Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    कोरोना संक्रमित साइंटिस्ट ने शेयर किया एक्सपीरियंस, बताया दोबारा कितना खतरनाक है COVID-19

    रूस के 69 साल के एक विषाणुवैज्ञानिक ने 69 साल की उम्र में खुद को जानबूझकर दोबारा कोरोना संक्रमित किया (सांकेतिक फोटो)
    रूस के 69 साल के एक विषाणुवैज्ञानिक ने 69 साल की उम्र में खुद को जानबूझकर दोबारा कोरोना संक्रमित किया (सांकेतिक फोटो)

    एक बार कोविड-19 (Covid-19) से संक्रमित हो चुके डॉ चेपर्नोव भी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज (Antibodies) पर शोध करने वाले रिसर्चरों की टीम (Team of Researchers) के सक्रिय सदस्य थे. इसी शोध के क्रम में उन्होंने खुद को जानबूझकर दोबारा 6 महीने बाद संक्रमित (infected) कराया. दूसरी बार वे पहले की तुलना में भी ज्यादा बीमार (ill) हुए. उन्होंने अपना एक्सपीरिएंस (experience) भी शेयर किया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 31, 2020, 9:53 PM IST
    • Share this:
    एक रूसी वैज्ञानिक (Russian virologist) जिनकी उम्र 69 साल है, उन्होंने खुद को जानबूझकर दोबारा कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित करवाया. वह भी सिर्फ यह जानने के लिए कि उनका शरीर इसके खिलाफ कैसे रिएक्ट करता है. पहली बार फरवरी में इस साइंटिस्ट (Scientist) को फ्रांस (France) में कोरोना हुआ था. उन्हें इलाज की जरूरत नहीं थी, ऐसे में वे अपने घर रूस (Russia) के साइबेरिया में वापस लौट आये थे. चूंकि डॉ एलेक्जेंडर चेपर्नोव नाम के यह वैज्ञानिक कोरोना के संपर्क में आ चुके थे, तो इंस्टीट्यूड ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन (Institute of Clinical and Experimental Medicine) के उनके साथियों ने वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज (Antibodies) के लिए उनका ही अध्ययन करना शुरू किया.

    डॉ चेपर्नोव भी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज (Antibodies) पर शोध करने वाले रिसर्चरों की टीम (Team of Researchers) के सक्रिय सदस्य थे. इसी शोध के क्रम में उन्होंने खुद को जानबूझकर दोबारा 6 महीने बाद संक्रमित (infected) कराया. दूसरी बार वे पहले की तुलना में भी ज्यादा बीमार (ill) हुए. उन्होंने अपना एक्सपीरिएंस (experience) भी शेयर किया है.

    3 महीने के बाद एंटीबॉडीज में आती है भारी गिरावट
    प्रोफेसर और उनकी टीम ने पाया कि शरीर में एंटीबॉडी तेजी से घटते हैं. एंटीबॉडीज के व्यवहार और शरीर के अंदर उनकी लंबी उम्र पर शोध करने वाली उनकी टीम ने पाया कि पहले संक्रमित होने के लगभग 3 महीने बाद, एंटीबॉडी का पता लगाना भी मुश्किल हो रहा था.
    चेपर्नोव ने इस बारे में कहा है, "पहली बार बीमार पड़ने के बाद के तीसरे महीने के अंत से ही एंटीबॉडीज का पता ही नहीं लग रहा था. इसलिए मैंने फिर से होने वाले इंफेक्शन की संभावना की जांच करने का फैसला किया."



    उन्होंने तब कुछ खतरनाक करने का फैसला किया. प्रयोग के लिए वे एक मानव गिनी पिग बनें और वे जानबूझकर कोविड से संक्रमित रोगियों के संपर्क में आए.

    फिर से हुए इंफेक्शन में दिखे गंभीर लक्षण
    चेपर्नोव ने कहा कि उनके शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र पहली बार संक्रमित होने के ठीक छह महीने काम करना बंद कर चुका था. और दूसरी बार का संक्रमण बहुत गंभीर था. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. उनके अंदर पहला लक्षण गले में खराश दिखा था.

    चेपर्नोव के एक बयान में बताया गया है, "पांच दिनों के लिए, मेरा तापमान 39'C या 102'F से ऊपर रहा. मैंने गंध, स्वाद पहचानने की क्षणता खो दी थी. बीमारी के छठे दिन, फेफड़ों का सीटी स्कैन साफ था लेकिन और तीन दिन बीते तो एक्स-रे ने डबल निमोनिया दिखाया."

    यह भी पढ़ें: 8 साल से लकवाग्रस्त था मस्तिष्क रोगी, नींद की दवा लेने के 20 मिनट के अंदर ठीक हुआ

    चेपर्नोव ने कहा कि वायरस जल्दी चला गया और 2 सप्ताह के भीतर वे इस संक्रमण के सभी प्रभावों से मुक्त हो चुके हैं.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज