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यहां मछुआरे तक क्रिप्टोकरेंसी से खरीदते हैं आटा-चावल, वो गांव जहां 70% लोगों का नहीं है बैंक अकाउंट

भारत में बिटकॉइंस और क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आज भी लोगों के मन में कन्फ्यूजन है

भारत में बिटकॉइंस और क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आज भी लोगों के मन में कन्फ्यूजन है

बीते दिनों अचानक ही क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और बिटकॉइंस (Bitcoins) चर्चा में आ गए. लोग अब इन्हीं में इन्वेस्ट कर फ्यूचर में बड़ा मुनाफा कमाने की फिराक में है. भारत में फिर भी इसका इस्तेमाल अभी काफी कम है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश है जहां लोग राशन भी क्रिप्टोकरेंसी से खरीदते हैं.

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    आज के समय में डिजिटल करेंसी (Digital Currency) चलन में है. खासकर क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और बिटकॉइंस (Bitcoins) का यूज सबसे ज्यादा होने लगा है. भारत में भी अब लोग इन डिजिटल करेंसी में इन्वेस्ट करने लगे हैं. हालांकि, इसका मुख्य मकसद है भविष्य में प्रॉफिट (Profit) कमाना. लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश है जहां एक गांव में लोग पैसों की जगह सिर्फ डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल करते हैं. इस गांव में लोग राशन से लेकर सब्जी भी क्रिप्टोकरेंसी से खरीदते हैं.

    जी हां, आज के समय में जब एक क्रिप्टोकरेंसी की कीमत लाखों में है, वैसे हालत में अल सल्वाडोर (El-Salvador) देश में अब लोग हर तरह के देन-लेन के लिए सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करेंगे. इससे पहले यहां बिटकॉइंस के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी. लेकिन अब इस लिस्ट में क्रिप्टोकरेंसी को भी शामिल कर दिया गया है. सिर्फ उन लोगों को कैश का इस्तेमाल करने की छूट दी गई है जिनके पास तकनीक की कमी है. साथ ही हर बिजनेसमैन को इन डिजिटल करेंसी को स्वीकार करने को कहा गया है.

    संसद में आया फैसला
    डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने के लिए अल सल्वाडोर की संसद ने इसे लेकर फैसला सुनाया. यहां अब क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइंस को वैधानिक मुद्रा का दर्जा दिया गया है. वैसे तो संसद ने अब जाकर ये आदेश दिया है लेकिन इस देश के एक गांव अल जोंटे में रहने वाले लोग बीते कई सालों से इन डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां राशन से लेकर हर तरह के बिल भी क्रिप्टोकरेंसी से भरे जाते हैं.

    मछुआरों के पास भी है क्रिप्टोकरेंसी
    अल सल्वाडोर के इस गांव में करीब 500 लोग रहते हैं. इनमें अधिकांश मछली पकड़ते हैं. यहां लोग राशन खरीदने के लिए भी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा हर छोटे-मोटे जरुरत की चीजों के लिए भी ये इन्हीं डिजिटल करेंसी पर डिपेंड करते है. दरअसल, इस गांव में करीब 70 प्रतिशत लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं. ऐसे में उन्हें डिजिटल करेंसी से जोड़कर यहां की सरकार दुनिया के निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है.

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