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बिहार में परिवर्तन का सीधा असर राज्यसभा के समीकरण पर, क्या हरिवंश देंगे इस्तीफा?

सितंबर 2020 में राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे हरिवंश. (File Photo)

सितंबर 2020 में राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे हरिवंश. (File Photo)

एनडीए से नाता तोड़कर अचानक महागठबंधन में नीतीश कुमार के शामिल होने का सीधा असर राज्यसभा के समीकरण पर पड़ेगा. बदलते हालात में अब राज्यसभा में एनडीए की ताकत में मामूली कमी आएगी. वहीं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश पर असमंजस की स्थिति है.

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हाइलाइट्स

एनडीए सहित कुछ अन्य दलों के सहयोग से उपसभापति चुने गए थे हरिवंश
जदयू के एनडीए से अलग होने के बाद हरिवंश के अगले कदम पर सभी की निगाहें
राज्यसभा में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के 5 सदस्य

नई दिल्ली. बिहार में अचानक नीतीश कुमार के पाला बदलने से बीजेपी की ताकत और राज्यसभा के समीकरण पर सीधा असर पड़ेगा. राज्यसभा में अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की ताकत में मामूली कमी आएगी. वहीं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को लेकर असमंजस की स्थिति है. हरिवंश जदयू के कोटे से और बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा के उपसभापति बने थे. ऐसे में जबकि जदयू एनडीए को छोड़ चुका है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे अब उपसभापति पद से त्यागपत्र दे देंगे. हालांकि अभी तक हरिवंश की ओर से इस संबंध में किसी तरह का बयान सामने नहीं आया है.

एचटी की खबर के मुताबिक लोकसभा में बीजेपी 303 सदस्यों के साथ न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी है बल्कि दो तिहाई संख्या से भी ज्यादा सदस्यों के साथ सबसे बड़ी ताकत भी है. यहां उसे बिल पास कराने के लिए किसी अन्य पार्टी की जरूरत नहीं पड़ती है. हालांकि एनडीए के साथ कुछ और पार्टियां भी लोकसभा में बिल पास के दौरान उसका समर्थन करती हैं. दूसरी ओर राज्यसभा में उसे किसी भी बिल को पास कराने के लिए अपने सहयोगियों की जरूरत पड़ती है. 237 सदस्यीय राज्यसभा में बीजेपी की संख्या महज 97 है. स्पष्ट रूप से यहां बीजेपी बहुमत में नहीं है. हालांकि राज्यसभा में वह सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन बिल पास कराने के लिए उसे सहयोगी पार्टी के रुख पर निर्भर रहना पड़ता है. अक्सर राज्यसभा में उसे एआईएडीएमके के चार सदस्य और बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के 18 सदस्यों का समर्थन मिल जाता है.

राज्यसभा में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के पास 5 सदस्य हैं जबकि लोकसभा में उसके 16 सदस्य हैं. कुछ समय पहले तक जब राज्यसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी, तब भी वह कुछ विवादास्पद बिलों को पास कराने में विपक्षी दलों का सहयोग लेने में कामयाब रहती थी. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल को पास कराने में उसे बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दलों का भी सहयोग मिला था. बीजेपी तीन तलाक को गैरकानूनी बनाने वाले विवादास्पद विधेयक को पास कराने में कामयाब रही जबकि जदयू ने इसका विरोध किया था.

चूंकि अब जदयू एनडीए से बाहर आ गई है, ऐसे में राज्यसभा में संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए संघर्ष कर रहे कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट में अब जद (यू) भी साथ होगा. जद (यू) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बीजेपी ने हरिवंश के मुद्दे पर बात नहीं की है. उन्होंने यह भी कहा कि हरिवंश को कई पार्टियों के समर्थन से चुना गया था जो एनडीए का हिस्सा नहीं हैं. नेता ने बताया, यद्यपि हरिवंश का नाम बीजेपी ने प्रस्तावित किया था, लेकिन वे कई दलों के समर्थन से राज्यसभा के उपसभापति बने थे. उन्हें बीजू जनता दल और शिवसेना जैसे गैर एनडीए दलों का भी समर्थन मिला था. इसलिए हम इस पर इंतजार करेंगे कि बीजेपी का क्या रुख होता है. हरिवंश सितंबर 2020 में राजद उम्मीदवार मनोज झा को पराजित कर राज्यसभा के उपसभापति बने थे.

Tags: BJP, Jdu, NDA, Rajya sabha

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