दस साल तक की सजा हो सकती है राहत फतेह अली को

कानून के जानकारों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति भारत में पैसा कमाता है तो उसे भारतीय करेंसी में ही पेमेंट हो सकता है।

कानून के जानकारों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति भारत में पैसा कमाता है तो उसे भारतीय करेंसी में ही पेमेंट हो सकता है।

कानून के जानकारों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति भारत में पैसा कमाता है तो उसे भारतीय करेंसी में ही पेमेंट हो सकता है।

  • News18India
  • Last Updated: February 14, 2011, 4:04 PM IST
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नई दिल्ली। भारत से एक साथ सवा लाख डॉलर अपने देश ले जाने की कोशिश राहत फतेह अली खान को भारी पड़ रही है। कानूनन कोई शख्स भारत में कार्यक्रम के बदले डॉलर में पेमेंट नहीं ले सकता। जबकि राहत की सफाई ये है कि उन्हें सवा लाख डॉलर एक प्रोग्राम के एवज में मिले हैं। कानून के जानकारों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति भारत में पैसा कमाता है तो उसे भारतीय करेंसी में ही पेमेंट हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पी एच पारिख ने बताया कि जो आदमी भारत में पैसा कमाता है उसको इंडियन करंसी में ही पैसा लेना चाहिए था। बगैर आरबीआई की इजाजत के कोई भी आदमी विदेशी करंसी में रकम नहीं ले सकता। यहां उन्होंने डॉलर में रकम ली है तो गलती है। इनके खिलाफ आयकर और फेमा दोनों का मामला बनता है।

कानूनन किसी शख्स को पांच हजार यूएस डॉलर कैश और पांच हजार डॉलर का सामान रखने की छूट होती है। 5 हजार डॉलर से ज्यादा कैश ले जाने पर कस्टम विभाग को इनकम का सोर्स बताना होता है। अगर पैसा भारत में कमाया है तो सरकार को टैक्स देना पड़ेगा। वहीं, डॉलर में पेमेंट लेने के लिए भी आरबीआई की इजाजत जरूरी होती है।



साफ है इस मामले में राहत की आफत और बढ़ सकती है। जानकारों की मानें तो राहत पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी FEMA के सेक्शन 6 के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। इसके अलावा कस्टम्स एक्ट के सेक्शन 11 के तहत राहत पर कार्रवाई हो सकती है। टैक्स बचाने के आरोप में 2 से 3 साल तक की सजा हो सकती है। अगर हवाला जैसे गंभीर आरोप या फिर आतंकी या गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल होने के आरोप साबित होते हैं तो 10 साल तक की सजा हो सकती है।

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