'स्कूलों की कमाई का बड़ा हिस्सा सरकारी तंत्र को कमीशन के रूप में जाता है'

छात्र—अभिभावक मंच ने पब्लिक स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है

छात्र—अभिभावक मंच ने पब्लिक स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है

हिमाचल प्रदेश में 2700 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों का कारोबार लगभग 1200 करोड़ तक पहुंच गया है.

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हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर छात्र अभिभावक मंच ने आरोप लगाया है. छात्र-अभिभावक मंच का आरोप है कि प्राइवेट स्कूलों की आड़ में शिक्षा माफिया सक्रिय है. वर्तमान में छोटे से हिमाचल प्रदेश में 2700 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों का कारोबार लगभग 1200 करोड़ तक पहुंच गया है. सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत के चलते स्कूल मालिक अभिभावकों को लूट रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि प्राइवेट स्कूल लूट के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. स्कूलों की कमाई का बड़ा हिस्सा सरकारी तंत्र को कमीशन के रूप में जाता है जिसके चलते अब तक कोई नियामक आयोग नहीं बनाया गया है और न ही केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ अदालती निर्देशों की पालना की जाती है.

2021 में प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 65 फीसदी हो जाएगा

छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा का कहना है कि सुनयोजित तरीके से सरकारी शिक्षा को खत्म किया जा रहा है. वर्तमान में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 45 फीसदी है और जिस तरह से सरकारी स्कूलों से छात्रों और अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है. इस लिहाज से 2021 में आंकड़ा बढ़कर 65 फीसदी हो जाएगा.



छात्र अभिभावक मंच ने तीसरे चरण का आंदोलन शुरु किया है
आपको बता दें कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ छात्र अभिभावक मंच ने तीसरे चरण का आंदोलन शुरु किया है.

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