बेलारूस, रूस और आस्‍ट्रेलिया में काम कर रही हैं.

इसकी स्‍पीड कम से कम 40 किलोमीटर रखी जाएगी. लांग रूट पर इसे 500 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड तक चलाया जा सकता है. अभी रांची से जमशेदपुर तक की स्‍पीड 150 किलोमीटर प्रति घंटे की तय हो रही है. स्‍पीड के हिसाब से डिब्‍बों का डिजाइन किया गया है.

निर्माण में मेट्रो की तरह कंक्रीट का इस्‍तेमाल ज्‍यादा नहीं होगा. बल्‍कि सिर्फ 20 फीसदी कंक्रीट और 80 फीसदी स्‍टील का स्‍ट्रक्‍चर होगा. उनका दावा है कि डिरेलमेंट नहीं होगा.

 
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