मुजफ्फरनगरः चाइल्ड लेबर अभियान के तहत मुक्त कराए गए 12 मासूम

रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 14 वर्ष से 18 वर्ष बताई जा रही है. बच्चों को बाल श्रमिक बनाने वाले संस्थानों के ऊपर 20 हज़ार रुपए से लेकर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया है और आरोपी को 2 साल तक की कैद भी हो सकती है.

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मुजफ्फरनगर जिले में बुधवार को श्रम विभाग और AHTU द्वारा चाइल्ड लेबर अभियान के तहत 12 मासूमों को रोड स्थित ढाबों से मुक्त कराने में सफलता पाई. टीम ने मीनाक्षी चौक और भोपा रोड पर स्थित ढाबों में मजदूरी कर रहे बाल श्रमिकों को मुक्त करवाकर जिला चिकित्सालय में ले जाकर उनका मेडिकल कराया गया.

बताया जाता है श्रम विभाग मुक्त कराए गए मासूमों को स्कूल एडमिशन करवाकर उन्हें अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराएगा और जहां से बच्चों को मुक्त कराया गया है उन पर मोटा जुर्माना लगाकर सख्त कार्रवाई की जा रही है.

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श्रम अधिकारी के के मिश्रा ने बताया कि जिले में नाबालिग बच्चों को श्रम करने से रोकने के लिए उक्त अभियान चलाया जा रहा है, जो आगामी 7 जुलाई तक चलेगा. उन्होंने बताया कि होटलों पर, दुकानों पर और डेंटिंग पेंटिंग के कारखानों में बतौर बाल श्रमिक काम करने वाले कुल 12 बच्चों का रेस्क्यू किया गया.
रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 14 वर्ष से 18 वर्ष बताई जा रही है. उन्होंने बताया कि बच्चों को बाल श्रमिक बनाने वाले संस्थानों के ऊपर 20 हज़ार रुपए से लेकर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया है और आरोपी को 2 साल तक की कैद भी हो सकती है.

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उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए गए मासूमों को स्कूल में एडमिशन कराया जाएगा. साथ ही, बच्चों की काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि दोबारा वो काम पर न लौट सकें. श्रम अधिकारी ने कहा कि जिला चिकित्सालय से मेडिकल कराने के बाद में मासूमों को जिला बाल कल्याण समिति को हैंडओवर किया जाएगा. हालांकि मासूमों पर किसी क़ानूनी कार्यवाही से उन्होंने इनकार किया है जबकि इससे पहले रेस्क्यू किए गए बच्चों पर 40-40 हज़ार तक का जुर्माना लगाया गया था.

गौरतलब है मुजफ्फरनगर में समय-समय पर श्रम विभाग विभिन्न संस्थानों पर छापे मारकर बाल श्रम को रोकने की कोशिश करता रहता है. यह अभियान 20 जून से 7 जुलाई तक चलेगा.

(रिपोर्ट-बिनेश पवार, मुजफ्फरनगर)

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