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साइबेरिया की बर्फ में दबा मिला 40 हजार साल पुराना बालों वाला गैंडा! वैज्ञानिकों ने शुरू की जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: sciencenews.org)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: sciencenews.org)

इस वयस्क राइनो (Woolly rhinoceros) की लंबाई 8 फीट है और ये जब मरा होगा तब इसकी उम्र करीब 3 या 4 साल रही होगी. ये राइनो आर्कटिक याकुटिया (Arctic Yakutia) के क्षेत्र में टिरेखटाएख नदी के पास मरा होगा जो दुनिया की सबसे ठंडी जगहों में से एक है.

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    जीव वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. वैज्ञानिकों ने एक वुली राइनो (Woolly rhinoceros) यानी बालों वाले गैंडे का शरीर साइबेरिया (Siberia) से बरामद किया है. जानकारों के हिसाब से गैंडे (Rhino) की मौत करीब 40 हजार साल पहले हुई होगी. साइबेरिया की बर्फ के नीचे दबे रहने के कारण गैंडे के अवशेष वैज्ञानिकों को सही-सलामत प्राप्त हुए हैं. ये वुली प्रजाति का गैंडा है जो माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के चलते करीब 14 हजार साल पहले विलुप्त हो गए थे.

    वैज्ञानिको ने अनुमान लगाया है कि इस गैंडे की मौत दलदल में फंसने से या फिर नदी में डूबने से हुई होगी. जानकारों का ये भी कहना है कि जब वो दलदल या नदी में फंस गया होगा तो पहाड़ी शेर, जो अब विलुप्त हो चुके हैं, इसके पीछे पड़ गए होंगे. विलुप्त होने से पहले वुली राइनो चीन से लेकर यूरोप में ब्रिटेन तक के क्षेत्र में पाए जाते थे.

    Whooly Rhino
    (फोटो: The Siberian Times)


    इस वयस्क राइनो की लंबाई 8 फीट है और ये जब मरा होगा तब इसकी उम्र करीब 3 या 4 साल रही होगी. ये राइनो आर्कटिक याकुटिया के क्षेत्र में टिरेखटाएख नदी के पास मरा होगा जो दुनिया की सबसे ठंडी जगहों में से एक है. इस गैंडे के दांत और सींघ को इतने सालों बद भी नुकसान नहीं पहुंचा था. गैंडे को एक वहीं के आदमी ने देखा और फिर प्रशासन को इसकी सूचना दी.

    गैंडे के बारे में पता चलने के बाद उसपर जांच शुरू हुई और उसे बर्फ से बाहर निकाला गया. अब उस गैंडे से जुड़ी अन्य जानकारियां खोजने में वैज्ञानिक लगे हुए हैं. जांच में सबसे पहले गैंडे पर किसी शिकारी के दातों के निशान की तैयारी होगी. ऐसा माना जा रहा है पहाड़ी शेरों ने ही गैंडे पर हमला किया होगा जो उस वक्त में साइबेरिया के उसी इलाके में रहते थे.

    रूसी वैज्ञानिक वैलेरी प्लॉटनिकोव ने कहा कि बर्फ के कारण गैंडे का अवशेष काफी सुरक्षित है और अब इसके बारे में अधिक जानने के लिए हम अंतरराष्ट्रीय टीम को जुटाएंगे. वैज्ञानिकों ने कहा कि कि गैंडे का दायां हिस्सा अभी भी सुरक्षित है. मौत से पहले गैंडी की खुराक काफी अच्छी रही होगी जिस वजह से चमड़ी के अंदर का फैट अभी तक पाउडर की तरह मौजूद है. गैंडे की सींघ भी उसी जगह से मिली जहां से गैंडे के अवशेष को खोजा गया.

    वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ में दबे रहने के कारण गैंडे का 80 फीसदी अवशेष सुरक्षित है. मगर अभी इस बात का अंदाजा नहीं लगाया गया है कि गैंडे के डीएनए से विलुप्त हुए इस जीव की प्रजाति को फिर से जीवित किया जा सकता है या नहीं.

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